मध्य प्रदेश में आयुष्मान योजना पर कड़ा प्रहार: 69 अस्पतालों की मान्यता रद्द, 21 को मिली अंतिम चेतावनी मध्य प्रदेश 10 घंटे पहले 1
मध्य प्रदेश सरकार ने आयुष्मान भारत निरामयम योजना में लापरवाही बरतने वाले 69 अस्पतालों को सूची से बाहर कर दिया है, जिसमें भोपाल के 27 अस्पताल शामिल हैं। साथ ही, लंबित दावों के त्वरित निपटान के लिए 50 नए डॉक्टरों की नियुक्ति की गई है।

आयुष्मान योजना के नियमों में सख्ती

मध्य प्रदेश में आयुष्मान भारत निरामयम योजना के तहत एक बड़ा प्रशासनिक कदम उठाते हुए कुल 69 अस्पतालों को योजना से हटा दिया गया है। इन अस्पतालों की सूची से बाहर होने का मुख्य कारण गुणवत्ता मानकों में कमी और जरूरी दस्तावेजों का अभाव बताया जा रहा है। विशेष रूप से राजधानी भोपाल में इस कार्रवाई का सबसे ज्यादा असर पड़ा है, जहां के 27 निजी अस्पतालों की संबद्धता खत्म कर दी गई है। राज्य सरकार की इस कार्रवाई का उद्देश्य इलाज की गुणवत्ता को सुधारना और योजना के तहत अनियमितताओं पर लगाम लगाना है।

क्यों की गई कार्रवाई?

अस्पताल संचालकों के खिलाफ इस बड़ी कार्रवाई के पीछे कई ठोस कारण जिम्मेदार हैं। आंकड़ों के मुताबिक, करीब 60 अस्पताल राष्ट्रीय प्रत्यायन बोर्ड यानी NABH से मिलने वाला अनिवार्य गुणवत्ता प्रमाणपत्र जमा करने में विफल रहे हैं। योजना के दिशा-निर्देशों के अनुसार, यह प्रमाणपत्र होना अनिवार्य है ताकि मरीजों को बेहतर इलाज मिल सके। इसके अलावा, 5 ऐसे अस्पतालों को भी बाहर किया गया है, जिन्होंने पिछले 6 महीनों से आयुष्मान कार्डधारकों को उपचार देने का काम पूरी तरह बंद कर दिया था। इसके अतिरिक्त, 3 अन्य अस्पतालों पर अलग-अलग अनियमितताओं के आधार पर प्रतिबंध लगाया गया है। भोपाल का मारुति अस्पताल एक गंभीर मामले के चलते कार्रवाई की चपेट में आया है, जहां एक मृत मरीज के नाम पर फर्जी तरीके से बीमा क्लेम उठाने की बात सामने आई थी।

इन अस्पतालों पर गिरी गाज

भोपाल के जिन 27 अस्पतालों को योजना की सूची से हटाया गया है, उनमें प्रमुख रूप से नवोदय हॉस्पिटल एंड रिसर्च सेंटर, श्रीराम मल्टीस्पेशियलिटी हॉस्पिटल, आरएआई हॉस्पिटल एंड रिसर्च सेंटर, परफेक्ट मल्टीस्पेशियलिटी हॉस्पिटल एंड कैंसर सेंटर, सेंट्रल हॉस्पिटल, रक्षा हॉस्पिटल, सहज हॉस्पिटल, गुडविल हॉस्पिटल, एबी हॉस्पिटल, वीएनएस हॉस्पिटल, राजधानी हॉस्पिटल और एशियन हॉस्पिटल जैसे नाम शामिल हैं। वहीं, 5 अस्पताल जिन्होंने बीते 6 माह से मरीजों का इलाज नहीं किया, उनमें शल्या जॉइंट केयर (भोपाल), मेट्रो न्यूरो हॉस्पिटल (ग्वालियर), रामनिवास आयरन हॉस्पिटल (नीमच), श्री डीपी केयर हॉस्पिटल (शाजापुर) और न्यू सिटी हॉस्पिटल (टीकमगढ़) शामिल हैं।

राहत और मोहलत

प्रशासन ने कुछ अस्पतालों को सुधार के लिए थोड़ा अतिरिक्त समय भी दिया है। भोपाल के 10 अस्पतालों को फिलहाल राहत देते हुए योजना में बरकरार रखा गया है, जिनमें हेल्थ स्टार मल्टीस्पेशियलिटी, मयूर हॉस्पिटल, शुभम हॉस्पिटल, एलएन मेडिकल कॉलेज एंड जेके हॉस्पिटल, लक्ष्मी मल्टीस्पेशियलिटी हॉस्पिटल, एपेक्स हॉस्पिटल और पीपुल्स हॉस्पिटल शामिल हैं। इसके अलावा कुल 21 अस्पतालों को 31 अक्टूबर तक का समय दिया गया है ताकि वे अपना NABH प्रमाणपत्र हासिल कर सकें। यदि तय समयसीमा तक ये अस्पताल मानक पूरे नहीं करते हैं, तो उनकी मान्यता भी रद्द की जा सकती है। योजना के मुख्य कार्यपालन अधिकारी अरविंद शाह ने स्पष्ट किया है कि नियमों से किसी भी प्रकार का समझौता नहीं किया जाएगा।

लंबित दावों के निपटारे के लिए नई पहल

अस्पतालों द्वारा भुगतान में देरी को लेकर किए गए आंदोलन के बाद सरकार ने एक बड़ा निर्णय लिया है। सरकार ने अब पोर्टल-2 पर लंबित पड़े एक लाख से ज्यादा दावों का निपटारा अगले दो महीने में पूरा करने का लक्ष्य रखा है। इस कार्य को गति देने के लिए सरकार ने 50 डॉक्टरों की विशेष नियुक्ति की है, जो लंबित भुगतान संबंधी मामलों को प्राथमिकता के आधार पर हल करेंगे। यह कदम अस्पतालों को वित्तीय संकट से उबारने और मरीजों के इलाज में बाधा न आए, यह सुनिश्चित करने के लिए उठाया गया है।

अंजलि सिंह पाबना की राज्य संवाददाता हैं, जो विभिन्न राज्यों की क्षेत्रीय खबरें और खानपान कवर करती हैं। स्थानीय घटनाओं, संस्कृति और जायके की कहानियों को वे करीब से रिपोर्ट करती हैं। अलग-अलग राज्यों की विविधता उनकी रिपोर्टिंग में नजर आती है।

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