बिहार
2 घंटे पहले
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भोजपुर में शराब तस्करों का काल बनी डॉग पूजा
बिहार के भोजपुर जिले में शराबबंदी कानून को सख्ती से लागू करने के लिए पुलिस और उत्पाद विभाग लगातार कार्रवाई कर रहे हैं। इस अभियान में सबसे बड़ी चुनौती तस्करों द्वारा शराब छिपाने के नए-नए तरीके थे। तस्कर कभी जमीन के भीतर, तो कभी नदियों और बालू के ढेरों में शराब छिपाते थे। लेकिन, इन शातिर तस्करों की हर चाल पर पानी फेरने के लिए विभाग के पास एक 'सुपर कॉप' मौजूद है। उत्पाद विभाग की स्निफर डॉग पूजा ने अब तक 16 करोड़ 60 लाख रुपये से अधिक की अवैध शराब पकड़कर अपनी कार्यक्षमता का लोहा मनवाया है।
मात्र 8 हजार रुपये में बड़ा कारनामा
पूजा की खासियत केवल उसकी सूंघने की क्षमता नहीं, बल्कि उसकी किफायती उपयोगिता भी है। उसके खान-पान और देखभाल पर विभाग हर महीने लगभग 8 हजार रुपये का खर्च करता है। इस मामूली निवेश के बदले पूजा का प्रदर्शन असाधारण रहा है। आंकड़ों पर गौर करें तो पिछले कुछ वर्षों में इस डॉग ने औसतन हर महीने 40 से 50 लाख रुपये की अवैध शराब की बरामदगी कराई है। इस तरह शराब माफियाओं को अब तक 16 करोड़ 60 लाख रुपये का बड़ा नुकसान झेलना पड़ा है।
बेल्जियम मेलिनोइस नस्ल की जांबाज स्निफर डॉग
पूजा 'बेल्जियम मेलिनोइस' नस्ल की बेहद फुर्तीली और समझदार कुतिया है। इस नस्ल का उपयोग दुनिया भर की खुफिया एजेंसियां और सेनाएं विशेष ऑपरेशनों के लिए करती हैं। पूजा ने हैदराबाद स्थित तेलंगाना पुलिस इंटेलिजेंस डॉग ट्रेनिंग एकेडमी में 9 महीने की कठिन ट्रेनिंग पूरी की है। यही कारण है कि जमीन के अंदर गहरे छिपी हुई देसी शराब की गंध भी उससे बच नहीं पाती। हालांकि, सील बंद विदेशी शराब की बोतलें कभी-कभी उसे भ्रमित जरूर कर देती हैं, लेकिन देसी शराब के अवैध कारोबारियों के लिए वह एक बड़ी चुनौती बन चुकी है।
तस्करों में पूजा की दहशत
आज भोजपुर के शराब माफियाओं और तस्करों के बीच पुलिस की बंदूकों से ज्यादा डर पूजा की सूंघने वाली नाक का है। उसे देखते ही तस्करों के पसीने छूटने लगते हैं। उसने यह साबित कर दिया है कि कानून का इकबाल केवल वर्दीधारियों से ही नहीं, बल्कि महकमे की ऐसी विशेष प्रशिक्षित इकाइयों से भी बुलंद होता है। महज 8 हजार रुपये के बजट वाली इस स्निफर डॉग ने 16 करोड़ 60 लाख रुपये के शराब साम्राज्य पर वार कर यह दिखा दिया है कि अपराधियों के छिपने के रास्ते अब खत्म हो चुके हैं।
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