भोजपुर का चर्चित भरत तिवारी एनकाउंटर मामला: सरेंडर के बाद पहली गोली मारने का आरोपी एसटीएफ जवान अक्षय कुमार गिरफ्तार, परिजनों ने लगाए थे गंभीर आरोप बिहार एक घंटा पहले 5
बिहार के भोजपुर जिले के बहुचर्चित भरत तिवारी एनकाउंटर मामले में पुलिस ने बड़ी कार्रवाई करते हुए आरोपी एसटीएफ जवान अक्षय कुमार को गिरफ्तार कर लिया है, जिस पर आत्मसमर्पण कर चुके युवक पर पहली गोली चलाने का आरोप है।

बिहार के भोजपुर जिले में हुए चर्चित भरत तिवारी कथित एनकाउंटर मामले में एक बेहद महत्वपूर्ण मोड़ आया है। घटना के करीब डेढ़ महीने बाद पुलिस ने इस मामले के मुख्य आरोपी और बिहार एसटीएफ (स्पेशल टास्क फोर्स) के जवान अक्षय कुमार को गिरफ्तार कर लिया है। इस एनकाउंटर को लेकर शुरुआत से ही गंभीर सवाल उठ रहे थे और पीड़ित परिवार लगातार पुलिसकर्मियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग कर रहा था। आरोपी एसटीएफ जवान पर आरोप है कि उसने आत्मसमर्पण कर चुके भरत तिवारी पर पहली गोली चलाई थी। इस गिरफ्तारी की पुष्टि भोजपुर के एसपी राज ने की है। पुलिस और एसटीएफ की एक संयुक्त टीम ने तकनीकी सर्विलांस की मदद से देर रात आरोपी जवान को दबोच लिया।

कथित एनकाउंटर पर उठे थे गंभीर सवाल: क्या हुआ था बिलौटी गांव में?

यह पूरी घटना भोजपुर जिले के शाहपुर थाना क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले बिलौटी गांव की है। 17 जून 2026 को यहां पुलिस और एसटीएफ की टीम ने एक विशेष अभियान के तहत कार्रवाई की थी। पुलिस का दावा था कि उनके पास भरत तिवारी के बारे में पुख्ता इनपुट था और कार्रवाई के दौरान मुठभेड़ की स्थिति बन गई थी। हालांकि, भरत तिवारी के परिजनों ने इस दावे को पूरी तरह से खारिज कर दिया था। परिजनों का कहना था कि यह कोई मुठभेड़ नहीं थी बल्कि एक सोची-समझी साजिश के तहत की गई हत्या थी। इस घटना के बाद से ही स्थानीय लोगों और परिजनों में पुलिस प्रशासन के खिलाफ भारी आक्रोश व्याप्त था।

कौन है आरोपी एसटीएफ जवान अक्षय कुमार?

गिरफ्तार किया गया आरोपी अक्षय कुमार बिहार पुलिस की स्पेशल टास्क फोर्स (एसटीएफ) की विशेष ऑपरेशन ग्रुप (एसओजी) टीम में तैनात एक जवान है। 17 जून को बिलौटी गांव में की गई छापेमारी और कार्रवाई के दौरान अक्षय कुमार भी पुलिस टीम का हिस्सा था। इसी कार्रवाई के दौरान भरत भूषण तिवारी को गोलियां लगी थीं, जिसके बाद बेहद गंभीर हालत में उसे अस्पताल ले जाया गया, जहां इलाज के दौरान उसने दम तोड़ दिया। जांच के दौरान यह बात सामने आई कि भरत पर पहली गोली चलाने वाला कोई और नहीं बल्कि एसटीएफ का यही जवान अक्षय कुमार था। घटना के बाद से ही वह लगातार फरार चल रहा था और पुलिस की गिरफ्त से बाहर था।

सोशल मीडिया लाइव वीडियो बना सबसे बड़ा सबूत

इस पूरे मामले में सबसे बड़ा और चौंकाने वाला मोड़ तब आया जब सोशल मीडिया पर एक वीडियो तेजी से वायरल होने लगा। यह वीडियो खुद भरत तिवारी ने घटना के समय फेसबुक पर लाइव किया था। इस लाइव वीडियो ने पुलिस के एनकाउंटर वाले दावे की हवा निकाल दी। वीडियो में साफ तौर पर देखा जा सकता था कि पुलिस की घेराबंदी के बाद भरत तिवारी ने उनके कहने पर अपनी पिस्टल नीचे फेंक दी थी। उसने अपने दोनों हाथ हवा में उठा लिए थे और खुद को पुलिस के हवाले यानी आत्मसमर्पण (सरेंडर) कर दिया था। इस डिजिटल सबूत के सामने आने के बाद यह मामला सामान्य पुलिस मुठभेड़ से हटकर सीधे-सीधे हत्या के संगीन मामले में तब्दील हो गया और जांच की दिशा ही बदल गई।

मां आशा देवी और भाई चंदन तिवारी के गंभीर आरोप

भरत तिवारी की मां आशा देवी और उनके भाई चंदन तिवारी ने पुलिस की इस कार्रवाई को बर्बरता करार दिया है। मां आशा देवी का आरोप है कि जब उनके बेटे ने अपनी पिस्टल फेंक दी और निहत्था होकर हाथ खड़े कर दिए, तो पुलिस टीम के साथ मौजूद एसटीएफ जवान अक्षय कुमार ने उस पर पहली गोली दाग दी। परिजनों के अनुसार, आत्मसमर्पण करने के बावजूद भरत तिवारी को एक के बाद एक कुल 5 गोलियां मारी गईं। इतनी गोलियां लगने के कारण उसने मौके पर ही दम तोड़ दिया था। इस निर्मम घटना के बाद से ही परिवार लगातार आरोपी पुलिसकर्मियों की तत्काल गिरफ्तारी की मांग कर रहा था।

मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के हस्तक्षेप के बाद जांच में आई तेजी

इस कथित एनकाउंटर को लेकर स्थानीय स्तर पर विरोध प्रदर्शन तेज हो गए थे और न्याय की मांग को लेकर लोग सड़कों पर उतर आए थे। मामले की गंभीरता को देखते हुए पीड़ित परिवार ने पटना का रुख किया। वहां उन्होंने बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी से मुलाकात की और अपनी आपबीती सुनाते हुए न्याय की गुहार लगाई। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने परिवार को निष्पक्ष जांच और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई का पूरा आश्वासन दिया। इस मुलाकात के बाद मामले की जांच में काफी तेजी आई। पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए आरोपी जवान अक्षय कुमार की सरकारी सर्विस पिस्टल को तुरंत जब्त कर लिया और उसे बैलिस्टिक तथा फॉरेंसिक जांच के लिए पटना भेज दिया ताकि वैज्ञानिक रूप से यह साबित किया जा सके कि भरत को लगी गोली इसी हथियार से चली थी।

जगदीशपुर एसडीपीओ और शाहपुर थानाध्यक्ष पर भी लटकी तलवार

भरत तिवारी की मां आशा देवी द्वारा दर्ज कराई गई प्राथमिकी (एफआईआर) में सिर्फ एसटीएफ जवान अक्षय कुमार ही नामजद नहीं है, बल्कि पुलिस विभाग के कई वरिष्ठ और स्थानीय अधिकारियों को भी इसमें आरोपी बनाया गया है। इसमें तत्कालीन जगदीशपुर एसडीपीओ राजेश कुमार शर्मा और शाहपुर के तत्कालीन थानाध्यक्ष राजेश मालाकार के नाम भी शामिल हैं। आरोपी जवान अक्षय कुमार की गिरफ्तारी के बाद अब पुलिस जांच का दायरा इन अधिकारियों तक भी पहुंच गया है। पुलिस इस बात की गहराई से तफ्तीश कर रही है कि जब भरत तिवारी ने सरेंडर कर दिया था, तो आखिर किसके आदेश पर उस पर गोलियां चलाई गईं। इस गिरफ्तारी के बाद माना जा रहा है कि आने वाले दिनों में कुछ अन्य पुलिस अधिकारियों पर भी बड़ी गाज गिर सकती है।

सरकार ने गठित किया न्यायिक आयोग

इस बहुचर्चित मामले को लेकर बढ़ते जन आक्रोश और सवालों के बीच बिहार सरकार ने एक उच्च स्तरीय न्यायिक आयोग का भी गठन किया है। इस आयोग का नेतृत्व रिटायर्ड जस्टिस विनोद कुमार कर रहे हैं। न्यायिक आयोग पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर रहा है, जिसमें घटना से जुड़े सभी पहलुओं की बारीकी से पड़ताल की जा रही है। जांच प्रक्रिया के तहत स्थानीय लोगों, चश्मदीदों और पुलिसकर्मियों की बारी-बारी से गवाही दर्ज कराई जा रही है।

इस घटना के प्रशासनिक प्रभाव भी देखने को मिले हैं, जिसके तहत:

  • जगदीशपुर के तत्कालीन एसडीएम संजीत कुमार को उनके पद से हटाकर पटना सचिवालय अटैच कर दिया गया है।
  • जगदीशपुर के तत्कालीन एसडीपीओ राजेश कुमार शर्मा को भी पदमुक्त कर पुलिस मुख्यालय क्लोज कर दिया गया है।
  • शाहपुर के तत्कालीन थानाध्यक्ष राजेश मालाकार के खिलाफ भी विभागीय स्तर पर कड़ी कार्रवाई शुरू की जा चुकी है।

इस पूरे मामले में एसटीएफ जवान अक्षय कुमार की यह गिरफ्तारी पहली बड़ी और ठोस कार्रवाई मानी जा रही है। अब सभी की निगाहें न्यायिक आयोग की रिपोर्ट और न्यायालय की अगली प्रक्रिया पर टिकी हुई हैं ताकि पीड़ित परिवार को पूरी तरह से न्याय मिल सके।

अंजलि सिंह पाबना की राज्य संवाददाता हैं, जो विभिन्न राज्यों की क्षेत्रीय खबरें और खानपान कवर करती हैं। स्थानीय घटनाओं, संस्कृति और जायके की कहानियों को वे करीब से रिपोर्ट करती हैं। अलग-अलग राज्यों की विविधता उनकी रिपोर्टिंग में नजर आती है।

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