भरत तिवारी एनकाउंटर केस में बड़ा खुलासा: गवाहों ने आयोग के सामने पुलिस पर लगाए गंभीर आरोप बिहार एक महीने पहले 93
भोजपुर के चर्चित भरत तिवारी एनकाउंटर मामले में न्यायिक जांच ने रफ्तार पकड़ ली है। गवाहों ने आयोग के सामने पुलिस की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाते हुए दोषियों को कड़ी सजा देने की मांग की है।

न्यायिक जांच में तेजी

भोजपुर जिले के शाहपुर थाना अंतर्गत बिलौटी गांव में हुए भरत तिवारी एनकाउंटर मामले में अब न्याय की प्रक्रिया ने गति पकड़ ली है। राज्य सरकार की ओर से गठित न्यायिक जांच आयोग ने इस पूरे घटनाक्रम की बारीकी से जांच शुरू कर दी है। इसी सिलसिले में गवाही की प्रक्रिया के तहत मृत युवक की भाभी सुमन देवी और जवईनिया गांव के निवासी सत्यनारायण चौधरी ने पटना स्थित आयोग के कार्यालय पहुंचकर अपना बयान दर्ज कराया। इस दौरान वहां सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए गए थे और बड़ी तादाद में पुलिस बल की तैनाती देखी गई।

रिटायर्ड जज के सामने दर्ज हुए बयान

आयोग के अध्यक्ष और हाईकोर्ट के रिटायर्ड जज जस्टिस विनोद कुमार सिन्हा के समक्ष गवाहों ने अपनी बात रखी। सुमन देवी और सत्यनारायण चौधरी ने न केवल घटना के संबंध में जानकारी दी, बल्कि पुलिस की भूमिका पर भी कई सवाल खड़े किए। आयोग ने दोनों पक्षों को गंभीरता से सुना है और उम्मीद जताई जा रही है कि जल्द ही मामले की सच्चाई सामने आएगी। सुमन देवी से आयोग ने करीब डेढ़ घंटे तक विस्तार से पूछताछ की, जिसमें उन्होंने घटना के दौरान के हालात और उसके बाद के घटनाक्रम पर प्रकाश डाला।

सरेंडर के बाद हत्या का दावा

आयोग के कार्यालय से बाहर निकलने के बाद गवाहों ने मीडिया के सामने जो दावे किए, उसने मामले को नया मोड़ दे दिया है। भरत तिवारी की भाभी सुमन देवी ने बताया कि उन्होंने जस्टिस विनोद कुमार सिन्हा के समक्ष पूरी हकीकत बयां कर दी है। उन्होंने आयोग से न्याय की गुहार लगाई है और मांग की है कि इस एनकाउंटर में शामिल डीएसपी, एसएचओ और अन्य पुलिसकर्मियों को कड़ी से कड़ी सजा दी जाए। सुमन देवी का आरोप है कि पुलिसकर्मियों ने एक निर्दोष को जानबूझकर निशाना बनाया।

50 मीटर दूर ले जाकर मारी गई गोलियां

ग्रामीण सत्यनारायण चौधरी ने गवाही के दौरान जो विवरण दिया, वह हैरान करने वाला है। उन्होंने बताया कि जब उनसे पूछा गया कि भरत तिवारी की मौत कैसे हुई, तो उन्होंने स्पष्ट किया कि भरत ने पुलिस के सामने खुद को समर्पित कर दिया था। इसके बावजूद डीएसपी और दरोगा ने उसे वहां से 50 मीटर दूर ले जाकर गोली मार दी। सत्यनारायण के मुताबिक, उस समय घटनास्थल पर प्रशासन के लगभग 35 लोग मौजूद थे। उन्होंने भरत को एक नेक इंसान बताते हुए कहा कि उसने ग्रामीणों के लिए अपनी जान दी है।

जांच का दायरा और आगे की प्रक्रिया

इस पूरे मामले की शुरुआत 17 जून को हुई, जब बिलौटी गांव में भरत भूषण तिवारी का पुलिस एनकाउंटर हुआ था। परिवार के लोगों ने इसे फर्जी बताते हुए उच्चस्तरीय जांच की मांग की थी, जिसके बाद सरकार ने न्यायिक आयोग का गठन किया। इससे पहले भरत तिवारी की मां आशा देवी और पिता काशीनाथ तिवारी अपनी गवाही आयोग के समक्ष दर्ज करा चुके हैं। अब सभी की निगाहें उनके भाई चंदन तिवारी की गवाही पर टिकी हैं, जिनकी पेशी अभी होनी बाकी है। पीड़ित परिवार और ग्रामीण लगातार इस बात पर जोर दे रहे हैं कि एनकाउंटर में शामिल पुलिसकर्मियों को न केवल सेवा से बर्खास्त किया जाए, बल्कि उनके खिलाफ कठोरतम कानूनी कार्रवाई भी सुनिश्चित की जाए।

अंजलि सिंह पाबना की राज्य संवाददाता हैं, जो विभिन्न राज्यों की क्षेत्रीय खबरें और खानपान कवर करती हैं। स्थानीय घटनाओं, संस्कृति और जायके की कहानियों को वे करीब से रिपोर्ट करती हैं। अलग-अलग राज्यों की विविधता उनकी रिपोर्टिंग में नजर आती है।

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