श्रावणी मेले में आए बड़ा बदलाव, भक्त बोले- पहले पथरीले रास्तों और पानी की किल्लत के बीच पूरी होती थी कठिन यात्रा बिहार एक महीने पहले 45
भागलपुर में श्रावणी मेले की तैयारियों ने जोर पकड़ लिया है और इस बार श्रद्धालुओं के लिए आधुनिक सुविधाएं जुटाई जा रही हैं। पुराने कांवड़ियों के अनुसार, पहले के मुकाबले अब यात्रा काफी सुगम हो गई है क्योंकि पहले पीने के पानी और बुनियादी सुविधाओं का भारी अभाव होता था।

बदल गई श्रावणी मेले की सूरत

श्रावणी मेले का समय करीब आते ही भागलपुर में तैयारियां पूरे शवाब पर हैं। इस बार मेले का स्वरूप हर साल की तुलना में काफी अलग नजर आने वाला है। सावन का महीना आते ही भगवान शिव के अनन्य भक्त सुदूर क्षेत्रों से जल लेकर बाबा भोलेनाथ को अर्पित करने के लिए उमड़ पड़ते हैं। प्रशासन की ओर से इस बात का विशेष ध्यान रखा जा रहा है कि श्रद्धालुओं को किसी भी स्तर पर असुविधा का सामना न करना पड़े। मौजूदा दौर में जब श्रद्धालु देवघर की यात्रा करते हैं, तो उन्हें हर कदम पर मुकम्मल इंतजाम मिलते हैं, लेकिन एक दौर ऐसा भी था जब यह पूरा रास्ता कांटों भरी राह से कम नहीं हुआ करता था।

साल 1996 का वह संघर्षपूर्ण सफर

जब हमारी टीम ने सुल्तानगंज गंगा घाट का जायजा लिया, तो वहां पूरी तरह से बदली हुई व्यवस्थाएं देखने को मिलीं। बांग्ला सावन की शुरुआत के साथ ही कांवड़ियों का आना शुरू हो गया है। पश्चिम बंगाल से पहुंचे कांवड़िया मिंटू महंथ ने अपने अनुभवों को साझा करते हुए बताया कि वे साल 1996 से लगातार इस यात्रा पर आ रहे हैं। उन्होंने कहा कि उस समय और आज की व्यवस्थाओं में जमीन-आसमान का अंतर है। उन दिनों न तो घाट पर कोई ठोस व्यवस्था होती थी और न ही रास्ते में ठहरने या अन्य सुविधाओं का नामो-निशान था।

मिंटू महंथ ने याद करते हुए बताया कि उस समय रास्ते भर कंकड़ और पत्थरों की भरमार रहती थी, जिससे पैदल चलना बेहद कष्टकारी होता था। सबसे बड़ी चुनौती सुइयां पहाड़ को पार करने की होती थी। उस दौर में पीने का पानी तो दूर, शौचालय तक की कोई सुविधा उपलब्ध नहीं थी। राहगीरों को पानी की एक बूंद के लिए भी दूर-दराज के घरों पर निर्भर रहना पड़ता था। आज कांवड़ियों के लिए रास्ते पर बालू बिछाई जाती है, पीने के पानी और साफ-सफाई के लिए शौचालयों के पुख्ता इंतजाम किए गए हैं, जिससे यात्रा की थकान काफी कम हो गई है।

इस बार श्रावणी मेले का रंग होगा निराला

इस वर्ष सावन की शुरुआत होते ही सुल्तानगंज में जल भरने वाले श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ रही है। जिलाधिकारी अलंकृता पांडेय स्वयं पूरी व्यवस्था की निगरानी कर रही हैं और समय-समय पर जरूरी दिशा-निर्देश दे रही हैं। इस बार श्रद्धालुओं के ठहरने के लिए न केवल टेंट सिटी का निर्माण किया गया है, बल्कि स्विस कॉटेज की सुविधा भी उपलब्ध कराई गई है ताकि उन्हें कोई परेशानी न हो।

प्रशासन की ओर से इस बार भक्तों के स्वागत के लिए फूलों की वर्षा की योजना है। बैरिकेडिंग का काम लगभग पूरा कर लिया गया है और सुरक्षा के कड़े इंतजाम सुनिश्चित किए जा रहे हैं। आला अधिकारी लगातार निरीक्षण कर रहे हैं ताकि व्यवस्था में कोई चूक न हो। इसके अलावा, अजगैबीनाथ धाम में भी भक्तों को अर्घा सिस्टम के माध्यम से जलार्पण करने की सुविधा मिलेगी, जिससे भीड़ नियंत्रण में मदद मिलेगी। कुल मिलाकर, इस बार श्रावणी मेला बेहतर सुविधाओं के साथ शुरू होने के लिए पूरी तरह तैयार है।

अंजलि सिंह पाबना की राज्य संवाददाता हैं, जो विभिन्न राज्यों की क्षेत्रीय खबरें और खानपान कवर करती हैं। स्थानीय घटनाओं, संस्कृति और जायके की कहानियों को वे करीब से रिपोर्ट करती हैं। अलग-अलग राज्यों की विविधता उनकी रिपोर्टिंग में नजर आती है।

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