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एक घंटा पहले
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बेंगलुरु में दर्ज हुई शिकायत
बेंगलुरु पुलिस ने शुक्रवार को उत्तराखंड भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के कई पदाधिकारियों और सदस्यों के खिलाफ जीरो FIR दर्ज की है। यह कार्रवाई कांग्रेस अध्यक्ष और राज्यसभा में विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खड़गे के रैली स्थल पर कथित रूप से किए गए शुद्धिकरण अनुष्ठान के विरोध में की गई है। इस मामले में औपचारिक शिकायत इंडियन नेशनल कांग्रेस के अनुसूचित जनजाति (ST) विभाग के पूर्व उपाध्यक्ष टी.आर. रामप्पा (65) ने दर्ज कराई थी।
हल्द्वानी में क्या हुआ था
शिकायतकर्ता के अनुसार, मल्लिकार्जुन खड़गे ने 8 अगस्त को उत्तराखंड के नैनीताल जिले के हल्द्वानी स्थित रामलीला मैदान में एक शांतिपूर्ण जनसभा को संबोधित किया था। आरोप है कि इस रैली के दो दिन बाद, यानी 10 अगस्त को स्थानीय बीजेपी नेताओं ने उस सभा स्थल पर पहुंचकर अनुष्ठानिक सफाई या शुद्धिकरण का आयोजन किया। शिकायत में कहा गया है कि यह कृत्य दुर्भावनापूर्ण था और इसका उद्देश्य जातिवादी मानसिकता को बढ़ावा देना था। ऐसा प्रदर्शित किया गया मानो मल्लिकार्जुन खड़गे, जो अनुसूचित जाति समुदाय से आते हैं, के वहां मौजूद रहने से मैदान अपवित्र हो गया था।
उत्तराखंड बीजेपी अध्यक्ष का नाम शामिल
इस शिकायत में उत्तराखंड बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष महेंद्र भट्ट का विशेष रूप से उल्लेख किया गया है। आरोप है कि महेंद्र भट्ट ने मीडिया के समक्ष अपने बयानों के जरिए इस अनुष्ठान का न केवल बचाव किया, बल्कि उसे समर्थन भी दिया। शिकायतकर्ता का तर्क है कि एक जिम्मेदार पद पर बैठे व्यक्ति द्वारा ऐसा व्यवहार भेदभावपूर्ण मानसिकता को आधिकारिक प्रोत्साहन देने के समान है।
कानूनी धाराओं के तहत कार्रवाई
विधान सौधा पुलिस थाने में यह मामला कई सख्त धाराओं के तहत दर्ज किया गया है। इनमें नागरिक अधिकार संरक्षण अधिनियम, 1955 की धारा 7(1)(c), 7(1)(d) और 7(1) के साथ-साथ अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम, 1989 की धारा 3(1)(u) शामिल है। इसके अलावा, भारतीय न्याय संहिता (BNS), 2023 की धारा 196(1)(b) के तहत भी केस दर्ज किया गया है। पुलिस अधिकारियों ने बताया कि 31 अगस्त को प्राप्त लिखित शिकायत पर विधिक राय लेने के बाद यह जीरो FIR दर्ज की गई है और मामले की जांच की जा रही है।
राहुल गांधी ने भी उठाया था मुद्दा
इससे पूर्व कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के जरिए उत्तराखंड की इस घटना पर तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की थी। उन्होंने इस शुद्धिकरण के कृत्य को दलितों के प्रति भेदभाव का प्रतीक बताते हुए बीजेपी और आरएसएस पर कड़े प्रहार किए थे। राहुल गांधी ने मांग की थी कि आरोपियों के खिलाफ एससी और एसटी एक्ट के तहत कानूनी कार्रवाई की जाए और इसे समाज के लिए एक अपमानजनक घटना करार दिया था।
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