मंझौल अनुमंडल अस्पताल में 'तत्त्व केंद्रम' शुरू, अब ओपीडी से दवा काउंटर तक मरीजों के साथ चलेंगे कर्मी बिहार एक घंटा पहले 2
बेगूसराय के मंझौल अनुमंडल अस्पताल में पहली बार 'तत्त्व केंद्रम' सुविधा का ट्रायल शुरू हुआ है, जहां कर्मी मरीजों को जरूरी जानकारी देने के साथ-साथ संबंधित विभाग तक उनके साथ जाकर मदद करते हैं।

बेगूसराय के मंझौल अनुमंडल अस्पताल में मरीजों की सुविधा के लिए एक नई व्यवस्था शुरू की गई है। यहां पहली बार 'तत्त्व केंद्रम' नाम की सेवा का ट्रायल चल रहा है, जिसके तहत अस्पताल पहुंचने वाले मरीजों को ओपीडी, जांच और दवा विभाग तक की पूरी जानकारी दी जा रही है। इतना ही नहीं, केंद्र के कर्मी मरीजों को संबंधित विभाग तक साथ ले जाकर उनकी मदद भी कर रहे हैं, जिससे अस्पताल की प्रक्रिया समझना और उसका लाभ उठाना आसान हो गया है।

व्यवस्था को लेकर अक्सर उठते रहे हैं सवाल

बिहार में स्वास्थ्य सेवाओं को लेकर समय-समय पर सवाल खड़े होते रहे हैं। अस्पताल पहुंचने वाले मरीजों और उनके परिजनों को कई बार यह समझ नहीं आता कि किस विभाग में जाना है, जांच कहां कराई जाएगी या इलाज से जुड़ी जानकारी किससे ली जाए। ऐसी ही दिक्कतों को दूर करने के मकसद से मंझौल अनुमंडल अस्पताल में यह पहल की गई है। बिहार में पहली बार यहां 'तत्त्व केंद्रम' कार्यक्रम का ट्रायल किया जा रहा है, जिसके तहत मरीजों को हर कदम पर सहायता दी जा रही है।

मरीजों को मिल रही कदम-कदम पर मदद

मंझौल अनुमंडल अस्पताल में चल रहे 'तत्त्व केंद्रम' की उपयोगिता मरीजों के अनुभवों से साफ झलकती है। केंद्र में तैनात कर्मी जरूरी सुविधा दिलाने के लिए मरीजों के साथ संबंधित विभाग तक जा रहे हैं।

अस्पताल पहुंचीं कलावती देवी ने बताया कि उन्हें अल्ट्रासाउंड से जुड़ी जानकारी चाहिए थी। इस दौरान केंद्र के कर्मियों ने उनकी मदद की और जरूरी जानकारी मुहैया कराई। हालांकि अस्पताल में अल्ट्रासाउंड की सुविधा उपलब्ध न होने के कारण उन्हें वापस लौटना पड़ा।

वहीं अनीता देवी ने बताया कि वह अपने बच्चे के इलाज और दवा से जुड़ी जानकारी लेने अस्पताल आई थीं। यहां मौजूद कर्मियों से उन्हें भी जरूरी जानकारी और सहयोग मिला। मरीजों का कहना है कि सही जगह और सही प्रक्रिया की जानकारी मिल जाने से उनका समय और परेशानी दोनों कम हो रहे हैं।

क्या है 'तत्त्व केंद्रम' कार्यक्रम

मंझौल अनुमंडल अस्पताल के स्वास्थ्य प्रबंधक गौरी शंकर ने बताया कि इस कार्यक्रम का नाम 'तत्त्व केंद्रम' है, जिसे एक निजी कंपनी की ओर से मुफ्त सेवा के रूप में चलाया जा रहा है। इसका उद्देश्य अस्पताल आने वाले मरीजों को जरूरी जानकारी और सहयोग उपलब्ध कराना है।

उन्होंने बताया कि यह व्यवस्था 'मे आई हेल्प यू' केंद्र की तरह काम करती है। अगर किसी मरीज को ओपीडी, जांच, दवा वितरण केंद्र या अस्पताल की दूसरी सेवाओं के बारे में जानकारी चाहिए, तो यहां तैनात कर्मी उसकी मदद करते हैं। केवल जानकारी देने तक सीमित रहने के बजाय कर्मी मरीज के साथ संबंधित विभाग तक भी जाते हैं और प्रक्रिया पूरी कराने में सहयोग करते हैं।

मरीजों के लिए आसान हुई अस्पताल की प्रक्रिया

स्वास्थ्य प्रबंधक के अनुसार, यह व्यवस्था मरीजों को अस्पताल की जटिल प्रक्रियाओं को समझने में काफी मदद कर रही है। उनका कहना है कि यह मॉडल सदर अस्पताल में संचालित जीविका दीदी हेल्प डेस्क की तुलना में अधिक प्रभावी साबित हो सकता है, क्योंकि इसमें सिर्फ जानकारी देने के बजाय कर्मी खुद मरीजों के साथ जाकर सहायता दिलाते हैं।

अस्पताल प्रशासन को उम्मीद है कि इस पहल से मरीजों को बेहतर अनुभव मिलेगा और आगे चलकर ऐसी व्यवस्था अन्य सरकारी अस्पतालों में भी लागू की जा सकती है। फिलहाल मंझौल अनुमंडल अस्पताल में इसका ट्रायल चल रहा है और मरीजों से सकारात्मक प्रतिक्रिया मिल रही है।

चेतन शुक्ला (Chetan Shukla) Print & Broadcast News Agency (PABNA) में 'मुख्य संपादक' हैं। वह पत्रकारिता में 15 वर्ष से ज्यादा का अनुभव रखते हैं। ये मूल रूप से उत्तर प्रदेश के रहने वाले हैं। इन्हें राजनीति और आम आदमी से जुड़ी खबरें लिखना पसंद है।

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