बेगूसराय के रजी अहमद ने बदली तस्वीर: बंगाल से बिस्कुट मंगाने वाले अब खुद बने निर्माता, हर महीने 5 लाख का कारोबार बिहार एक महीने पहले 43
बेगूसराय के राजौरा निवासी रजी अहमद ने सप्लाई की दिक्कत से तंग आकर अपनी बिस्कुट फैक्ट्री खड़ी की, जो आज हर महीने 5 लाख रुपये से ज्यादा का कारोबार कर रही है और 10 से अधिक लोगों को रोजगार दे रही है।

आज के दौर में अपना कारोबार खड़ा करने का सपना तो बहुत लोग देखते हैं, लेकिन हिम्मत और लगन के बल पर उसे हकीकत में बदलने वाले गिने-चुने ही होते हैं। बिहार के उद्योग नगरी बेगूसराय के राजौरा निवासी रजी अहमद की कहानी ऐसी ही प्रेरणा देती है। कभी अपनी छोटी सी दुकान के लिए बंगाल से बिस्कुट मंगाकर बेचने वाले रजी अहमद आज खुद बिस्कुट निर्माता बन चुके हैं। सप्लाई की परेशानी से तंग आकर शुरू किया गया उनका यह प्रयोग अब एक कामयाब फैक्ट्री का रूप ले चुका है, जो हर महीने 5 लाख रुपये से ज्यादा का कारोबार करती है और 10 से अधिक लोगों को रोजगार देती है।

सप्लाई की दिक्कत बनी खुद का प्रोडक्ट बनाने की प्रेरणा

फैक्ट्री के मालिक रजी अहमद बताते हैं कि पहले वे बिस्कुट स्टॉकिस्ट के तौर पर दुकान चलाते थे और बिक्री के लिए बंगाल से बिस्कुट मंगवाया करते थे। कई बार माल समय पर नहीं पहुंच पाता था, जिसका सीधा असर उनके व्यापार पर पड़ता था। यही दिक्कत उनके लिए खुद का उत्पाद तैयार करने की प्रेरणा बन गई।

इसके बाद उन्होंने उद्योग विभाग से संपर्क किया, जहां से उन्हें 10 लाख रुपये तक की आर्थिक सहायता लोन के रूप में मिली। इसी मदद के सहारे उन्होंने “अहमद बेकरी” नाम से अपनी बिस्कुट फैक्ट्री की शुरुआत कर दी।

तरह-तरह के उत्पाद, कई जिलों तक सप्लाई

रजी अहमद के मुताबिक, उनकी फैक्ट्री में मंगरेला बिस्कुट, बादाम बिस्कुट, लंबू बिस्कुट और पाव रोटी समेत कई तरह के बिस्कुट और ब्रेड बनाए जाते हैं। यहां तैयार होने वाले उत्पाद बेगूसराय के साथ-साथ खगड़िया, मुंगेर समेत आसपास के जिलों और गांवों तक पहुंचाए जाते हैं। फैक्ट्री और फील्ड दोनों मिलाकर कई लोग इन उत्पादों को बाजार तक पहुंचाने की जिम्मेदारी संभालते हैं।

गांव में ही मिला रोजगार, मजदूर संतुष्ट

फैक्ट्री में काम कर रहे मोहम्मद कुतुबुद्दीन बताते हैं कि यहां 10 से 12 लोग कार्यरत हैं और उन्हें 20 हजार रुपये तक मासिक वेतन मिलता है। गांव में ही रोजगार मिल जाने से वे और उनके साथी खुद को भाग्यशाली मानते हैं, क्योंकि अब उन्हें काम की तलाश में दूसरे राज्यों में भटकना नहीं पड़ता।

फैक्ट्री में बिस्कुट मिस्त्री के रूप में काम करने वाले मो. मुमताज कहते हैं कि उन्हें अपने गांव में ही बेहतर रोजगार मिल रहा है। वे बिस्कुट बनाने का काम करते हैं और यहां होने वाली आय के चलते उन्हें बाहर प्रदेश जाने की जरूरत महसूस नहीं होती।

एक साल में खड़ी हुई कामयाबी की मिसाल

रजी अहमद बताते हैं कि फैक्ट्री की शुरुआत हुए करीब 1 साल हो चुका है और इस समय हर महीने 5 लाख रुपये से अधिक का टर्नओवर हो रहा है। इस दौरान 10 से ज्यादा लोगों को रोजगार दिया जा चुका है। यहां काम करने वाले मजदूरों को 15 हजार से 25 हजार रुपये तक वेतन मिलता है।

उनके अनुसार यह फैक्ट्री PMFME योजना के तहत स्थापित की गई है और वे इस योजना तथा उद्योग विभाग के सहयोग के लिए सरकार के आभारी हैं। रजी बताते हैं कि PMFME योजना टीम बेगूसराय के मनीष कुमार ने शुरुआत से ही उनका मार्गदर्शन और सहयोग किया, जिसकी वजह से उनका सपना साकार हो सका। आज उनकी फैक्ट्री से बिक्री पर कम से कम 20 फीसदी मुनाफा हो रहा है और यह यूनिट गांव के कई परिवारों के लिए रोजी-रोटी का अहम जरिया बन चुकी है।

अंजलि सिंह पाबना की राज्य संवाददाता हैं, जो विभिन्न राज्यों की क्षेत्रीय खबरें और खानपान कवर करती हैं। स्थानीय घटनाओं, संस्कृति और जायके की कहानियों को वे करीब से रिपोर्ट करती हैं। अलग-अलग राज्यों की विविधता उनकी रिपोर्टिंग में नजर आती है।

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