धर्म
4 घंटे पहले
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विचारों
वास्तु और आईने का गहरा संबंध
घर की साज-सज्जा में शीशे का उपयोग बड़े पैमाने पर किया जाता है। यह न सिर्फ चेहरे को देखने के काम आता है, बल्कि कमरे की खूबसूरती को भी दोगुना कर देता है। हालांकि, वास्तु शास्त्र में आईने को लेकर काफी कड़े नियम बताए गए हैं। यदि बिना सोचे-समझे घर में कहीं भी शीशा लगा दिया जाए, तो यह घर की शांति और सकारात्मक ऊर्जा को नकारात्मक रूप से प्रभावित कर सकता है।
आईना लगाने की सही दिशा
फरीदाबाद के महंत कामेश्वरानंद वेदांताचार्य के अनुसार, घर में दर्पण को हमेशा सही दिशा में ही स्थापित करना चाहिए। वास्तु के नजरिए से उत्तर और पूर्व दिशा को आईना लगाने के लिए सबसे उपयुक्त माना गया है। इन दिशाओं में लगा हुआ दर्पण शुभ परिणाम देता है और व्यक्ति के भाग्य में वृद्धि के साथ-साथ जीवन में तरक्की के रास्ते भी खोलता है।
बेडरूम में आईना लगाने से बचें
सोते समय बेडरूम में आईना होने के गंभीर वास्तु दोष हो सकते हैं। विशेष रूप से यदि आपके बिस्तर के सामने शीशा लगा है जिसमें सोते समय आपका प्रतिबिंब दिखाई देता है, तो इसे तुरंत हटा देना चाहिए। यदि बेडरूम से आईना हटाना संभव न हो, तो रात के समय उस पर पर्दा डालकर रखना ही एकमात्र विकल्प है। जब आपको शीशे की आवश्यकता हो, तभी पर्दा हटाएं और उपयोग के बाद इसे वापस ढक दें। इसके अतिरिक्त, रसोईघर में भी शीशा नहीं लगाना चाहिए। साथ ही, घर के मुख्य द्वार के ठीक सामने या दक्षिण दिशा में आईना लगाने से हमेशा परहेज करना चाहिए, क्योंकि यह वास्तु के हिसाब से नकारात्मक प्रभाव डालता है।
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