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एक घंटा पहले
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देश के कई हिस्सों को जल्द ही गर्मी से राहत मिलने वाली है, क्योंकि मानसून गुरुवार को आधिकारिक तौर पर केरल पहुंच गया है। भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के पूर्वानुमान के अनुसार इस बार मानसून तय समय से कुछ दिन पीछे चल रहा है और इसके सामान्य आगमन की तिथि की तुलना में लगभग तीन दिन की देरी दर्ज की गई है। विभाग ने केरल के अलाप्पुझा, कोट्टायम और एर्नाकुलम जिलों के लिए ऑरेंज अलर्ट जारी किया है। साथ ही चेतावनी दी गई है कि राज्य के कुछ हिस्सों में गरज के साथ तेज बारिश हो सकती है और 40 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से हवाएं चलने की आशंका है।
अब उत्तर की ओर बढ़ेगा मानसून
केरल में पहुंचने के बाद मानसून सामान्यतः चरणबद्ध तरीके से उत्तर की दिशा में आगे बढ़ता है और जुलाई के मध्य तक देश के ज्यादातर हिस्सों तक फैल जाता है। इससे पहले मौसम विभाग ने बताया था कि अरब सागर, बंगाल की खाड़ी, लक्षद्वीप, केरल, तमिलनाडु और इनके आसपास के क्षेत्रों में मानसून के आगे बढ़ने के लिए परिस्थितियां अनुकूल बन रही हैं। विभाग का अनुमान है कि अगले दो से चार दिनों में उत्तर प्रदेश और दिल्ली समेत देश के अन्य भागों में बारिश होगी, जिससे लोगों को भीषण गर्मी से राहत मिलने के आसार हैं।
आने वाले दिनों में कहां होगी भारी बारिश
मौसम विभाग ने आगामी कई दिनों के दौरान केरल में कुछ स्थानों पर भारी से बहुत भारी बारिश का पूर्वानुमान जताया है, जबकि तमिलनाडु और कर्नाटक के कुछ इलाकों में भी तेज बारिश की संभावना है। इसके अलावा उत्तर-पश्चिम, मध्य, पूर्वी और दक्षिणी भारत के कई क्षेत्रों में तेज हवाओं के साथ गरज-चमक वाले तूफान आने की आशंका जताई गई है।
आखिर क्यों लेट हुआ मानसून
मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार मानसून की इस देरी के पीछे पश्चिमी प्रशांत महासागर में विकसित हो रहा एक तूफान प्रमुख वजह रहा, जिसने अरब सागर और बंगाल की खाड़ी की नमी को अपनी ओर खींच लिया। इसके साथ ही लक्षद्वीप क्षेत्र के नजदीक बने एक चक्रवाती परिसंचरण ने भी इसमें भूमिका निभाई। माना जा रहा है कि इन्हीं कारणों से मानसून की रफ्तार धीमी पड़ी और केरल में इसका शुरुआती आगमन कमजोर रहा।
अल नीनो डालेगा कितना असर
भारत में अल नीनो को आमतौर पर कमजोर मानसून और तेज गर्मी से जोड़कर देखा जाता है। अपडेट के मुताबिक इस समय बन रहा अल नीनो मध्यम स्तर का रहेगा और यह मजबूत भी हो सकता है। यह स्थिति भारत के लिए चिंता का कारण है, जो पहले से ही कमजोर मानसून से जूझ रहा है। एजेंसी के अनुसार अल नीनो की स्थिति कम से कम नवंबर तक बने रहने की संभावना लगभग 90% या उससे अधिक है।
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