78 साल की आजादी के बाद भी बदहाल है बड़वानी का सागमाल गांव, ग्रामीण खुद सड़क बनाने को मजबूर मध्य प्रदेश 2 महीने पहले 80
मध्य प्रदेश के बड़वानी जिले का सागमाल गांव विकास की बाट जोह रहा है, जहां करीब 500 मतदाता सालों से 7 किलोमीटर लंबी सड़क की मांग कर रहे हैं। जनप्रतिनिधियों के खोखले वादों से परेशान होकर अब ग्रामीण खुद फावड़ा और कुदाल उठाकर सड़क सुधारने में जुटे हैं।

चुनाव में वादे, धरातल पर सन्नाटा

आजादी के 78 साल बीत जाने के बाद भी बड़वानी जिले का सागमाल गांव बुनियादी सुविधाओं के लिए तरस रहा है। करीब 500 मतदाताओं की आबादी वाले इस गांव के लोगों ने जब जनप्रतिनिधियों के दावों को खोखला पाया, तो उन्होंने हार मानकर खुद सड़क बनाने का फैसला किया। गांव की तस्वीरें बेहद भावुक करने वाली हैं, जहां बच्चे, महिलाएं और बुजुर्ग अपनी जान जोखिम में डालकर गड्ढे भरने और रास्ता समतल करने में जुटे हैं।

विकास से कोसों दूर पाटी ब्लॉक

यह गांव बड़वानी जिला मुख्यालय से लगभग 55 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। पाटी ब्लॉक, जिसे देश के 10 सबसे पिछड़े ब्लॉक में गिना जाता है, वहां स्थित सागमाल गांव की स्थिति बदतर है। ग्रामीणों को गांव से बाहर निकलने के लिए 7 किलोमीटर लंबे जर्जर मार्ग से गुजरना पड़ता है। बारिश के मौसम में यह रास्ता दलदल में बदल जाता है, जिससे मरीजों को अस्पताल ले जाना और बच्चों का स्कूल तक पहुंचना नामुमकिन हो जाता है।

पर्यटन की राह में रोड़ा

इस सड़क का महत्व केवल ग्रामीणों के आवागमन तक सीमित नहीं है। यह मार्ग महाराष्ट्र सीमा पर स्थित प्रसिद्ध तोरणमाल तीर्थ क्षेत्र को जोड़ता है, जहां भगवान भोलेनाथ और गोरखनाथ बाबा का मंदिर है। शिवरात्रि जैसे बड़े त्योहारों पर यहाँ हजारों श्रद्धालु आते हैं, जिन्हें खराब रास्तों के कारण भारी परेशानी होती है। ग्रामीणों का मानना है कि यदि यह 7 किलोमीटर सड़क बन जाए, तो क्षेत्र में पर्यटन और रोजगार के नए अवसर खुल सकते हैं।

विधायक और प्रशासन का पक्ष

इस मामले पर कांग्रेस विधायक राजन मंडलोई ने सफाई देते हुए कहा कि उन्होंने विधानसभा सत्र में इस मुद्दे को कई बार उठाया है और आगे भी आवाज उठाते रहेंगे। उन्होंने प्रधानमंत्री सड़क योजना के अधिकारियों से चर्चा का हवाला देते हुए बजट आने पर काम शुरू होने का आश्वासन दिया है। वहीं, बड़वानी की कलेक्टर जयति सिंह ने कहा कि वे इस सड़क के निर्माण की प्रक्रिया को आगे बढ़ाने के लिए पीएमजीएसवाई अधिकारियों से चर्चा करेंगी और ग्राम पंचायत की भागीदारी सुनिश्चित की जाएगी।

असंवेदनशील सिस्टम की मिसाल

सागमाल ही नहीं, पाटी ब्लॉक के उबादगढ़ और देवगढ़ जैसे अन्य गांवों में भी लोग खुद रास्ता दुरुस्त करने को मजबूर हुए हैं। एक तरफ सरकार वनबंधु योजना और प्रधानमंत्री आकांक्षी जिले जैसे अभियानों के दावे करती है, वहीं दूसरी ओर धरातल पर मूलभूत ढांचे की स्थिति सरकार के दावों की पोल खोल रही है।

अंजलि सिंह पाबना की राज्य संवाददाता हैं, जो विभिन्न राज्यों की क्षेत्रीय खबरें और खानपान कवर करती हैं। स्थानीय घटनाओं, संस्कृति और जायके की कहानियों को वे करीब से रिपोर्ट करती हैं। अलग-अलग राज्यों की विविधता उनकी रिपोर्टिंग में नजर आती है।

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