छत्तीसगढ़
19 घंटे पहले
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बालोद में चटोरों की पहली पसंद
छत्तीसगढ़ के बालोद जिले के झलमला बाजार चौक पर स्थित 'गंगा मईया भेल कॉर्नर' इन दिनों स्थानीय लोगों और खाने के शौकीनों के बीच चर्चा का विषय बना हुआ है। यह छोटा सा ठेला अपनी खास गुणवत्ता और लाजवाब स्वाद के लिए पूरे इलाके में पहचान बना चुका है। यहाँ शाम होते ही गरमागरम नाश्ता खाने वालों की लंबी कतारें देखी जा सकती हैं। ठेले का संचालन लेशकुमार साहू द्वारा किया जा रहा है, जिन्होंने अपनी मेहनत से इस छोटे से व्यवसाय को एक कामयाब मॉडल के रूप में स्थापित कर दिया है।
7000 रुपये से शुरू हुआ सफर
लेशकुमार साहू ने इस व्यापार की शुरुआत के बारे में विस्तार से जानकारी साझा की। उन्होंने बताया कि करीब 25 साल पहले उन्होंने भेल और गुपचुप की बिक्री से अपना काम शुरू किया था। ग्राहकों की बदलती पसंद और बढ़ती मांग को ध्यान में रखते हुए उन्होंने समय के साथ मेन्यू में विस्तार किया। करीब 7 महीने पहले ही उन्होंने गरमागरम नाश्ता बनाना और बेचना शुरू किया। इस नए काम को शुरू करने के लिए उन्होंने मात्र 7000 रुपये की पूंजी निवेश की थी। आज उनकी मेहनत का फल यह है कि वह इस कारोबार से रोजाना 2500 रुपये से अधिक की कमाई कर रहे हैं।
मेनू की खास बातें
इस ठेले पर मिलने वाले पकवानों की एक लंबी फेहरिस्त है, लेकिन ग्राहकों की पहली पसंद मिर्ची भजिया और मुंगेड़ी है। इसके अलावा यहाँ आलू गुंडा, गुपचुप और भेल भी परोसी जाती है। दुकान की सबसे खास बात इसकी किफायती कीमत है। यहाँ महज 20 रुपये में ग्राहकों को 6 पीस गरमागरम मिर्ची भजिया दी जाती है, वहीं मुंगेड़ी की एक कटोरी की कीमत भी 20 रुपये ही रखी गई है। दुकान का संचालन दोपहर 1 बजे से शाम 7 बजे तक किया जाता है। सबसे अधिक भीड़ शाम 4 से 6 बजे के बीच देखने को मिलती है।
स्वाद का रहस्य और मेहनत
मिर्ची भजिया के स्वाद के बारे में लेशकुमार की पत्नी ने बताया कि इसके लिए विशेष तैयारी की जाती है। वे ऐसी मिर्च का चयन करते हैं जो बहुत ज्यादा तीखी नहीं होती। मिर्च को बीच से काटकर उसमें अमचूर पाउडर भरा जाता है, जिससे उसका स्वाद चटपटा हो जाता है। इसके बाद बेसन का एक खास घोल तैयार कर उसमें मिर्च को अच्छी तरह लपेटा जाता है और फिर उसे गर्म तेल में लगभग 10 मिनट तक तला जाता है। इस प्रक्रिया से भजिया कुरकुरी और स्वादिष्ट तैयार होती है।
पति-पत्नी का साथ
इस छोटे से उद्यम में पति-पत्नी दोनों की भूमिका महत्वपूर्ण है। लेशकुमार खुद भेल और गुपचुप बनाने की जिम्मेदारी संभालते हैं, जबकि उनकी पत्नी नाश्ता तैयार करने और भजिया तलने का काम करती हैं। दोनों के तालमेल और परिश्रम ने इस ठेले को आज बालोद का एक प्रसिद्ध फूड पॉइंट बना दिया है। मात्र 7000 रुपये से शुरू हुई यह यात्रा आज उन लोगों के लिए प्रेरणा है जो सीमित संसाधनों के साथ अपना खुद का काम शुरू करना चाहते हैं।
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