छत्तीसगढ़
2 घंटे पहले
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विचारों
मेड़ों की अनदेखी पड़ सकती है भारी
धान की रोपाई का काम लगभग अंतिम चरण में है और कई क्षेत्रों में किसान अब अपनी फसल की देखभाल में जुट गए हैं। इस दौरान अक्सर किसान खेत के मुख्य हिस्से पर तो पूरा ध्यान देते हैं, लेकिन खेत की मेड़ों की तरफ उनका ध्यान कम ही जाता है। कृषि विशेषज्ञों का स्पष्ट मानना है कि यदि धान की रोपाई के बाद मेड़ों की साफ-सफाई पर ध्यान न दिया जाए, तो यह लापरवाही पूरी मेहनत पर पानी फेर सकती है। मेड़ों पर उगी अनावश्यक घास और खरपतवार कीटों और चूहों के लिए एक सुरक्षित ठिकाना बन जाते हैं, जो आगे चलकर फसल को गंभीर नुकसान पहुंचाते हैं।
कीटों के लिए सुरक्षित अड्डा
प्रगतिशील किसान चंद्रभूषण पांडेय ने इस विषय पर महत्वपूर्ण जानकारी दी है। उनके अनुसार, मेड़ों पर उगने वाली घास तना छेदक, गंधी बग, दीमक और रस चूसने वाले कीटों के पनपने का मुख्य केंद्र होती है। जैसे-जैसे धान के पौधे बड़े होते हैं, ये कीट मेड़ों से निकलकर सीधे फसल पर धावा बोल देते हैं। उन्होंने बताया कि यदि रोपाई से पहले और फसल की अवधि के दौरान समय-समय पर मेड़ों की छटाई की जाए, तो कीटों के प्रकोप को काफी हद तक नियंत्रित किया जा सकता है। ऐसा करने से न केवल फसल स्वस्थ रहती है, बल्कि कीटनाशकों पर होने वाला अनावश्यक खर्च भी कम हो जाता है।
फफूंद और खतरनाक कीटों पर नियंत्रण
विशेषज्ञों के अनुसार, मेड़ों पर मौजूद झाड़ियां और घास फफूंद जनित बीमारियों के लिए भी अनुकूल वातावरण तैयार करती हैं। मेड़ों की सफाई का सबसे बड़ा फायदा यह होता है कि कीटों के अंडे और लार्वा नष्ट हो जाते हैं। इससे तना छेदक, पत्ती लपेटक और गंधी बग जैसे खतरनाक कीटों के हमले से धान की फसल सुरक्षित रहती है। यदि इन मेड़ों को नजरअंदाज किया गया, तो ये कीट फसल के उत्पादन में भारी गिरावट ला सकते हैं।
चूहों के आतंक से सुरक्षा
मेड़ों की सफाई का एक अन्य बड़ा लाभ चूहों के नियंत्रण में मिलता है। जब मेड़ें घास और झाड़ियों से भरी होती हैं, तो चूहे वहां आसानी से बिल बना लेते हैं। ये चूहे विशेषकर रात के समय धान के पौधों को कुतरकर नष्ट कर देते हैं, जिससे किसानों को भारी नुकसान उठाना पड़ता है। यदि मेड़ें साफ और सुव्यवस्थित हों, तो चूहों को छिपने के लिए जगह नहीं मिलती। इसके अलावा, मजबूत मेड़ें सिंचाई के पानी को भी खेत में थामे रखती हैं और पानी के रिसाव को रोकने में सहायक होती हैं।
फसल को मिलता है भरपूर पोषण
मेड़ों पर उगी गहरी जड़ों वाली घास मिट्टी की नमी और धान के लिए आवश्यक पोषक तत्वों को भी सोख लेती है। इस वजह से मुख्य फसल को पर्याप्त पोषण नहीं मिल पाता और विकास रुक जाता है। कृषि जानकारों का सुझाव है कि रोपाई से पहले और फसल के दौरान कम से कम दो से तीन बार मेड़ों की सफाई और मरम्मत जरूर की जानी चाहिए।
सफाई के लिए अपनाएं ये तरीके
- मेड़ों की घास को जड़ से हटाने के लिए खुरपी, फावड़ा या ग्रास कटर का इस्तेमाल करें।
- यदि खरपतवार की समस्या बहुत ज्यादा हो, तो कृषि विशेषज्ञ की सलाह के अनुसार ही सही खरपतवार नाशक का उपयोग करें।
- सफाई करने के बाद मेड़ों पर नई मिट्टी चढ़ाकर उन्हें समतल और मजबूत बनाएं।
कुल मिलाकर, मेड़ों का प्रबंधन करना धान की खेती का एक अभिन्न हिस्सा है। जो किसान नियमित रूप से मेड़ों को साफ रखते हैं, उन्हें फसल की बेहतर गुणवत्ता और अधिक पैदावार प्राप्त होती है।
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