उत्तर प्रदेश
एक महीने पहले
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विचारों
बलिया की बदहाल सड़क और जनता का दर्द
उत्तर प्रदेश का बागी बलिया जिला लंबे समय से विकास की बाट जोह रहा है। पांच साल पहले आजादी का तगमा पाने वाला यह क्षेत्र आज भी बुनियादी सुविधाओं के अभाव में जूझ रहा है। बलिया शहर के महत्वपूर्ण मिड्ढी मार्ग की स्थिति तो इतनी दयनीय हो गई है कि यहाँ से गुजरना किसी चुनौती से कम नहीं है। यह सड़क बलिया शहर, राष्ट्रीय राजमार्ग और रेलवे स्टेशन जैसे प्रमुख स्थानों को आपस में जोड़ती है, लेकिन इसके बावजूद इसकी दुर्दशा पर किसी का ध्यान नहीं जा रहा है। सड़कों पर बने बड़े-बड़े गड्ढे न केवल वाहनों को नुकसान पहुँचा रहे हैं, बल्कि राहगीरों के लिए हर पल खतरा बने हुए हैं।
भ्रष्टाचार के आरोपों से घिरी निर्माण प्रक्रिया
स्थानीय नागरिकों का सीधा आरोप है कि सड़क निर्माण और मरम्मत के नाम पर बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार हो रहा है। लोगों का मानना है कि सड़क को जानबूझकर इतनी घटिया गुणवत्ता के साथ बनाया जाता है कि वह कुछ ही महीनों में टूटकर फिर से गड्ढों में बदल जाए। इस प्रक्रिया का मुख्य उद्देश्य दोबारा निर्माण के नाम पर सरकारी खजाने का दुरुपयोग करना है। ठेकेदारों की इस लापरवाही के कारण आम जनता रोजाना दुर्घटनाओं का शिकार हो रही है, जिससे सरकार के गड्ढा मुक्त अभियान के दावों पर भी बड़े सवाल खड़े हो रहे हैं।
सीवर की खुदाई और जलभराव का संकट
क्षेत्रीय निवासियों के अनुसार, मिड्ढी मार्ग पिछले दो वर्षों से सीवर लाइन बिछाने के नाम पर चल रही खुदाई के कारण बुरी तरह क्षतिग्रस्त है। स्थानीय निवासी अजीत यादव का कहना है कि घर से बाहर निकलना एक मुसीबत बन गया है। नलिन ओझा ने बताया कि सड़क का निर्माण कुछ महीने पहले ही हुआ था, लेकिन वर्तमान स्थिति देखकर लगता ही नहीं कि यहाँ हाल ही में कोई काम हुआ है। बारिश होते ही सड़क एक बड़े तालाब का रूप ले लेती है, जिससे मोटरसाइकिल और ई-रिक्शा चालकों के लिए संतुलन बनाना मुश्किल हो जाता है और वे अक्सर दुर्घटनाग्रस्त हो जाते हैं।
निर्माण कार्यों की अंतहीन प्रक्रिया
स्थानीय निवासी रजत सिंह का कहना है कि जब भी वे इस रास्ते से गुजरते हैं, उन्हें सड़क पर निर्माण कार्य या खुदाई होती हुई ही मिलती है। सड़क की बदहाली पर नाराजगी जताते हुए शिवांश पांडेय ने कहा कि गड्ढों की संख्या इतनी अधिक है कि उन्हें गिनना भी संभव नहीं है। बारिश के मौसम में सड़क का नजारा ऐसा हो जाता है कि मानो सड़कों पर नाव चलानी पड़े। आशुतोष कुमार सिंह ने सवाल उठाया कि आखिरकार 2 किलोमीटर लंबी इस सड़क और नाले का निर्माण कार्य पूरा करने में प्रशासन को इतना समय क्यों लग रहा है। ऐसा प्रतीत होता है कि सड़क के नीचे किसी खजाने की तलाश में लगातार खुदाई की जा रही हो।
स्थानीय प्रशासन से समाधान की मांग
केवल मिड्ढी मार्ग ही नहीं, बल्कि छाता निवासी पुरुषोत्तम साहनी के अनुसार सहतवार-बांसडीह मार्ग की स्थिति भी अत्यंत खराब है और वह भी भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ चुका है। इन रास्तों पर हर समय खुदाई का काम चलना लोगों के लिए जी का जंजाल बन गया है। स्थानीय जनता ने प्रशासन से अब केवल आश्वासन नहीं, बल्कि तत्काल प्रभाव से सड़क का उच्च स्तरीय निर्माण और इसका स्थायी समाधान निकालने की पुरजोर मांग की है। लोगों का कहना है कि यदि समय रहते प्रशासनिक अधिकारियों ने इस ओर ध्यान नहीं दिया, तो आने वाले दिनों में किसी बड़ी दुर्घटना से इंकार नहीं किया जा सकता।
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