बालेश्वर में खौफनाक वारदात: शौचालय जाते मासूम छात्र पर आवारा कुत्ते ने किया हमला, उंगली काटी भारत एक घंटा पहले 3
ओडिशा के बालेश्वर जिले के एक सरकारी स्कूल में आवारा कुत्ते ने शौचालय जा रहे छात्र पर अचानक हमला कर दिया। हमले में छात्र की एक उंगली कट गई और वह गंभीर रूप से घायल हो गया, जिसके बाद ग्रामीणों ने स्कूल के गेट पर ताला जड़कर अपना विरोध दर्ज कराया।

स्कूल परिसर में छात्र पर खौफनाक हमला

ओडिशा के बालेश्वर जिले से एक दिल दहला देने वाली घटना सामने आई है, जहां स्कूल में पढ़ाई कर रहे एक छात्र को अपनी जान जोखिम में डालनी पड़ी। मामला खंटपड़ा थाना क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले रसालपुर के सत्यनारायण सरकारी नोडल हाई स्कूल का है। यहाँ एक मासूम छात्र जब स्कूल के शौचालय की ओर जा रहा था, तभी एक आवारा कुत्ते ने अचानक उस पर जानलेवा हमला कर दिया। इस हमले की क्रूरता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि कुत्ते ने न केवल छात्र की एक उंगली काट ली, बल्कि उसके शरीर के अन्य हिस्सों जैसे हाथ और पैरों को भी बुरी तरह नोंच डाला। घायल छात्र की नाजुक स्थिति को देखते हुए उसे फौरन उपचार के लिए कटक स्थित एससीबी मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल में भर्ती कराया गया है।

स्कूल की सुरक्षा व्यवस्था पर उठे गंभीर सवाल

इस घटना के बाद से ही पूरे इलाके में दहशत का माहौल है। अभिभावकों और स्थानीय लोगों में स्कूल प्रशासन की लापरवाही को लेकर भारी नाराजगी देखी जा रही है। लोगों का मुख्य सवाल यह है कि आखिर स्कूल जैसे संवेदनशील परिसर के भीतर एक खतरनाक आवारा कुत्ता कैसे दाखिल हो गया और वहां मौजूद बच्चों के लिए खतरा बन गया। स्कूल में बच्चों की सुरक्षा को लेकर कोई पुख्ता इंतजाम न होने के कारण ग्रामीणों ने प्रशासन के खिलाफ अपना आक्रोश जाहिर किया है। उनका स्पष्ट रूप से कहना है कि भविष्य में ऐसी किसी भी अप्रिय घटना को रोकने के लिए विद्यालय परिसर में सुरक्षा के कड़े प्रबंध किए जाने बेहद जरूरी हैं।

ग्रामीणों का आक्रोश और स्कूल पर तालाबंदी

घटना के तुरंत बाद स्थिति काफी तनावपूर्ण हो गई। घायल बच्चे के प्रति अपनी संवेदना और स्कूल प्रशासन के खिलाफ गुस्सा जाहिर करने के लिए स्थानीय ग्रामीणों ने स्कूल के मुख्य गेट पर ताला लगा दिया। प्रदर्शन कर रहे लोगों का कहना था कि जब तक प्रशासन स्कूल में आवारा जानवरों के प्रवेश को रोकने की ठोस गारंटी नहीं देता और बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित नहीं की जाती, तब तक वे स्कूल के कामकाज को सुचारू नहीं होने देंगे। ग्रामीणों की मांग है कि परिसर को पूरी तरह से सुरक्षित बनाया जाए ताकि कोई भी बच्चा फिर से इस तरह के हमले का शिकार न हो।

प्रधानशिक्षक ने बयां की पूरी घटना

विद्यालय के प्रधानशिक्षक राजेंद्र पात्रा ने घटना के बारे में जानकारी देते हुए बताया कि वे दोपहर लगभग 12 बजकर 45 मिनट पर 10वीं कक्षा में पढ़ा रहे थे। तभी उन्हें तीसरी कक्षा की एक शिक्षिका का फोन आया और उन्होंने तत्काल आने का आग्रह किया। उन्हें बताया गया कि एक बच्चे की हालत काफी गंभीर है और उसे तुरंत अस्पताल ले जाने की जरूरत है। वे फौरन एक अन्य शिक्षक के साथ वहां पहुंचे और घायल बच्चे को अस्पताल पहुंचाया। प्राथमिक इलाज के बाद डॉक्टरों ने उसे कटक के एससीबी अस्पताल रेफर करने की सलाह दी। उन्होंने बताया कि सरकारी एम्बुलेंस के जरिए बच्चे को कटक भेजा गया। साथ ही, उन्होंने यह भी कहा कि पीड़ित परिवार की आर्थिक स्थिति को देखते हुए उन्होंने हर संभव सहायता प्रदान की है। हालांकि, अगले दिन सुबह लगभग 9 बजे जब वे विद्यालय पहुंचे, तो उन्हें पता चला कि ग्रामीणों ने विरोध स्वरूप स्कूल के गेट पर ताला लगा दिया है।

वर्तमान स्थिति और सुरक्षा की मांग

फिलहाल, ग्रामीणों से समझाइश और बातचीत के बाद स्कूल का गेट तो खोल दिया गया है, लेकिन बच्चों की सुरक्षा को लेकर अभिभावकों की चिंताएं अभी भी बरकरार हैं। वे स्कूल परिसर के भीतर सुरक्षा के पुख्ता इंतजामों की मांग पर अड़े हुए हैं। उधर, घायल छात्र का इलाज अभी भी कटक के एससीबी अस्पताल में जारी है। यह घटना शिक्षा संस्थानों में जानवरों के प्रवेश और सुरक्षा मानकों की खामियों पर एक बड़ा सवालिया निशान लगाती है।

देवेंद्र पांडेय पाबना के राजनीतिक संवाददाता हैं और राष्ट्रीय राजनीति, सरकार तथा नीतियों पर रिपोर्टिंग करते हैं। चुनाव, संसद और बड़े सियासी घटनाक्रमों का वे गहराई से विश्लेषण करते हैं। उनकी रिपोर्टिंग निष्पक्ष और तथ्यों पर आधारित होती है।

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