बालाघाट का महाघोटाला: कैसे 12वीं पास सोमेंद्र कंकरायने ने अफसरों और रसूखदारों को ठगा, जानें 600 करोड़ रुपये के 'डबल मनी स्कैम' की पूरी कहानी मध्य प्रदेश एक महीने पहले 61
मध्य प्रदेश के बालाघाट में 600 करोड़ रुपये के सबसे बड़े डबल मनी स्कैम का सनसनीखेज खुलासा हुआ है, जिसमें 12वीं पास मास्टरमाइंड सोमेंद्र कंकरायने को पुलिस ने हरिद्वार से धर दबोचा है।

मध्य प्रदेश के बालाघाट जिले में एक दौर ऐसा था, जब हर दूसरे शख्स के सिर पर अपनी रकम को रातों-रात दोगुना करने का भूत सवार था। पैसे को डबल करने का यह ख्वाब इस कदर फैला कि इसकी चपेट में केवल आम लोग ही नहीं, बल्कि समाज के बड़े-बड़े रसूखदार भी आ गए। शुरुआत में कुछ रसूखदारों ने अपनी काली कमाई को दोगुना करने के लालच में इस खेल में कदम रखा, और उन्हें देखकर आम नागरिक भी इस अंतहीन कतार में शामिल हो गए। इस सुनहरे जाल में फंसकर कई लोगों ने शुरुआत में तगड़ा मुनाफा कमाया, लेकिन इस लालच की अंतिम परिणति बेहद दर्दनाक रही। हजारों लोगों ने अपनी जिंदगी भर की खून-पसीने की कमाई, गहने और यहां तक कि अपनी पुश्तैनी जमीनें बेचकर इस डबल मनी स्कीम में झोंक दीं। इसमें किसान, मजदूर, शिक्षक, पुलिसकर्मी और सफेदपोश राजनेता तक सब शामिल थे। शुरुआत में सब कुछ मनमुताबिक चलता रहा, लेकिन आखिरकार इस महाघोटाले का भंडाफोड़ हो ही गया।

पुलिस के अनुमान के मुताबिक, यह पूरा घोटाला करीब 600 करोड़ रुपये का है। इस पूरे मायाजाल को बुनने वाला कोई बड़ा वित्तीय विशेषज्ञ नहीं, बल्कि ग्रामीण पृष्ठभूमि से ताल्लुक रखने वाला और महज 12वीं पास एक युवक सोमेंद्र कंकरायने था। सालों से पुलिस की आंखों में धूल झोंककर फरार चल रहा यह मास्टरमाइंड अब पुलिस की गिरफ्त में है और सलाखों के पीछे अपनी सजा का इंतजार कर रहा है। आइए विस्तार से जानते हैं कि कैसे इस 12वीं पास आधुनिक नटवरलाल ने इतने बड़े साम्राज्य का निर्माण किया और किस तरह कानून के लंबे हाथों ने इसे धर दबोचा।

कॉलेज ड्रॉपआउट से अनाज कारोबारी बनने का सफर

इस सनसनीखेज कहानी की शुरुआत आज से करीब 12 साल पहले होती है। सोमेंद्र कंकरायने ने अपनी 12वीं की पढ़ाई पूरी करने के बाद एक स्थानीय कॉलेज में B.Com में दाखिला लिया था। कॉलेज की पढ़ाई के साथ-साथ उसने अपनी बातचीत की शैली को सुधारने के लिए एक अंग्रेजी बोलने का कोर्स भी किया। इसी दौरान उसके मन में जल्द से जल्द अमीर बनने और पैसे कमाने का चस्का लग गया। उसे समझ आ गया था कि नौकरी के बजाय बिजनेस के जरिए ही वह अपने सपनों को सच कर सकता है। इसी सोच के साथ उसने बीच में ही कॉलेज की पढ़ाई छोड़ दी और वापस अपने गांव लौट आया।

गांव आकर सोमेंद्र ने अनाज का व्यापार शुरू किया। वह स्थानीय किसानों से धान, गेहूं, चना और अन्य फसलें खरीदता था और उन्हें स्टॉक करके रख लेता था। जब बाजार में इन अनाजों के दाम बढ़ जाते, तो वह उन्हें ऊंचे मुनाफे पर बाजार में बेच देता था। इस काम में उसे अच्छा मुनाफा होने लगा, जिससे उसका हौसला और बढ़ गया। अनाज के इस कारोबार के बाद सोमेंद्र ने रियल एस्टेट सेक्टर में अपना हाथ आजमाने का फैसला किया। रियल एस्टेट में कदम रखते ही उसने सबसे पहले करीब 30 लाख रुपये में एक जमीन खरीदी और महज कुछ ही समय में उसे 35 लाख रुपये में बेच दिया। इस सौदे से उसे सीधे 5 लाख रुपये का शुद्ध मुनाफा हुआ। इस घटना ने सोमेंद्र को यकीन दिला दिया कि रियल एस्टेट और जमीनों के कारोबार से बहुत ही कम समय में अकूत संपत्ति बनाई जा सकती है।

रियल एस्टेट से डबल मनी स्कीम का जन्म

अनाज का कारोबार पूरी तरह बंद कर सोमेंद्र अब पूरी तरह से रियल एस्टेट के धंधे में उतर चुका था। जमीनों की खरीद-फरोख्त में उसे लगातार सफलता मिल रही थी। इसी बीच, उसका संपर्क हैदराबाद की एक कंपनी माय होम से हुआ। सोमेंद्र ने इस कंपनी में निवेश करना शुरू कर दिया। इस कंपनी से मिलने वाले शानदार रिटर्न को देखकर उसका लालच बढ़ गया। उसने एक बड़ा जोखिम लेने का फैसला किया और अपनी पुश्तैनी 11 एकड़ जमीन बेच डाली। जमीन बेचने से मिली पूरी रकम को उसने उसी हैदराबाद की कंपनी में निवेश कर दिया, जिससे उसे काफी भारी-भरकम मुनाफा हुआ।

इस बड़ी सफलता के बाद सोमेंद्र के मन में खुद की स्कीम शुरू करने का विचार आया। उसने सबसे पहले अपने करीबी रिश्तेदारों और दोस्तों का पैसा इस स्कीम के तहत डबल करके दिखाया। जब रिश्तेदारों को उनका पैसा दोगुना होकर मिला, तो सोमेंद्र पर लोगों का भरोसा अभूतपूर्व तरीके से बढ़ गया। धीरे-धीरे लोग खुद-ब-खुद उससे जुड़ते चले गए और यह कारवां बढ़ता गया। साल 2017 में छोटे पैमाने पर शुरू हुआ यह खेल साल 2019 तक आते-आते 70 करोड़ रुपये से भी अधिक के आंकड़े को पार कर गया।

जब पहली बार फूटा घड़े का भंडा, और राजनीतिक संरक्षण ने बचाया

बताया जाता है कि उस समय तक सोमेंद्र लगभग 70 करोड़ रुपये से ज्यादा की रकम हैदराबाद की उसी माय होम कंपनी में निवेश कर चुका था। लेकिन किस्मत ने करवट बदली और उस कंपनी के संचालकों ने ही सोमेंद्र के साथ बड़ी धोखाधड़ी कर दी। इस धोखाधड़ी के दौरान सोमेंद्र को हैदराबाद में बंधक भी बना लिया गया था। हालांकि, वह वहां से किस तरह बचकर वापस लौटा, इसकी सटीक जानकारी सामने नहीं आ पाई है। हैदराबाद से वापस बालाघाट लौटने के बाद सोमेंद्र पर स्थानीय निवेशकों का पैसा लौटाने का भारी दबाव बनने लगा। जब निवेशकों को अपना पैसा वापस नहीं मिला, तो लोगों का गुस्सा धीरे-धीरे फूटने लगा।

साल 2019 में पहली बार सोमेंद्र की इस फर्जी स्कीम का भंडाफोड़ हुआ था। दरअसल, एक परेशान निवेशक ने अपनी रकम वापस न मिलने पर CM हेल्पलाइन में सोमेंद्र के खिलाफ लिखित शिकायत दर्ज कराई थी। लेकिन उस समय सोमेंद्र को मिले मजबूत राजनीतिक संरक्षण के चलते पुलिस और प्रशासन द्वारा कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई। जानकारों का मानना है कि यदि साल 2019 में ही पुलिस ने सख्त कदम उठाए होते, तो यह पोंजी स्कीम आगे चलकर अरबों रुपये के महाघोटाले का रूप नहीं ले पाती और हजारों मासूम परिवारों की गाढ़ी कमाई डूबने से बच जाती।

कार्रवाई से बचकर और बेलगाम हुआ मास्टरमाइंड

साल 2019 में जब सोमेंद्र के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं हुई और वह सुरक्षित बच निकला, तो उसके हौसले सातवें आसमान पर पहुंच गए। वह पूरी तरह से बेलगाम हो गया और उसने और अधिक आक्रामक तरीके से लोगों से पैसा इकट्ठा करना शुरू कर दिया। इस काम को बड़े पैमाने पर करने के लिए उसने अपनी एक संगठित टीम बनाई। इस टीम में उसने हेमराज आंबाडरे नाम के व्यक्ति को जोड़ा, जो निवेशकों को महज 6 महीने में पैसा दोगुना करने का झांसा देकर उनसे नकद रकम वसूलता था। इसके बाद इस गिरोह में अजय तिड़के नाम का एक और शख्स शामिल हुआ।

इन लोगों ने मिलकर कई फर्जी और कागजी कंपनियां खड़ी कीं। इन कंपनियों के जरिए उन्होंने आम जनता से लेकर बड़े-बड़े व्यापारियों, सरकारी अफसरों और रसूखदार नेताओं तक को अपने जाल में फंसाया। दोगुने पैसे के लालच में आकर हर वर्ग के लोगों ने बिना सोचे-समझे करोड़ों रुपये इनके पास जमा करा दिए।

कैसे काम करती थी यह पोंजी स्कीम?

बालाघाट के SP आदित्य मिश्रा ने इस पोंजी स्कीम के काम करने के तरीके का खुलासा करते हुए बताया कि जब सोमेंद्र कंकरायने की यह डबल मनी स्कीम आंतरिक रूप से लड़खड़ाने लगी, तो उसने इस धोखाधड़ी को जारी रखने के लिए एक नया रास्ता निकाला। वह नए निवेशकों को लगातार इस स्कीम में जोड़ता रहता था।

विश्वास जीतने के लिए वह निवेशकों को गारंटी के तौर पर पोस्ट डेटेड चेक का इस्तेमाल करता था। नए निवेशकों से जो पैसा आता था, उसी पैसे का इस्तेमाल वह पुराने निवेशकों का पैसा और उनका मुनाफा लौटाने के लिए करता था। इससे बाजार में यह संदेश गया कि सोमेंद्र वादे के मुताबिक सबका पैसा डबल कर रहा है और लोगों का भरोसा उस पर मजबूत बना रहा। जिन लोगों को सचमुच अपना पैसा दोगुना होकर मिल जाता था, वे लालच में आकर उस पूरी रकम को वापस इसी स्कीम में दोबारा निवेश कर देते थे। इस तरह यह पूरा खेल करीब 3 साल तक निर्बाध रूप से चलता रहा। लेकिन जैसे-जैसे समय बीतता गया, स्कीम की अवधि कम होती गई और समय पर पैसा वापस करने का दबाव बढ़ता चला गया, जिससे सोमेंद्र का यह साम्राज्य ताश के पत्तों की तरह ढहने लगा।

12वीं पास ठग की आलीशान और दिखावटी जिंदगी

भले ही सोमेंद्र कंकरायने खुद केवल 12वीं पास था और उसने कॉलेज की पढ़ाई बीच में ही छोड़ दी थी, लेकिन वह लोगों के सामने खुद को हार्वर्ड यूनिवर्सिटी से MBA पास आउट बताता था। वह बेहद आलीशान जीवनशैली जीने का आदी हो चुका था। उसे महंगी और लग्जरी गाड़ियों का बहुत शौक था। वह अक्सर समाज में यह अफवाह फैलाता था कि उसके संबंध बड़े-बड़े सेलिब्रिटीज और राजनेताओं से हैं और वह उनसे नियमित मुलाकात करता है।

निवेशकों का विश्वास जीतने के लिए वह दावा करता था कि वह उनके पैसे को भारत में नहीं, बल्कि विदेशों की प्रीमियम प्रॉपर्टीज और रियल एस्टेट में निवेश करता है। अपने इस झूठ को सच साबित करने के लिए वह सोशल मीडिया पर अपनी कथित विदेश यात्राओं की तस्वीरें और कहानियां साझा करता था। जबकि पुलिस जांच में सामने आई कड़वी सच्चाई यह है कि सोमेंद्र के पास खुद का पासपोर्ट तक नहीं था! स्थानीय लोगों के बीच एक चर्चा यह भी आम थी कि सोमेंद्र अपने घर की छत पर एक निजी हेलीपैड बनाने जा रहा है, ताकि वह सीधे अपने घर पर ही हेलीकॉप्टर उतार सके।

विधानसभा में गूंजा मुद्दा और पहली FIR

साल 2022 में आखिरकार इस बड़े घोटाले का पूरी तरह से पर्दाफाश हो गया। यह मामला इस कदर गंभीर था कि इसकी गूंज मध्य प्रदेश विधानसभा में भी सुनाई दी। विपक्ष और जनता के भारी दबाव के बाद प्रशासन हरकत में आया और सोमेंद्र कंकरायने और उसके सहयोगियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई शुरू की गई। 17 मई 2022 को सोमेंद्र और उसके साथियों को पुलिस ने पहली बार गिरफ्तार किया। उन सभी पर BUDS एक्ट 2019 के तहत मामला दर्ज किया गया।

गिरफ्तारी के बाद, 27 जुलाई 2022 को सोमेंद्र जमानत पर जेल से बाहर आने में कामयाब रहा। लेकिन जेल से बाहर आते ही रसूखदार और ताकतवर निवेशकों ने अपना पैसा वापस पाने के लिए सोमेंद्र और उसके साथियों को डराना-धमकाना और प्रताड़ित करना शुरू कर दिया। इस भारी दबाव से निपटने और पुराना कर्ज चुकाने के लिए सोमेंद्र ने अपने एजेंटों की संख्या और बढ़ा दी। इन एजेंटों ने अब ग्रामीण इलाकों का रुख किया और सीधे-सादे गरीब मजदूरों, किसानों और मध्यमवर्गीय परिवारों को निशाना बनाया। इन लोगों ने अपने लालच के चलते अपनी जीवन भर की जमा-पूंजी गंवा दी। 20 दिसंबर 2022 को अदालत ने सोमेंद्र और उसके साथियों की जमानत याचिका खारिज कर दी, जिसके बाद से वह लगातार फरार चल रहा था।

पुलिस का चक्रव्यूह: टेलीग्राम ऐप और हरिद्वार से गिरफ्तारी

बालाघाट के SP आदित्य मिश्रा ने बताया कि गिरफ्तारी से बचने के लिए सोमेंद्र लगातार अपनी लोकेशन बदल रहा था और देश के विभिन्न प्रसिद्ध धार्मिक स्थलों पर छिपकर रह रहा था। इस दौरान पुलिस ने अपनी कार्रवाई तेज करते हुए सोमेंद्र की करोड़ों रुपये की चल-अचल संपत्तियों को सीज कर दिया और उसकी जमीनों की रजिस्ट्री पर पूरी तरह से रोक लगा दी।

जांच के दौरान पुलिस ने एक बेहद चतुर और रणनीतिक कदम उठाया। पुलिस ने सोमेंद्र की एक जमीन की रजिस्ट्री करने की विशेष अनुमति दी। पुलिस का यह दांव काम कर गया। जैसे ही रजिस्ट्री की प्रक्रिया शुरू हुई, आरोपी और उसके सहयोगियों ने आपस में बातचीत करने और पैसों का लेन-देन करने के लिए सुरक्षित माने जाने वाले टेलीग्राम ऐप का इस्तेमाल करना शुरू कर दिया। यही पुलिस के लिए सबसे बड़ा और अहम सुराग साबित हुआ। पुलिस की तकनीकी विंग ने उनकी डिजिटल लोकेशन और टेलीग्राम गतिविधियों को ट्रैक करना शुरू किया, जिससे उनकी लोकेशन उत्तराखंड के हरिद्वार में पाई गई। इसके बाद एक विशेष पुलिस टीम तुरंत हरिद्वार भेजी गई, जिसने पूरी योजनाबद्ध तरीके से दबिश देकर मुख्य आरोपी सोमेंद्र सहित कुल 8 लोगों को गिरफ्तार कर लिया।

गिरफ्तार किए गए आरोपियों में सोमेंद्र का सगा मामा रामप्रसाद मंसूरे भी शामिल है। रामप्रसाद पेशे से एक सरकारी स्कूल का शिक्षक है, जिसने अपने प्रभाव का इस्तेमाल करते हुए शिक्षा विभाग के कई शिक्षकों को इस पोंजी स्कीम के जाल में फंसाया था। पुलिस के अनुसार, इस पूरे मामले में आरोपियों के खिलाफ 63 से ज्यादा आपराधिक मामले दर्ज किए जा चुके हैं।

गिरफ्तारी के बाद सोमेंद्र का कबूलनामा और राजनीतिक कनेक्शन का दावा

हरिद्वार से गिरफ्तारी के बाद जब सोमेंद्र कंकरायने को बालाघाट लाया गया और मीडिया के सामने पेश किया गया, तो उसके चेहरे पर कोई शिकन नहीं थी, लेकिन वह मीडिया के तीखे सवालों का सीधा जवाब देने से बचता नजर आया। उसने खुद का बचाव करते हुए कहा कि वह बेहद धार्मिक प्रवृत्ति का व्यक्ति है, इसलिए वह फरारी के दौरान देश के अलग-अलग प्रसिद्ध धार्मिक स्थलों पर जाकर शांति से रह रहा था।

सोमेंद्र ने दावा किया कि इस पूरे खेल में कई ऐसे प्रभावशाली लोग भी शामिल हैं जिन्होंने केवल उसके नाम का इस्तेमाल करके अपनी जेबें भरीं। उसने कहा कि उनके गर्म किए तवे पर कोई और रोटी सेंक गया। उसने पुलिस और प्रशासन से मांग की कि उन लोगों के खिलाफ भी निष्पक्ष जांच की जाए जिन्होंने उसके नाम का इस्तेमाल करके निवेशकों को चूना लगाया। इसके साथ ही सोमेंद्र ने एक बड़ा खुलासा करते हुए बताया कि उसकी सबसे पसंदीदा नारंगी रंग की हैरियर गाड़ी वर्तमान में पूर्व विधायक और भाजपा नेता रमेश भटेरे से जुड़े एक बेहद करीबी व्यक्ति के पास है।

सबसे बड़ा सवाल: कब और कैसे मिलेगा निवेशकों का पैसा?

इस पूरे मामले में सबसे बड़ा सवाल यह उठता है कि जिन हजारों लोगों ने अपनी गाढ़ी कमाई इस घोटाले में गंवाई है, उन्हें उनका पैसा कब वापस मिलेगा? इस पर बालाघाट के SP आदित्य मिश्रा ने स्पष्ट किया कि मुख्य आरोपियों की गिरफ्तारी के बाद अब अदालती और न्यायिक प्रक्रिया में काफी तेजी आएगी।

पुलिस प्रशासन अब तक सोमेंद्र और उसके साथियों के 32 से ज्यादा बैंक खातों को फ्रीज कर चुका है। इसके साथ ही उसकी कई चल और अचल संपत्तियों को कुर्क करने की कार्रवाई भी की जा रही है। SP ने बताया कि अदालत के अंतिम फैसले के बाद ही जब्त संपत्तियों की नीलामी कर निवेशकों को उनकी मूल राशि लौटाई जा सकेगी। हालांकि, इस पूरी कानूनी प्रक्रिया में काफी समय लग सकता है, इसलिए निवेशकों को अपनी रकम वापस पाने के लिए एक लंबा इंतजार करना होगा। पुलिस ने सभी निवेशकों से यह भी पुरजोर अपील की है कि कोई भी कानून अपने हाथ में न ले। कोई भी व्यक्ति आरोपियों के घर न जाए और न ही उनके परिजनों या रिश्तेदारों को किसी तरह से परेशान या तंग करे। यदि किसी भी निवेशक द्वारा ऐसी हरकत करने की शिकायत मिलती है, तो पुलिस उसके खिलाफ भी सख्त कानूनी कार्रवाई करने से पीछे नहीं हटेगी।

सान्वी राणा पाबना के क्राइम एवं राज्य रिपोर्टर हैं, जो अपराध और विभिन्न राज्यों की क्षेत्रीय खबरें कवर करते हैं। कानून-व्यवस्था, जांच और बड़ी आपराधिक घटनाओं की वे जिम्मेदार रिपोर्टिंग करते हैं। तथ्यों की पुष्टि और संवेदनशीलता उनके काम की पहचान हैं।

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