मानसून में उत्तराखंड की यात्रा का बना रहे हैं प्लान? तो भूलकर भी न करें ये 8 गलतियां उत्तराखंड एक महीने पहले 50
मानसून के दौरान उत्तराखंड के पहाड़ों की खूबसूरती मन मोह लेती है, लेकिन इस मौसम में यात्रा करना जानलेवा हो सकता है। सुरक्षित रहने के लिए इन जरूरी बातों का ध्यान रखें और जोखिम से बचें।

मानसून में पहाड़ की सैर और सावधानियां

उत्तराखंड के पहाड़ी इलाके मानसून के दौरान सैलानियों को अपनी तरफ खींचते हैं। चारों तरफ फैली हरियाली, गिरते हुए झरने और बादलों की चादर ओढ़े पहाड़ों का नज़ारा बेहद खूबसूरत होता है। हालांकि, यह मौसम जितना आकर्षक है, उतना ही जोखिम भरा भी माना जाता है। अगर आप भी बारिश के दिनों में पहाड़ों पर घूमने का मन बना रहे हैं, तो सुरक्षा का खास ख्याल रखना बेहद जरूरी है।

रात के सफर से करें परहेज

बारिश के दिनों में पहाड़ी रास्तों पर रात के समय यात्रा करना बहुत खतरनाक साबित हो सकता है। अंधेरा होने की वजह से सड़कों पर गिरे हुए पत्थर, भूस्खलन का मलबा, अचानक तेज बहाव वाला पानी या सड़कों के खराब हिस्से साफ दिखाई नहीं देते। इन परिस्थितियों में दुर्घटना होने की संभावना काफी बढ़ जाती है।

भूस्खलन वाले इलाकों में सतर्कता

अक्सर रास्तों पर लैंडस्लाइड जोन के चेतावनी बोर्ड लगे होते हैं। कई बार पर्यटक वहां अपनी गाड़ी रोककर फोटो या वीडियो खींचने लगते हैं, जो बहुत बड़ी गलती है। लैंडस्लाइड जोन में रुकना जान जोखिम में डालने के समान है, इसलिए ऐसी जगहों पर गाड़ी न रोकें और तुरंत आगे बढ़ जाएं।

यात्रा को सुरक्षित बनाने के सुझाव

  • यात्रा शुरू करने से पहले मौसम विभाग और स्थानीय प्रशासन से रास्ते की सही जानकारी जरूर लें।
  • अपनी यात्रा की योजना इस तरह बनाएं कि आप अंधेरा होने से पहले अपनी मंजिल पर पहुंच जाएं।
  • पहाड़ों पर चलने के लिए अनुभवी ड्राइवर का साथ रखें या स्थानीय चालकों की सलाह लें।
  • किसी भी अनहोनी से बचने के लिए अपने साथ जरूरी दवाओं, टॉर्च और सूखे राशन का बैकअप रखें।
  • अगर रास्ते में पानी का तेज बहाव या मलबा दिखे, तो आगे बढ़ने का जोखिम न लें और सुरक्षित स्थान पर प्रतीक्षा करें।
  • गाड़ी की कंडीशन चेक करवाएं, खास तौर पर टायर और ब्रेक, क्योंकि गीली सड़कों पर इनकी भूमिका अहम होती है।
  • सोशल मीडिया पर दिखने वाले अनजान रास्तों की बजाय मुख्य और सुरक्षित राजमार्गों का ही उपयोग करें।
  • अकेले यात्रा करने के बजाय समूह में या अनुभवी गाइड के साथ निकलना ज्यादा सुरक्षित होता है।

सही जानकारी लेकर और सतर्कता के साथ की गई यात्रा से आप न केवल अपने समय और पैसे की बचत करेंगे, बल्कि अपनी सुरक्षा भी सुनिश्चित कर पाएंगे। पहाड़ों का आनंद लेने का मतलब यह नहीं है कि आप सुरक्षा से समझौता करें।

अंजलि सिंह पाबना की राज्य संवाददाता हैं, जो विभिन्न राज्यों की क्षेत्रीय खबरें और खानपान कवर करती हैं। स्थानीय घटनाओं, संस्कृति और जायके की कहानियों को वे करीब से रिपोर्ट करती हैं। अलग-अलग राज्यों की विविधता उनकी रिपोर्टिंग में नजर आती है।

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