दादा ने सिखाया निशाना, पोते-पोती ने राष्ट्रीय स्तर तक बनाई पहचान, प्रेरणा देती कामयाबी की कहानी उत्तर प्रदेश 10 घंटे पहले 9
आजमगढ़ के अमौडा गांव के सुशांत राय और उनकी छोटी बहन अदिति राय ने अपने दादा से निशानेबाजी सीखकर कम उम्र में ही स्टेट लेवल मेडल जीते और नेशनल के लिए क्वालीफाई किया। अब दोनों भारतीय टीम में जगह बनाने के लिए ट्रायल दे रहे हैं।

कहा जाता है कि प्रतिभा कभी उम्र की मोहताज नहीं होती। अगर इरादे मजबूत हों और परिवार का भरपूर साथ मिले तो इंसान किसी भी छोटी जगह से निकलकर बुलंदियों तक पहुंच सकता है। इसी बात को आजमगढ़ के दो बच्चों ने सच कर दिखाया है, जिन्होंने अपने दादा से निशानेबाजी की कला सीखी और बेहद कम उम्र में ही इस खेल में राष्ट्रीय स्तर तक अपनी पहचान बना ली।

आज जब ज्यादातर युवा मोबाइल और तरह-तरह के ध्यान भटकाने वाले साधनों में उलझे हुए हैं, वहीं आजमगढ़ जिले के लालगंज क्षेत्र के अमौडा गांव के रहने वाले सुशांत राय और उनकी छोटी बहन अदिति राय ने निशानेबाजी में अलग मुकाम हासिल किया है। दोनों भाई-बहन अब भारतीय टीम में जगह बनाने के लिए ट्रायल दे रहे हैं और पढ़ाई व खेल के बीच बेहतरीन तालमेल बिठाते हुए लगातार आगे बढ़ रहे हैं।

दादा से सीखी निशानेबाजी

सुशांत राय ने महज 15 साल की उम्र में ही निशानेबाजी में स्टेट लेवल पर मेडल जीतकर नेशनल लेवल के लिए क्वालीफाई कर लिया था। फिलहाल वह कक्षा 12वीं की परीक्षा की तैयारी कर रहे हैं और इसके साथ ही 10 मीटर तथा 25 मीटर एयर पिस्टल इवेंट में नेशनल क्वालीफाई कर चुके हैं।

बातचीत में सुशांत ने बताया कि उन्होंने शूटिंग की बारीकियां अपने दादा सच्चिदानंद राय से सीखी हैं। उन्होंने कहा कि उनके दादाजी खुद एक बेहतरीन निशानेबाज रहे हैं और उन्हीं से उन्होंने निशाना लगाना सीखा। इसके बाद धीरे-धीरे शूटिंग में करियर बनाने के लिए वह लगातार अभ्यास करते रहे। पहले उन्होंने स्टेट लेवल पर सिल्वर मेडल हासिल किया और अब भारतीय टीम में चयन के लिए ट्रायल दे रहे हैं।

भाई से प्रेरणा लेकर मैदान में उतरीं अदिति

सुशांत की कामयाबी देखकर उनकी छोटी बहन अदिति राय ने भी इसी क्षेत्र में कदम रखा। अदिति ने भी महज 15 साल की उम्र में स्टेट लेवल पर मेडल जीतकर नेशनल के लिए क्वालीफाई कर लिया और अब भारतीय टीम का हिस्सा बनने के लिए ट्रायल में जुटी हुई हैं।

अदिति ने बताया कि शुरुआत में वह घर पर ही एयर गन से आम तोड़ा करती थीं और यूं ही निशाना साधती रहती थीं। जब उनके बड़े भाई ने इसे आधिकारिक तौर पर शुरू किया और स्टेट लेवल की प्रतियोगिताओं में हिस्सा लेने लगे, तभी अदिति की भी इस खेल में दिलचस्पी जागने लगी।

'लड़की है तो कर सकती है'

अदिति इस समय कक्षा 10वीं की छात्रा हैं और बोर्ड परीक्षाओं की तैयारी के साथ-साथ निशानेबाजी की ट्रेनिंग में भी बढ़-चढ़कर हिस्सा ले रही हैं। उनका कहना है कि अक्सर छोटे शहरों और गांवों की लड़कियों को खेल के क्षेत्र में आगे बढ़ने से रोक दिया जाता है। निशानेबाजी शुरू करते समय उन्हें भी डर लगा था कि यह सब कैसे होगा, लेकिन आखिर में सब कुछ बहुत अच्छा रहा।

उन्होंने कहा कि लोग अक्सर मानते हैं कि खेल से कुछ हासिल नहीं होता, मगर यह सोच पूरी तरह गलत है। खेल एक ऐसा क्षेत्र है, जहां शानदार करियर बनाया जा सकता है। अदिति का कहना है कि लड़कियों को अक्सर ऐसे क्षेत्रों में करियर बनाने से इसलिए रोका जाता है क्योंकि लोग मानते हैं कि लड़कियां यह नहीं कर सकतीं, लेकिन उन्होंने अपने परिवार से यही सीखा है कि 'लड़की है तो कर सकती है'।

चेतन शुक्ला (Chetan Shukla) Print & Broadcast News Agency (PABNA) में 'मुख्य संपादक' हैं। वह पत्रकारिता में 15 वर्ष से ज्यादा का अनुभव रखते हैं। ये मूल रूप से उत्तर प्रदेश के रहने वाले हैं। इन्हें राजनीति और आम आदमी से जुड़ी खबरें लिखना पसंद है।

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