माटी कला बोर्ड से मिट्टी के कारीगरों को नई राहत, अपना उद्यम खड़ा करने में मिलेगी मदद; जानिए लाभ पाने का तरीका उत्तर प्रदेश एक महीने पहले 21
उत्तर प्रदेश माटी कला बोर्ड मिट्टी के पारंपरिक कारीगरों को प्रशिक्षण, मुफ्त टूलकिट और आर्थिक सहायता उपलब्ध करा रहा है, ताकि वे अपने व्यवसाय को आगे बढ़ा सकें और रोजगार के अवसर पैदा कर सकें।

आजमगढ़ जिले में बनने वाले मिट्टी के बर्तनों ने पूरे देश में अपनी अलग पहचान बनाई है। इस पारंपरिक कारोबार से जुड़े लोगों को संबल देने के लिए सरकार लगातार अलग-अलग योजनाएं चला रही है, ताकि यह व्यवसाय और मजबूत हो और ज्यादा से ज्यादा लोग इससे जुड़ सकें। आजमगढ़ में तैयार होने वाले मिट्टी के बर्तनों की मैन्युफैक्चरिंग के साथ-साथ इनके लिए बाजार भी मुहैया कराया जाता है।

प्रदेश सरकार ने इन बर्तनों को वन डिस्ट्रिक्ट वन रैंकिंग में शामिल किया हुआ है, जिससे यहां के उत्पादों को विशेष पहचान मिल रही है।

मिट्टी के कारीगरों को मिलेगी टूलकिट

इसी क्रम में माटी कला बोर्ड की ओर से मिट्टी के कारीगरों के लिए कई योजनाएं संचालित की जा रही हैं। इनका लाभ उठाकर इस क्षेत्र से जुड़े पारंपरिक व्यापारी अपने कारोबार को बेहतर ढंग से चला सकते हैं और अधिक उत्पादन करते हुए ज्यादा मुनाफा कमा सकते हैं। साथ ही नए उद्यमियों को प्रोत्साहित करने के लिए बोर्ड उन्हें आर्थिक सहायता से लेकर टूलकिट जैसी सुविधाएं भी दे रहा है। इस तरह योजना का लाभ लेते हुए कारीगर आर्थिक मदद हासिल कर सकते हैं।

उद्यम में सहायक बनेंगे ये उपकरण

जिला खादी ग्राम उद्योग अधिकारी दीपक मिश्रा ने बताया कि उत्तर प्रदेश माटी कला बोर्ड मुख्य रूप से तीन काम करता है। इनमें माटी कला के पारंपरिक व्यवसाय से जुड़े लोगों को प्रशिक्षण देना और उन्हें प्रमाण-पत्र प्रदान करना शामिल है। इसके अलावा अपना काम शुरू करने और उसे चलाते रहने के लिए जरूरी मशीनी उपकरणों की टूलकिट भी समय-समय पर मुफ्त उपलब्ध कराई जाती है, जिसमें कारीगरों को बिजली से चलने वाला इलेक्ट्रिक चाक दिया जाता है।

इसके साथ ही मिट्टी के बड़े व्यवसायियों के लिए पग मिल भी मुहैया कराई जाती है, ताकि वे इस क्षेत्र में उद्योग शुरू कर सकें और अपने साथ-साथ दूसरों को भी रोजगार दे सकें।

मिलती है आर्थिक सहायता

बोर्ड की ओर से तीसरी और सबसे अहम योजना आर्थिक सहायता उपलब्ध कराने की है। यह सुविधा मुख्य रूप से माटी कला व्यवसाय से जुड़े पारंपरिक कारीगरों को दी जाती है। साथ ही यह उन लोगों के लिए भी उपलब्ध होगी जो इस काम में भली-भांति प्रशिक्षित हैं और जिनके पास संबंधित प्रमाण-पत्र मौजूद है।

इस योजना के तहत आवेदन करने के लिए कोई भी इच्छुक उम्मीदवार खादी ग्राम उद्योग के अंतर्गत संचालित उत्तर प्रदेश माटी कला बोर्ड के विभाग में सीधे आवेदन कर सकता है। इसके अलावा ऑनलाइन माध्यम से भी आवेदन कर योजना का लाभ लिया जा सकता है।

चेतन तिवारी पाबना के उत्तर प्रदेश संवाददाता हैं और राज्य की राजनीति, प्रशासन तथा जमीनी मुद्दों को कवर करते हैं। लखनऊ में रहते हुए वे जिलों से लेकर विधानसभा तक की खबरें संतुलित रिपोर्टिंग के साथ पाठकों तक पहुंचाते हैं। आम लोगों के मुद्दों और स्थानीय घटनाओं पर उनका खास फोकस रहता है।

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