भारत में 8.7 करोड़ युवा न तो पढ़ाई कर रहे, न ही नौकरी में: नीति आयोग की रिपोर्ट ने बढ़ाई चिंता भारत 3 घंटे पहले 2
नीति आयोग की एक नई रिपोर्ट में देश के युवाओं की स्थिति को लेकर गंभीर आंकड़े सामने आए हैं, जिसमें बताया गया है कि करोड़ों युवा किसी भी प्रकार के शिक्षा, प्रशिक्षण या रोजगार का हिस्सा नहीं हैं।

युवाओं की स्थिति पर नीति आयोग का बड़ा खुलासा

नीति आयोग ने हाल ही में जारी अपनी एक महत्वपूर्ण रिपोर्ट में भारतीय युवाओं के भविष्य को लेकर चिंताजनक आंकड़े पेश किए हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, भारत में लगभग 8.7 करोड़ ऐसे युवा हैं जो न तो किसी शैक्षणिक संस्थान में पढ़ाई कर रहे हैं, न ही किसी तरह के रोजगार में लगे हैं और न ही वे किसी कौशल विकास प्रशिक्षण का हिस्सा हैं। यह स्थिति देश के विकास लक्ष्यों के लिए एक बड़ी चुनौती की तरह देखी जा रही है।

रिपोर्ट का आधार और विस्तार

नीति आयोग की इस रिपोर्ट का शीर्षक 'विकसित भारत 2047 के लिए कौशल विकास की नयी कल्पना' रखा गया है। इसमें दी गई जानकारी मुख्य रूप से वर्ष 2021 में किए गए राष्ट्रीय नमूना सर्वेक्षण के 78वें दौर के आंकड़ों पर आधारित है। रिपोर्ट में 15 से 29 वर्ष की आयु सीमा वाले युवाओं को अध्ययन का केंद्र बनाया गया है। इन आंकड़ों से साफ पता चलता है कि एक बड़ी युवा आबादी वर्तमान में मुख्यधारा की शिक्षा या कार्यक्षेत्र से पूरी तरह कटी हुई है।

स्वरोजगार और प्रशिक्षण की जरूरत

रिपोर्ट में स्पष्ट रूप से सिफारिश की गई है कि युवाओं को स्वरोजगार की दिशा में आगे बढ़ाने के लिए ठोस कदम उठाए जाने चाहिए। इसके लिए सरकार को ऐसे व्यापक प्रशिक्षण कार्यक्रमों को लागू करने की आवश्यकता है जो न केवल प्रभावी हों, बल्कि किफायती भी हों। महिलाओं और विशेष रूप से कम आय वाले परिवारों से आने वाले युवाओं के लिए सरकार को सब्सिडी वाले प्रशिक्षण विकल्पों पर विशेष ध्यान देना होगा।

आर्थिक तंगी के कारण कई युवाओं को अपनी पढ़ाई पूरी करने के तुरंत बाद ही कम वेतन वाली नौकरियों को स्वीकार करने के लिए मजबूर होना पड़ता है। रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि भारत में केवल 8.25 प्रतिशत लोग ही ऐसे हैं जो अपनी वास्तविक योग्यता और कौशल के अनुरूप नौकरी पाने में सफल हो पाते हैं। आर्थिक संसाधनों की कमी के कारण ये युवा उच्च स्तरीय ट्रेनिंग प्रोग्राम्स में शामिल नहीं हो पाते हैं।

देश के भविष्य के लिए समाधान की राह

युवा किसी भी राष्ट्र की सबसे बड़ी संपत्ति होते हैं। यदि इस विशाल युवा शक्ति का सही तरीके से उपयोग नहीं किया गया, तो यह न केवल देश की उत्पादकता के लिए नुकसानदेह है, बल्कि युवाओं के व्यक्तिगत विकास पर भी गहरा नकारात्मक प्रभाव डालता है। इसलिए, ऐसी नीतियों और प्रणालियों का निर्माण करना आवश्यक है, जो आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों के युवाओं को रोजगार के योग्य बनाने और उन्हें आत्मनिर्भर बनाने में मदद कर सकें।

देवेंद्र पांडेय पाबना के राजनीतिक संवाददाता हैं और राष्ट्रीय राजनीति, सरकार तथा नीतियों पर रिपोर्टिंग करते हैं। चुनाव, संसद और बड़े सियासी घटनाक्रमों का वे गहराई से विश्लेषण करते हैं। उनकी रिपोर्टिंग निष्पक्ष और तथ्यों पर आधारित होती है।

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