उत्तर प्रदेश
एक घंटा पहले
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आगरा की सड़कों पर बेजुबानों के लिए उम्मीद की किरण
उत्तर प्रदेश के आगरा शहर में सड़क किनारे तड़पते और दुर्घटनाओं का शिकार होने वाले बेसहारा गोवंश के लिए शास्त्रीपुरम इलाका उम्मीद की एक बड़ी रोशनी बनकर उभरा है। यहां पिछले कई वर्षों से गौसेवकों की एक टीम पूरी तरह से निस्वार्थ भाव से घायल, बीमार और असहाय पशुओं के जीवन को बचाने के लिए काम कर रही है। यह टीम न केवल इन बेजुबान पशुओं को नि:शुल्क उपचार दे रही है, बल्कि 24 घंटे सक्रिय रहने वाली एंबुलेंस सेवा के जरिए शहर के दूरदराज इलाकों से उन्हें सुरक्षित रेस्क्यू कर उनकी जान भी बचा रही है।
गौसेवा का संकल्प और प्रेरणा
शास्त्रीपुरम इंडस्ट्रियल एरिया के पास स्थित इस गौ सेवा केंद्र की शुरुआत लगभग 15 साल पहले हुई थी। गौसेवक रवि ने बताया कि उन्होंने तब सड़कों पर बेसहारा घूमने वाली गायों की दुर्दशा देखी थी। इस सफर की शुरुआत एक दुखद घटना के बाद हुई, जब उनके सामने ही एक गाय की मौत हो गई। उस हृदय विदारक दृश्य ने उन्हें अंदर तक झकझोर दिया, जिसके बाद उन्होंने अपना पूरा जीवन गौसेवा के प्रति समर्पित करने का संकल्प ले लिया। रवि ने उसी समय घायल गायों के लिए नि:शुल्क चिकित्सा व्यवस्था करने का दृढ़ निश्चय किया।
जुड़ते गए हाथ और बनी एक मजबूत टीम
शुरुआत में यह प्रयास व्यक्तिगत था, लेकिन धीरे-धीरे नेक काम की खबर फैलती गई और अन्य लोग भी इस मुहिम में शामिल होते चले गए। आज इस टीम में कई समर्पित गौसेवक शामिल हैं जो सड़क, नाले या सार्वजनिक स्थानों पर किसी भी घायल या बीमार गोवंश की सूचना मिलते ही मदद के लिए दौड़ पड़ते हैं। टीम के सदस्य संस्कार ने बताया कि उनका एकमात्र उद्देश्य किसी भी पशु को इलाज के अभाव में दम तोड़ने से बचाना है। यह टीम न केवल घायलों का उपचार करती है, बल्कि बेसहारा पशुओं के लिए समय पर चारे और साफ पानी की भी मुस्तैदी से व्यवस्था करती है।
स्वास्थ्य लाभ तक पूरी जिम्मेदारी
संस्कार भदौरिया ने साझा किया कि पिछले 5 सालों से वे अपनी टीम के साथ शास्त्रीपुरम क्षेत्र में इस मिशन को चला रहे हैं। आगरा के किसी भी कोने से सूचना मिलते ही टीम मौके पर पहुंचती है और घायल पशु को सेंटर पर ले आती है। उन्होंने बताया कि समाज के सहयोग से ही पशुओं के खान-पान और दवाओं का खर्च जुटाया जाता है। इस सेंटर की खासियत यह है कि जब तक पशु पूरी तरह स्वस्थ नहीं हो जाता, उसे यहीं रखकर उसकी देखरेख की जाती है। पूरी तरह स्वस्थ होने के बाद इन पशुओं को सुरक्षित गौशालाओं में भेज दिया जाता है, जहां उनकी आगे की देखभाल सुनिश्चित की जाती है।
24 घंटे सक्रिय एंबुलेंस और रेस्क्यू नेटवर्क
गौ सेवा केंद्र से जुड़े अशोक बाबू ने बताया कि सेंटर पर 24 घंटे एंबुलेंस की सुविधा उपलब्ध है। टीम के पास एक सुदृढ़ रेस्क्यू नेटवर्क है, जिससे शहर के किसी भी हिस्से से सूचना मिलने पर तुरंत प्रतिक्रिया दी जाती है। उन्होंने बताया कि कई बार गाय या नंदी नाले में, गहरे गड्ढों में या कठिन स्थानों पर फंस जाते हैं। ऐसे चुनौतीपूर्ण मामलों में भी उनकी टीम मौके पर पहुंचकर सुरक्षित रेस्क्यू ऑपरेशन चलाती है। टीम का मुख्य लक्ष्य बेसहारा पशुओं को समय पर चिकित्सा सहायता उपलब्ध कराना है, ताकि उन्हें दर्द और मौत के मुहाने से वापस लाया जा सके। यह टीम शहर के निवासियों से भी अपील करती है कि वे कहीं भी घायल पशु देखें तो तुरंत संपर्क करें ताकि उनकी जान बचाई जा सके।
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