अंबाला में किसानों की चिंता बढ़ी, फसल बचाने की जद्दोजहद में जुटे अन्नदाता हरियाणा 15 घंटे पहले 4
अंबाला छावनी के हाथीखाना क्षेत्र में बेमौसम गर्मी और बारिश की कमी ने किसानों की कमर तोड़ दी है, जिससे उन्हें अब मुनाफे की जगह सिर्फ अपनी लागत निकलने की चिंता सता रही है।

हाथीखाना इलाके में कुदरत की मार

अंबाला छावनी के अंतर्गत आने वाले हाथीखाना इलाके के किसान इन दिनों भारी संकट के दौर से गुजर रहे हैं। क्षेत्र के किसानों के लिए प्रकृति का मिजाज पूरी तरह से प्रतिकूल हो गया है। भीषण गर्मी, तेज धूप और बारिश में कमी के कारण फसलों की स्थिति दयनीय हो गई है। हालात इतने बिगड़ गए हैं कि किसान अब अपनी मेहनत का मुनाफा कमाने का सपना छोड़ चुके हैं और सिर्फ अपनी लागत निकालने की प्रार्थना कर रहे हैं।

फसलों पर बुरा असर

क्षेत्र में सबसे अधिक नुकसान अरबी की फसल को पहुंचा है। तेज धूप ने इस फसल को लगभग पूरी तरह से बर्बाद कर दिया है, जिससे किसानों को तगड़ा आर्थिक झटका लगा है। इसके अलावा तोरी की फसल भी कुदरत की मार से अछूती नहीं है। हालांकि खेतों में तोरी की बेलें अभी भी हरी-भरी नजर आ रही हैं, लेकिन फूल झड़ने की समस्या के कारण उत्पादन पर गहरा असर पड़ रहा है।

अनुभवी किसानों का दर्द

करीब 40 साल से खेती कर रहे बाबूराम का कहना है कि उन्होंने अपना पूरा जीवन इसी मिट्टी की सेवा में बिता दिया है, लेकिन ऐसी विपरीत परिस्थितियां पहले कभी नहीं देखीं। धूप इतनी प्रचंड है कि फसलें खेत में ही झुलस रही हैं। वहीं, एक अन्य किसान संजय कुमार के अनुसार बेलों में फल लगने से पहले ही फूल झड़ जाने के कारण पैदावार घटने का डर बना हुआ है। किसान अब इस उम्मीद में हैं कि यदि मौसम में सुधार होता है, तो शायद कुछ हद तक उनकी लागत वापस निकल सके।

अंजलि सिंह पाबना की राज्य संवाददाता हैं, जो विभिन्न राज्यों की क्षेत्रीय खबरें और खानपान कवर करती हैं। स्थानीय घटनाओं, संस्कृति और जायके की कहानियों को वे करीब से रिपोर्ट करती हैं। अलग-अलग राज्यों की विविधता उनकी रिपोर्टिंग में नजर आती है।

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