अपाचे: राफेल और F-35 जैसा खतरनाक 'फ्लाइंग टैंक', एक हादसे में अमेरिका को ₹8,50,00,00,000 तक की चोट, जानिए भारत के पास कितने राष्ट्रीय राजनीति एक घंटा पहले 2
स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के पास अमेरिकी AH-64 अपाचे लड़ाकू हेलीकॉप्टर गिर गया, जिसे ईरान द्वारा मार गिराने का आरोप राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने लगाया है। दुनिया के इस सबसे एडवांस अटैक चॉपर की कीमत 850 से 1350 करोड़ रुपये तक है और भारत के पास ऐसे कुल 28 हेलीकॉप्टर मौजूद हैं।

पश्चिम एशिया एक बार फिर युद्ध की आग में झुलसता नजर आ रहा है। ईरान द्वारा कथित तौर पर स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में अमेरिकी AH-64 अपाचे हेलीकॉप्टर को मार गिराए जाने की घटना के बाद डोनाल्ड ट्रंप की सेना ने भी जवाबी कार्रवाई की है। अपाचे के गिरने की इस खबर ने पूरी दुनिया में हलचल मचा दी है, क्योंकि यह कोई साधारण हेलीकॉप्टर नहीं, बल्कि दुनिया का सबसे एडवांस लड़ाकू चॉपर माना जाता है। इसे निशाना बनाना सीधे तौर पर अमेरिकी सैन्य शक्ति को चुनौती देने जैसा है।

यह हादसा होर्मुज स्ट्रेट के नजदीक हुआ — वही इलाका, जहां से दुनिया के बड़े हिस्से का तेल गुजरता है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया कि इस हेलीकॉप्टर को ईरान ने गिराया, हालांकि अमेरिकी सेना ने अब तक इसकी पुष्टि नहीं की है। राहत की बात यह रही कि दोनों पायलट सुरक्षित हैं और अमेरिकी बलों ने कुछ ही घंटों के भीतर उन्हें बचा लिया। मामले की जांच अभी जारी है।

कितनी है अपाचे की कीमत?

अपाचे की गिनती दुनिया के सबसे महंगे सैन्य हेलीकॉप्टरों में होती है। अकेले हेलीकॉप्टर की कीमत ही 35 से 40 मिलियन डॉलर के बीच होती है, जो भारतीय मुद्रा में लगभग 300 से 350 करोड़ रुपये बैठती है। लेकिन कहानी यहीं नहीं रुकती। जब इसमें हथियार, मिसाइलें, रडार सिस्टम, स्पेयर पार्ट्स, ट्रेनिंग और लॉजिस्टिक सपोर्ट को जोड़ा जाता है, तो लागत कई गुना बढ़ जाती है।

रक्षा विशेषज्ञों के अनुसार एक संपूर्ण अपाचे प्लेटफॉर्म पर कुल खर्च 52 से 100 मिलियन डॉलर तक पहुंच सकता है, यानी करीब 450 करोड़ से 850 करोड़ रुपये। यही कारण है कि किसी अपाचे का गिरना महज एक हेलीकॉप्टर का नुकसान नहीं माना जाता, बल्कि इसके पीछे भारी सैन्य निवेश भी डूब जाता है।

F-35 और राफेल जितना दमदार?

अपाचे हेलीकॉप्टर और F-35 या राफेल लड़ाकू विमान भले ही अलग-अलग श्रेणियों के प्लेटफॉर्म हों, लेकिन युद्धक्षेत्र में इनकी अहमियत लगभग बराबर मानी जाती है। जिस तरह F-35 और राफेल आसमान से दुश्मन पर कहर बरपाते हैं, उसी तरह अपाचे जमीन पर मौजूद टैंकों, बंकरों और सैन्य ठिकानों को नेस्तनाबूद करने में माहिर है। यही वजह है कि कई सैन्य विशेषज्ञ अपाचे को हेलीकॉप्टरों की दुनिया का सुपरस्टार करार देते हैं।

'फ्लाइंग टैंक' क्यों कहलाता है?

अपाचे को अक्सर 'फ्लाइंग टैंक' कहकर पुकारा जाता है और इसकी सबसे बड़ी ताकत इसकी मारक क्षमता है। इसमें 30 मिमी की M230 चेन गन लगी होती है, साथ ही हेलफायर मिसाइलें और हाइड्रा रॉकेट भी मौजूद रहते हैं। यह हेलीकॉप्टर बेहद कम ऊंचाई पर उड़ान भरते हुए हमला कर सकता है, और रात के अंधेरे में भी इसके सेंसर और रडार पूरी तरह प्रभावी ढंग से काम करते हैं। यही खूबियां इसे युद्धक्षेत्र में बेहद घातक बना देती हैं।

चार दशकों से जंग के मैदान में

अपाचे कोई नया प्लेटफॉर्म नहीं है। इसने 1984 में अमेरिकी सेना में अपनी सेवा शुरू की थी। इसके बाद खाड़ी युद्ध, इराक युद्ध, अफगानिस्तान अभियान और आतंकवाद विरोधी ऑपरेशनों में इसका जमकर इस्तेमाल हुआ। यही कारण है कि इसे दुनिया का सबसे ज्यादा युद्ध में आजमाया गया अटैक हेलीकॉप्टर माना जाता है।

बोइंग के आंकड़े बताते हैं कि अपाचे हेलीकॉप्टर अब तक 53 लाख घंटे से अधिक की उड़ान भर चुके हैं, जिनमें से 13 लाख घंटे से ज्यादा वास्तविक युद्ध अभियानों में बीते हैं। किसी भी सैन्य प्लेटफॉर्म के लिए यह रिकॉर्ड बेहद प्रभावशाली माना जाता है।

दुनिया के कितने देशों के पास है यह चॉपर?

अपाचे सिर्फ अमेरिकी सेना तक सीमित नहीं है। आज दुनिया के 19 देश इसका इस्तेमाल कर रहे हैं और वैश्विक स्तर पर 1300 से ज्यादा अपाचे हेलीकॉप्टर सेवा में हैं। अमेरिका के अलावा ब्रिटेन, सऊदी अरब, कतर, जापान, दक्षिण कोरिया, ऑस्ट्रेलिया और भारत जैसे देशों ने भी इसे अपने बेड़े में शामिल किया है।

भारत के बेड़े में कितने अपाचे?

भारत ने बीते कुछ वर्षों में अपनी सैन्य शक्ति को मजबूत करने के लिए अपाचे हेलीकॉप्टर खरीदे हैं। भारतीय वायुसेना के पास फिलहाल 22 AH-64E अपाचे हेलीकॉप्टर हैं, जिन्हें पश्चिमी और उत्तरी मोर्चों पर तैनात किया गया है। इसके साथ ही भारतीय सेना के लिए भी छह अपाचे हेलीकॉप्टरों की खरीद प्रक्रिया पूरी कर ली गई है। इनके शामिल होने से थल सेना की आक्रामक क्षमता और मजबूत होगी। विशेषज्ञों का मानना है कि चीन और पाकिस्तान से जुड़ी चुनौतियों के बीच अपाचे भारत के लिए बेहद अहम हथियार साबित हो सकता है।

क्या वाकई ईरान ने मार गिराया?

इस पूरे प्रकरण का सबसे बड़ा सवाल यही है। डोनाल्ड ट्रंप का दावा है कि हेलीकॉप्टर को ईरान ने निशाना बनाया, लेकिन अमेरिकी सैन्य अधिकारियों ने अब तक ऐसा कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया है। तकनीकी खराबी भी एक संभावना हो सकती है, और मौसम या किसी अन्य वजह से भी यह हादसा हो सकता है। जांच पूरी होने से पहले किसी नतीजे पर पहुंचना कठिन है, क्योंकि किसी भी देश के लिए अपाचे को मार गिराना आसान काम नहीं है।

सिर्फ हादसा नहीं, बड़ा भू-राजनीतिक संकेत

यह घटना ऐसे वक्त सामने आई है जब अमेरिका, ईरान और इजरायल के बीच तनाव लगातार बना हुआ है। होर्मुज स्ट्रेट पहले से ही दुनिया के सबसे संवेदनशील समुद्री क्षेत्रों में गिना जाता है। यदि जांच में किसी हमले की पुष्टि होती है, तो इसका असर पूरे क्षेत्र की सुरक्षा स्थिति पर पड़ सकता है और अमेरिका तथा ईरान के बीच चल रही बातचीत भी प्रभावित हो सकती है।

फिलहाल इतना तय है कि अपाचे का यह हादसा महज एक सैन्य घटना भर नहीं है। आने वाले दिनों में यह मध्य-पूर्व की राजनीति और सुरक्षा समीकरणों पर भी गहरा असर डाल सकता है।

चेतन शुक्ला (Chetan Shukla) Print & Broadcast News Agency (PABNA) में 'मुख्य संपादक' हैं। वह पत्रकारिता में 15 वर्ष से ज्यादा का अनुभव रखते हैं। ये मूल रूप से उत्तर प्रदेश के रहने वाले हैं। इन्हें राजनीति और आम आदमी से जुड़ी खबरें लिखना पसंद है।

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