ईरान को बड़ा झटका: ट्रंप का ऐलान, जब्त पैसों से होगी जहाजों और कार्गो के नुकसान की भरपाई विश्व एक दिन पहले 6
अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के बीच डोनाल्ड ट्रंप ने कड़ा रुख अपनाया है। उन्होंने साफ कर दिया है कि भविष्य में जहाजों या कार्गो को होने वाले किसी भी नुकसान की भरपाई अमेरिका के पास जमा ईरान के फ्रीज फंड से की जाएगी।

तनाव की आग में झुलस रहा मिडिल ईस्ट

मध्य पूर्व इस समय संघर्ष की गंभीर स्थिति से गुजर रहा है। अमेरिका और ईरान के बीच चल रहा गतिरोध अब नए स्तर पर पहुंच चुका है, जहां दोनों देशों के बीच सीजफायर की स्थिति समाप्त हो चुकी है। दोनों पक्ष एक दूसरे के सैन्य और रणनीतिक ठिकानों पर निरंतर हमले कर रहे हैं। अमेरिका ने ईरान के विभिन्न क्षेत्रों में मौजूद सैन्य बुनियादी ढांचे को निशाना बनाया है, जबकि ईरान ने भी क्षेत्र में मौजूद अमेरिकी ठिकानों पर जवाबी कार्रवाई की है। इस अस्थिर माहौल के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बेहद कड़ा और महत्वपूर्ण बयान जारी किया है, जिससे ईरान के साथ टकराव और गहरा सकता है।

ट्रंप का स्पष्ट रुख

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपने आधिकारिक संदेश में कहा है कि अब से जहाजों, कार्गो या उनसे संबंधित किसी भी संपदा को जो भी नुकसान होगा, उसकी भरपाई ईरान के उस धन से की जाएगी जो वर्तमान में संयुक्त राज्य अमेरिका के कब्जे और नियंत्रण में फ्रीज है। ट्रंप ने इसे न्यायसंगत कदम बताते हुए कहा है कि नुकसान चाहे कितना भी बड़ा क्यों न हो, उसकी भरपाई के लिए यह तरीका ही अपनाया जाएगा। उन्होंने इस बयान को तब तक आधिकारिक माना जाने का निर्देश दिया है जब तक कि प्रशासन की ओर से कोई नई जानकारी सामने न आ जाए।

समुद्री मार्गों पर लगातार हमले

बता दें कि लंबे समय से स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज और लाल सागर के समुद्री रास्तों पर तनाव बना हुआ है। ईरान और उसके समर्थक गुटों द्वारा तेल टैंकरों और मालवाहक जहाजों को लगातार निशाना बनाया जा रहा है, जिससे वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति श्रृंखला और देशों की सुरक्षा पर असर पड़ा है। हाल ही में यमन के हूती विद्रोहियों ने सऊदी अरब के 2 तेल टैंकरों पर हमला किया है। हूती विद्रोहियों ने चेतावनी दी है कि लाल सागर और गल्फ ऑफ अडेन को जोड़ने वाली बाब अल-मंदेब स्ट्रेट अब सऊदी अरब के जहाजों के लिए पूरी तरह बंद है। दूसरी तरफ स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज में भी ईरान और अमेरिका के बीच जारी सैन्य झड़पों के कारण जहाजों की आवाजाही जोखिम भरी हो गई है, जिससे एक बड़ा वैश्विक संकट खड़ा हो गया है।

अमेरिकी सेना का सैन्य अभियान

तनाव को कम करने या ईरान पर दबाव बनाने के लिए अमेरिकी सेना भी सक्रिय है। आधिकारिक जानकारी के अनुसार, अमेरिकी सेना ने गुरुवार को ईरान के सैन्य ठिकानों पर फिर से हमले तेज कर दिए हैं। यह हमले लगातार 13वीं रात भी जारी रहे। अमेरिकी सैन्य नेतृत्व का कहना है कि इन ऑपरेशनों का मुख्य उद्देश्य ईरान को उसकी हरकतों के लिए जवाबदेह बनाना है। साथ ही, इन हमलों का मकसद इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स की ओर से वैश्विक कमर्शियल शिपिंग के लिए उत्पन्न हो रहे खतरों को नियंत्रित करना और उन्हें कम करना है।

करण मल्होत्रा पाबना के अंतरराष्ट्रीय संवाददाता हैं, जो अमेरिका, यूरोप और एशिया की खबरें रिपोर्ट करते हैं। वैश्विक राजनीति, अर्थव्यवस्था और बड़े अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रमों पर वे नजर रखते हैं। उनकी रिपोर्ट्स दुनिया की हलचल को पाठकों तक तेजी से पहुंचाती हैं।

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