पेपर लीक करने वालों की खैर नहीं, देशभर में लागू हुआ 10 साल की सजा और करोड़ों के जुर्माने वाला सख्त कानून राष्ट्रीय राजनीति एक घंटा पहले 4
देश में भर्ती परीक्षाओं में होने वाली धांधली को रोकने के लिए केंद्र सरकार का नया सख्त कानून 1 अगस्त 2026 से प्रभावी हो गया है। इस कानून के तहत दोषियों को अब भारी जुर्माने के साथ लंबी जेल की सजा भुगतनी होगी।

नया कानून देशभर में प्रभावी

देशभर में परीक्षाओं की शुचिता बनाए रखने और पेपर लीक माफियाओं पर नकेल कसने के लिए केंद्र सरकार ने अपना वादा पूरा कर दिया है। द पब्लिक एग्जामिनेशन प्रिवेंशन आफ अनफेयर मींस अमेंडमेंट ऐक्ट 2026 अब पूरे देश में लागू हो गया है। कानून मंत्रालय ने 31 जुलाई 2026 को इसका आधिकारिक गजट नोटिफिकेशन जारी कर दिया है। यह कानून लोकसभा और राज्यसभा से पारित होने के बाद राष्ट्रपति की स्वीकृति मिलने के साथ ही कानूनी रूप से अस्तित्व में आ गया है। इस कदम को युवाओं के भविष्य को सुरक्षित करने की दिशा में एक बड़ा बदलाव माना जा रहा है।

सजा का प्रावधान और भारी जुर्माना

नए कानून के तहत पेपर लीक जैसी गतिविधियों में शामिल लोगों को पहले की तुलना में कहीं अधिक गंभीर परिणामों का सामना करना पड़ेगा। पूर्व में जो सजा तीन से पांच साल की होती थी, उसे अब बढ़ाकर पांच से दस साल तक की जेल में तब्दील कर दिया गया है। आर्थिक दंड के प्रावधानों को भी काफी कड़ा किया गया है।

  • दोषी पाए जाने पर पचास लाख रुपये तक का जुर्माना लगाया जाएगा।
  • अगर कोई सर्विस प्रोवाइडर परीक्षा प्रक्रिया में धांधली या पेपर लीक में लिप्त पाया जाता है, तो उस पर पांच करोड़ रुपये तक का भारी जुर्माना लगाया जा सकेगा।
  • संगठित अपराध के तहत शामिल गिरोहों पर सात साल की जेल और दस करोड़ रुपये तक का जुर्माना लगाया जाएगा।

जांच और अदालती प्रक्रिया में तेजी

इस कानून की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि यह मामलों को लंबे समय तक खिंचने से रोकने के लिए समय सीमा निर्धारित करता है। जांच एजेंसियों और न्यायिक प्रक्रिया को चुस्त बनाने के लिए इसमें स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं:

स्पेशल टास्क फोर्स को अपनी जांच की प्रक्रिया दो महीने के भीतर पूरी करनी अनिवार्य होगी। इसके अलावा, प्रत्येक राज्य में स्पेशल फास्ट ट्रैक कोर्ट का गठन किया जाएगा ताकि इन मामलों की सुनवाई में देरी न हो। नई व्यवस्था के अनुसार, चार्जशीट दाखिल होने के बाद अदालतों को तीन महीने के भीतर अपना ट्रायल पूरा करना होगा।

अपील के लिए कड़े नियम

न्यायिक प्रक्रिया को त्वरित बनाने के साथ ही इसमें अपील की व्यवस्था को भी सीमित किया गया है। स्पेशल फास्ट ट्रैक कोर्ट के फैसलों को चुनौती देने के लिए केवल हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया जा सकेगा। इसके साथ ही, अपील दायर करने के लिए तीस दिन की समय सीमा तय कर दी गई है।

विपक्ष का रुख

सरकार द्वारा उठाए गए इस कदम का युवाओं ने लंबे समय से इंतजार किया था। हालांकि, राजनीतिक गलियारों में इस कानून को लेकर बहस छिड़ गई है। विपक्ष ने सरकार की मंशा पर सवाल खड़े करते हुए आरोप लगाया है कि सरकार असली मुद्दों से लोगों का ध्यान हटाने की कोशिश कर रही है। इन तमाम राजनीतिक विवादों के बीच, सरकार का तर्क है कि यह कानून पेपर लीक करने वाले माफियाओं के मन में डर पैदा करेगा और पारदर्शी परीक्षा प्रणाली सुनिश्चित करेगा।

देवेंद्र पांडेय पाबना के राजनीतिक संवाददाता हैं और राष्ट्रीय राजनीति, सरकार तथा नीतियों पर रिपोर्टिंग करते हैं। चुनाव, संसद और बड़े सियासी घटनाक्रमों का वे गहराई से विश्लेषण करते हैं। उनकी रिपोर्टिंग निष्पक्ष और तथ्यों पर आधारित होती है।

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