पीएम मोदी की कैबिनेट में बड़े बदलाव की तैयारी, जानिए कौन होगा बाहर और किसे मिलेगी जगह राष्ट्रीय राजनीति एक महीने पहले 74
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की कैबिनेट में फेरबदल की चर्चाएं जोरों पर हैं, जिसमें कुछ वरिष्ठ नेताओं को संगठन की जिम्मेदारी मिल सकती है तो वहीं दलबदलुओं के शामिल होने के कयास लगाए जा रहे हैं।

कैबिनेट में फेरबदल की सुगबुगाहट

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मंत्रिमंडल में जल्द ही बड़े बदलाव देखने को मिल सकते हैं। पिछले कुछ समय से दिल्ली के गलियारों में कैबिनेट रीशफल को लेकर चर्चाएं गर्म थीं, लेकिन हाल ही में जॉर्ज कुरियन के इस्तीफे और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की राष्ट्रपति से हुई मुलाकात के बाद इन अटकलों ने और अधिक जोर पकड़ लिया है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि प्रधानमंत्री मोदी अपने कार्यशैली के अनुरूप आखिरी समय तक रणनीतिक गोपनीयता बनाए रखने में माहिर हैं, जिसके चलते कैबिनेट में बदलाव की सही तारीख को लेकर फिलहाल संशय बना हुआ है।

संभावित तारीखों पर मंथन

सूत्रों के अनुसार, कैबिनेट में फेरबदल को लेकर मुख्य रूप से दो समयसीमाओं पर विचार किया जा रहा है। पहली संभावना 28 या 29 जून की है, जबकि दूसरी संभावना मानसून सत्र के बाद की जताई जा रही है। ज्ञात हो कि मानसून सत्र 21 जुलाई से शुरू होकर 21 अगस्त तक चलेगा। ऐसी स्थिति में 21 अगस्त के बाद कैबिनेट में बड़े फेरबदल होने की प्रबल संभावना है। यह स्पष्ट है कि प्रधानमंत्री मोदी का निर्णय ही अंतिम होगा और उनके स्टाइल को देखते हुए किसी भी क्षण बड़े फैसले लिए जा सकते हैं।

कौन हो सकता है कैबिनेट का नया चेहरा

राजनीतिक हलकों में इस बात पर काफी मंथन चल रहा है कि किन नेताओं को नई जिम्मेदारी सौंपी जा सकती है और किनका पत्ता कट सकता है। चर्चाओं के अनुसार कुछ मुख्य नाम इस प्रकार हैं:

  • उद्धव गुट और टीएमसी (TMC) का साथ छोड़कर आने वाले सांसदों को इनाम के तौर पर मंत्रिमंडल में जगह दी जा सकती है।
  • विशेष रूप से उद्धव गुट से आए संजय दीना पाटिल को कैबिनेट में शामिल किए जाने की संभावना है।
  • एकनाथ शिंदे के पुत्र श्रीकांत शिंदे को कैबिनेट रैंक दिए जाने की चर्चाएं भी काफी तेज हैं।
  • तृणमूल कांग्रेस (TMC) से आए काकोली घोष, सुदीप बंदोपाध्याय और शताब्दी रॉय में से किसी एक को कैबिनेट में मौका मिल सकता है।

किसे दी जा सकती है संगठन की जिम्मेदारी

कैबिनेट में युवा चेहरों को लाने की कवायद के तहत कुछ वरिष्ठ और मौजूदा केंद्रीय मंत्रियों को संगठन में वापस भेजा जा सकता है। इसमें प्रमुख नाम शामिल हैं:

  • उत्तर प्रदेश बीजेपी अध्यक्ष और केंद्रीय मंत्री पंकज चौधरी को सरकार से हटाकर संगठन का कार्य सौंपा जा सकता है, जिसके बाद उनके स्थान पर किसी नए चेहरे को मंत्री बनाया जा सकता है।
  • दिल्ली बीजेपी अध्यक्ष और केंद्रीय मंत्री हर्ष मल्होत्रा को भी संगठन की जिम्मेदारी दी जा सकती है और उनकी जगह पर नया मंत्री नियुक्त किया जा सकता है।
  • इनके अलावा सरकार के कई अन्य वरिष्ठ मंत्रियों के विभाग बदले जा सकते हैं या उन्हें संगठन में सेवा देने के लिए कहा जा सकता है।

धर्मेंद्र प्रधान की चर्चा

कैबिनेट बदलाव की इन चर्चाओं के बीच प्रधानमंत्री मोदी द्वारा केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को दी गई जन्मदिन की बधाई ने सभी का ध्यान खींचा है। 25 जून को धर्मेंद्र प्रधान का जन्मदिन था, जिस पर प्रधानमंत्री ने नेशनल एजुकेशन पॉलिसी को प्रभावी ढंग से लागू करने के लिए उनकी सराहना की। यह बधाई इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि पेपर लीक के मामलों को लेकर विपक्ष लगातार धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा मांग रहा है। इंडी गठबंधन से लेकर अन्य विपक्षी दलों के तीखे हमलों के बीच प्रधानमंत्री की यह सार्वजनिक प्रशंसा कई राजनीतिक संकेत दे रही है और इसे प्रधान के प्रति हाईकमान के भरोसे के रूप में देखा जा रहा है।

देवेंद्र पांडेय पाबना के राजनीतिक संवाददाता हैं और राष्ट्रीय राजनीति, सरकार तथा नीतियों पर रिपोर्टिंग करते हैं। चुनाव, संसद और बड़े सियासी घटनाक्रमों का वे गहराई से विश्लेषण करते हैं। उनकी रिपोर्टिंग निष्पक्ष और तथ्यों पर आधारित होती है।

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