चांदी की पायल, बिछिया और अंगूठी को चुटकियों में चमकाएं, अपनाएं ये आसान घरेलू नुस्खे जीवनशैली एक महीने पहले 54
लगातार इस्तेमाल और पसीने से चांदी के गहने काले पड़ जाते हैं। एल्युमिनियम फॉयल, टूथपेस्ट और सिरके-बेकिंग सोडा जैसे आसान घरेलू उपायों से आप इन्हें मिनटों में दोबारा चमका सकते हैं।

नई चांदी देखने में बेहद साफ, सफेद और चमकदार लगती है, लेकिन जैसे-जैसे इसका इस्तेमाल बढ़ता है, इसका रंग धीरे-धीरे काला पड़ने लगता है। महिलाओं के पैरों में पहनी जाने वाली पायल और बिछिया अक्सर काली दिखने लगती हैं और कई बार उंगली में पहनी चांदी की अंगूठी भी पूरी तरह काली नजर आने लगती है। पसीना, धूल-मिट्टी, चिकनाई या साबुन जैसी चीजें चांदी की चमक छीन लेती हैं, वहीं खारा पानी भी इसकी चमक को फीका कर देता है और गहने काले पड़ जाते हैं।

ऐसे में जरूरी है कि समय-समय पर चांदी की सफाई करते रहें। अच्छी तरह साफ की गई चांदी जल्दी काली नहीं पड़ती। खास बात यह है कि इसे चमकाने के लिए ज्यादा मेहनत की भी जरूरत नहीं पड़ती। कुछ बेहद आसान घरेलू तरीकों से आप अपनी चांदी को दोबारा चमका सकते हैं।

चांदी की पायल, बिछिया और अंगूठी साफ करने के आसान उपाय

एल्युमिनियम फॉयल

एक बाउल लें और उसमें एल्युमिनियम फॉयल बिछा दें। अब इसमें बेकिंग सोडा और नमक डालें और ऊपर से गर्म पानी मिला दें। इसके बाद अपनी चांदी की पायल, बिछिया और दूसरे गहने इसमें इस तरह डालें कि वे फॉयल को छूते रहें। करीब 10 मिनट बाद इन्हें रगड़ें, फिर साफ पानी से धोकर कपड़े से पोंछ लें।

टूथपेस्ट

चांदी की सफाई में टूथपेस्ट भी काफी असरदार रहता है। इसके लिए किसी नॉन-जेल टूथपेस्ट को गहनों पर लगाकर थोड़ी देर के लिए छोड़ दें। आप चाहें तो सफेद टूथपाउडर का भी इस्तेमाल कर सकते हैं। इसे चांदी पर रगड़ें और किसी पुराने टूथब्रश से हल्के हाथों से साफ करें, फिर पानी से धो लें। इससे चांदी फिर से चमकने लगेगी।

सिरका और बेकिंग सोडा

काली पड़ चुकी पायल और बिछिया को साफ करने के लिए सिरका और बेकिंग सोडा का इस्तेमाल किया जा सकता है। इसके लिए 1 कप सिरका में 1 चम्मच बेकिंग सोडा मिलाएं। इस घोल में पायल और बिछिया डालकर कुछ देर के लिए छोड़ दें। थोड़ी देर बाद ब्रश की मदद से इन्हें साफ करें और सूखे कपड़े से पोंछ लें।

प्रिया नायर पाबना की लाइफस्टाइल एवं फैशन एडिटर हैं, जो फैशन, ब्यूटी और लाइफस्टाइल ट्रेंड्स कवर करती हैं। रिश्तों, संस्कृति और रोजमर्रा की जिंदगी से जुड़े विषयों पर भी वे लिखती हैं। उनका लेखन आधुनिक और भारतीय जीवनशैली का संतुलन पेश करता है।

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