उत्तर प्रदेश
एक घंटा पहले
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नवजातों की जीवन रक्षा के लिए नया प्रयास
अमेठी जिले में नवजात शिशुओं, विशेषकर समय से पहले जन्मे और कम वजन वाले बच्चों के स्वास्थ्य को लेकर प्रशासन ने एक बेहद संवेदनशील और प्रभावी कदम उठाया है। अब इन शिशुओं को एक सुरक्षित जीवन देने के लिए 'कंगारू मदर केयर' की सुविधा को और अधिक सुलभ बनाया जा रहा है। बच्चों की बेहतर देखभाल के लिए उच्च स्तरीय सुविधाओं की आवश्यकता होती है, जो हर जगह आसानी से उपलब्ध नहीं हो पाती। इसी कमी को दूर करने के लिए स्वास्थ्य विभाग ने यह पहल शुरू की है, जो न केवल बच्चों के लिए सुरक्षा कवच साबित होगी, बल्कि माताओं के लिए भी राहत लेकर आएगी।
घर-घर पहुंचेगी देखभाल की सुविधा
अमेठी में पहले से ही जिले के सभी 13 ब्लॉकों में स्थित सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों पर कंगारू मदर केयर सेंटर संचालित किए जा रहे थे। इन केंद्रों पर चार-चार बेड की व्यवस्था पहले से मौजूद थी। हालांकि, अब तक की व्यवस्था में एक बड़ी चुनौती यह थी कि माताओं को अपने नवजात की नियमित निगरानी और जांच के लिए अस्पताल में ही लंबे समय तक भर्ती रहना पड़ता था। अब इस प्रक्रिया में बड़ा बदलाव किया गया है। स्वास्थ्य विभाग की नई रणनीति के तहत, अब महिलाओं को अस्पताल में रुकने की अनिवार्यता से मुक्ति मिलेगी और उन्हें उनके घर पर ही जाकर नवजात की देखभाल और स्वास्थ्य परामर्श प्रदान किया जाएगा।
मृत्यु दर कम करने पर है जोर
इस पूरी पहल का मुख्य केंद्र बिंदु नवजात शिशुओं की मृत्यु दर में गिरावट लाना है। जिले के मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉक्टर अंशुमान सिंह ने इस योजना के महत्व पर विस्तार से प्रकाश डाला है। उन्होंने स्पष्ट किया कि अस्पताल से डिस्चार्ज होने के बाद भी कई बार समय से पूर्व जन्मे बच्चों को विशेष देखरेख की जरूरत होती है। अब यह नई व्यवस्था सुनिश्चित करेगी कि ऐसे शिशुओं को घर पर ही बेहतर निगरानी मिले। इससे बच्चों का शारीरिक विकास भी सही तरीके से हो सकेगा और स्वास्थ्य विभाग की समुदाय आधारित सेवाएं और भी अधिक सशक्त बनेंगी।
स्वास्थ्य सेवाओं को मिल रही मजबूती
यह पहल न केवल नवजात शिशुओं की जान बचाने के लिए है, बल्कि यह माताओं के मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य को भी ध्यान में रखती है। घर पर उपचार और परामर्श मिलने से महिलाओं को अस्पताल के चक्कर काटने से छुटकारा मिलेगा। अमेठी स्वास्थ्य विभाग का यह प्रयास ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में बच्चों की सेहत सुधारने की दिशा में मील का पत्थर साबित हो सकता है। आने वाले समय में इस व्यवस्था से न केवल नवजातों की मृत्यु दर में उल्लेखनीय कमी आने की उम्मीद है, बल्कि यह जिले में एक आदर्श स्वास्थ्य ढांचा तैयार करने में भी मददगार साबित होगी।
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