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58 मिनट पहले
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ईरान की अपील पर थमे कदम
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने हाल ही में ईरान के खिलाफ जारी सैन्य अभियानों के अचानक थमने के पीछे की असली वजह उजागर की है। एयर फोर्स वन में मीडिया से मुखातिब होते हुए ट्रंप ने दावा किया कि तेहरान ने खुद अमेरिका से अनुरोध किया था कि सैन्य कार्रवाई बंद की जाए और बातचीत का रास्ता निकाला जाए। ट्रंप के अनुसार, ईरान ने बहुत विनम्रता से कहा कि वे युद्ध को विराम देना चाहते हैं और वार्ता के लिए तैयार हैं।
बातचीत का विकल्प और भविष्य की रणनीति
अमेरिकी राष्ट्रपति ने स्पष्ट किया है कि फिलहाल कार्रवाई रोकी गई है, लेकिन यह कोई अंतिम फैसला नहीं है। उन्होंने कहा कि अगर दोनों देशों के बीच किसी प्रकार का ठोस समझौता नहीं हो पाता है, तो अमेरिका अपनी पुरानी रणनीति पर लौटने में तनिक भी संकोच नहीं करेगा। ट्रंप का मानना है कि ईरान के इस रुख के पीछे अमेरिका द्वारा किए गए कड़े सैन्य हमले हैं, जिन्होंने तेहरान को सोचने पर मजबूर कर दिया है। उन्होंने यह भी कहा कि अगर ईरान कमजोर नहीं होता, तो वे कभी भी बातचीत के लिए आगे नहीं आता।
सैन्य और कूटनीतिक दबाव
हालांकि, मामले की बारीकी से पड़ताल करने वाली मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, यह फैसला केवल कूटनीति का परिणाम नहीं है। सैन्य विशेषज्ञों और वरिष्ठ अमेरिकी नेताओं का मानना है कि युद्ध के लंबे खिंचने का जोखिम, हथियारों के सीमित होते भंडार और क्षेत्रीय अस्थिरता ने भी इस निर्णय में बड़ी भूमिका निभाई है। इस संबंध में उपराष्ट्रपति जेडी वेंस और जॉइंट चीफ्स ऑफ स्टाफ के चेयरमैन जनरल डैन कैन ने भी गंभीर चिंताएं जताई थीं।
सेंटकॉम कमांडर की सलाह
सैन्य सूत्रों के मुताबिक, अमेरिकी सेंट्रल कमांड के प्रमुख एडमिरल ब्रैड कूपर ने भी प्रशासन को यह सलाह दी थी कि हॉर्मुज जलडमरूमध्य के आसपास चल रही बमबारी को रोक दिया जाए। उन्होंने तर्क दिया था कि अब इस सैन्य कार्रवाई से कोई विशेष रणनीतिक लाभ नहीं मिल रहा है। एडमिरल की इस राय को राष्ट्रपति ट्रंप के निर्णय को प्रभावित करने वाला एक महत्वपूर्ण कारक माना जा रहा है।
हथियारों की स्थिति और ट्रंप का दावा
अपनी सैन्य तैयारियों पर बात करते हुए ट्रंप ने कहा कि अमेरिका के पास हथियारों और मिसाइलों का पर्याप्त जखीरा मौजूद है। उन्होंने विशेष रूप से पैट्रियट मिसाइल सिस्टम का जिक्र करते हुए दावा किया कि इसका उत्पादन युद्धस्तर पर तेज किया जा रहा है। ट्रंप के अनुसार, अमेरिका अपनी रक्षा क्षमताओं को निरंतर आधुनिक और मजबूत बना रहा है ताकि किसी भी संभावित खतरे का मुंहतोड़ जवाब दिया जा सके।
ईरान का पक्ष और विरोधाभास
इस पूरे मामले में सबसे बड़ा मोड़ तब आया जब ईरान के विदेश मंत्रालय ने ट्रंप के दावों को सिरे से खारिज कर दिया। ईरान ने अपने आधिकारिक बयान में कहा कि अमेरिका के साथ किसी भी प्रकार की बातचीत नहीं चल रही है। दोनों देशों के बयानों में दिख रहा यह बड़ा विरोधाभास अंतरराष्ट्रीय समुदाय के लिए चिंता का विषय बना हुआ है। अब पूरी दुनिया की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि क्या यह तनाव बातचीत की मेज पर समाप्त होगा या फिर हॉर्मुज क्षेत्र में एक बार फिर सैन्य टकराव का सिलसिला शुरू हो जाएगा।
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