अमेरिकी नौसेना का बड़ा संकट: साउथ चाइना सी में 4 दिनों तक बिना बिजली और पानी फंसा रहा युद्धपोत विश्व 3 घंटे पहले 6
अमेरिकी नौसेना के एक गाइडेड-मिसाइल विध्वंसक युद्धपोत यूएसएस बेनफोल्ड में तकनीकी खराबी के चलते बिजली आपूर्ति ठप हो गई, जिससे चालक दल को भीषण गर्मी में चार दिनों तक भारी कठिनाइयों का सामना करना पड़ा।

साउथ चाइना सी में अमेरिकी युद्धपोत पर मंडराया संकट

दुनिया भर में अपनी सैन्य ताकत का लोहा मनवाने वाली अमेरिकी नौसेना को हाल ही में एक बेहद शर्मनाक और चुनौतीपूर्ण स्थिति का सामना करना पड़ा। साउथ चाइना सी के भीषण गर्मी वाले इलाके में अमेरिकी नौसेना का एक शक्तिशाली युद्धपोत चार दिनों तक पूरी तरह से बिजली, शौचालय की सुविधाओं, एयर कंडीशनिंग और पीने के पानी की किल्लत से जूझता रहा। यह घटना आर्ले बर्क-क्लास के मिसाइल विध्वंसक पोत यूएसएस बेनफोल्ड पर घटी, जब इसके जनरेटरों में गंभीर तकनीकी खराबी आ गई।

बिजली गुल होने से ठप हुई जहाज की लाइफलाइन

इस युद्धपोत पर जो स्थिति पैदा हुई, उस पर यकीन करना मुश्किल है। बिजली चले जाने के कारण न केवल जहाज का एयर कंडीशनिंग सिस्टम बंद हो गया, बल्कि शौचालय जैसी मूलभूत सुविधाएं भी काम करना बंद कर गईं। इसके अलावा जहाज की रसोई में चूल्हे नहीं जल सके और पीने के पानी की व्यवस्था चरमरा गई। 24 जुलाई को जब यूएसएस बेनफोल्ड हिंद-प्रशांत क्षेत्र में अपने नियमित अभियान पर था, तभी इसके जनरेटर ने जवाब दे दिया।

बिजली जाते ही न सिर्फ जहाज के जरूरी सिस्टम बंद हुए, बल्कि उसकी आगे बढ़ने की गतिशीलता पर भी बुरा असर पड़ा। उस दौरान साउथ चाइना सी का तापमान 32 से 37 डिग्री सेल्सियस के बीच बना हुआ था, जिसने सैनिकों के लिए स्थिति को और भी नारकीय बना दिया।

सैनिकों का धैर्य और कठिन चुनौतियां

अमेरिकी नौसेना के आधिकारिक बयान के अनुसार, इस दुर्भाग्यपूर्ण घटना में किसी भी सैनिक को कोई शारीरिक चोट नहीं आई। नौसेना ने अपने चालक दल के साहस और विपरीत परिस्थितियों में उनके संयम की सराहना की है। हालांकि, नौसेना के एक पूर्व अधिकारी का मानना है कि ऐसी स्थिति सैनिकों के लिए मानसिक रूप से अत्यंत तनावपूर्ण होती है।

सीएनएन से बात करते हुए पूर्व नौसेना कैप्टन कार्ल शुस्टर ने बताया कि उन्होंने स्वयं एक बार चार घंटे तक बिना बिजली के युद्धपोत पर बिताए थे, लेकिन चार दिनों तक ऐसी स्थिति में रहना कहीं अधिक चुनौतीपूर्ण और तनाव देने वाला है। जहाज के कमांडर और ऑपरेशन अधिकारियों के लिए भोजन, स्वास्थ्य, सुरक्षा और मौसम की मार के बीच सैनिकों का मनोबल बनाए रखना सबसे बड़ी परीक्षा बन गया था।

दूसरे युद्धपोतों ने बढ़ाई मदद

संकट की इस घड़ी में बेनफोल्ड के सैनिकों के लिए दूसरे युद्धपोतों ने राहत का काम किया। यूएसएस रॉबर्ट स्मॉल्स ने बेनफोल्ड तक पका हुआ भोजन पहुंचाया। इसके अलावा जॉर्ज वॉशिंगटन कैरियर स्ट्राइक ग्रुप में शामिल अन्य जहाजों ने भी हर संभव सहायता प्रदान की। अंततः, तकनीकी खराबी से जूझ रहे इस युद्धपोत को खींचकर फिलीपींस के सुबिक बे ले जाया गया। वहां युद्धस्तर पर मरम्मत करने के बाद यह युद्धपोत 8 अगस्त तक पुनः सेवा में वापस लौट सका।

अमेरिकी नौसेना पर क्यों बढ़ा दबाव

यह घटना ऐसे समय में हुई है जब अमेरिकी नौसेना पहले से ही भारी दबाव का सामना कर रही है। ईरान के खिलाफ चल रहे सैन्य अभियानों ने बेड़े और सैनिकों की ऊर्जा को अत्यधिक खपा दिया है। दुनिया के अलग-अलग कोनों में लगातार मौजूदगी बनाए रखने की अनिवार्यता ने युद्धपोतों के रखरखाव को कठिन बना दिया है। इससे पहले यूएसएस अब्राहम लिंकन को भी लंबे समय तक समुद्र में रहना पड़ा था, जिसके बाद सैनिकों के मानसिक स्वास्थ्य और मनोबल को लेकर चिंताएं जताई गई थीं।

प्रशांत क्षेत्र में दूसरी बार ऐसी घटना

यह प्रशांत क्षेत्र में अमेरिकी नौसेना के युद्धपोत के बिजली खोने का दूसरा मामला है। इससे पहले मई महीने में यूएसएस हिगिंस की बिजली और इंजन प्रणाली भी कई घंटों के लिए ठप हो गई थी। नौसेना ने इसे इंजीनियरिंग से जुड़ी एक गंभीर खराबी माना था। गौरतलब है कि बेनफोल्ड और हिगिंस दोनों आर्ले बर्क क्लास के गाइडेड-मिसाइल विध्वंसक हैं, जिन्हें अमेरिकी नौसेना की रीढ़ माना जाता है। ऐसे करीब 70 से अधिक युद्धपोत अमेरिकी नौसेना के बेड़े में तैनात हैं। इन युद्धपोतों की लंबाई लगभग 500 फीट है, वजन करीब 10 हजार टन है और इन पर सामान्यतः 329 से 359 सैनिक तैनात रहते हैं।

करण मल्होत्रा पाबना के अंतरराष्ट्रीय संवाददाता हैं, जो अमेरिका, यूरोप और एशिया की खबरें रिपोर्ट करते हैं। वैश्विक राजनीति, अर्थव्यवस्था और बड़े अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रमों पर वे नजर रखते हैं। उनकी रिपोर्ट्स दुनिया की हलचल को पाठकों तक तेजी से पहुंचाती हैं।

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