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एक घंटा पहले
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भारत और अमेरिका के बीच रणनीतिक साझेदारी का नया अध्याय
भारत और अमेरिका के बीच आर्थिक और कूटनीतिक रिश्ते इस समय अपनी ऐतिहासिक ऊंचाई पर हैं। अटलांटा में एक महत्वपूर्ण चर्चा के दौरान अमेरिका में भारत के राजदूत सर्जियो गोर ने स्पष्ट किया है कि दोनों देश एक बड़े व्यापार समझौते को अंतिम रूप देने के काफी करीब पहुंच चुके हैं। गोर के मुताबिक, दोनों देशों के बीच फार्मास्यूटिकल्स, सूचना प्रौद्योगिकी, रक्षा और व्यापार के क्षेत्र में अभूतपूर्व तालमेल देखने को मिल रहा है।
अमेरिकी प्रशासन के शीर्ष अधिकारियों का भारत के साथ संवाद लगातार गहरा होता जा रहा है। इसी क्रम में सेक्रेटरी रूबियो के दौरों का जिक्र करते हुए राजदूत गोर ने बताया कि रूबियो पिछले छह महीने में दो बार भारत की यात्रा कर चुके हैं और आगामी वर्ष में उनके एक बार फिर भारत आने की प्रबल संभावना है। यह निरंतर संवाद दोनों देशों के भविष्य के संबंधों के लिए बेहद सकारात्मक संकेत माना जा रहा है।
ट्रेड डील पर राजदूत सर्जियो गोर का भरोसा
व्यापार समझौते के सवाल पर राजदूत सर्जियो गोर ने उत्साहजनक रुख अपनाया है। उन्होंने कहा कि व्यापारिक करार अपनी अंतिम रेखा के बेहद करीब है और दोनों देशों की टीमें लगातार काम कर रही हैं ताकि सभी अड़चनों को समय रहते दूर किया जा सके। गोर ने यूरोपीय यूनियन और भारत के बीच हुए व्यापारिक समझौते का उदाहरण देते हुए कहा कि उस प्रक्रिया को पूरा होने में लगभग 20 साल का लंबा समय लग गया था।
इसके विपरीत, भारत और अमेरिका के बीच व्यापारिक बातचीत शुरू हुए अभी केवल एक साल से थोड़ा ही अधिक समय बीता है। गोर ने विश्वास व्यक्त करते हुए कहा कि हमारे पास पर्याप्त समय है और जिस गति से काम चल रहा है, उससे स्पष्ट है कि इस डील को जल्द ही अंतिम मुकाम तक पहुंचा लिया जाएगा। दोनों देशों के प्रतिनिधिमंडल व्यापारिक जटिलताओं को सुलझाने में पूरी तत्परता दिखा रहे हैं।
रक्षा क्षेत्र में आपसी सहयोग की नई ऊंचाइयां
रक्षा साझेदारी पर प्रकाश डालते हुए सर्जियो गोर ने कहा कि भारत और अमेरिका के बीच सामरिक रिश्ते अद्वितीय हैं। उन्होंने जोर देकर कहा कि भारत दुनिया के किसी भी अन्य देश की तुलना में अमेरिका के साथ सबसे अधिक सैन्य अभ्यास करता है। हाल ही में संपन्न हुए युद्ध अभ्यास में अमेरिका के लगभग 500 सैनिकों ने सक्रिय भागीदारी निभाई थी।
इसके अलावा, वायुसेना के बहुचर्चित तरंग शक्ति अभ्यास में भी दोनों देशों ने आपसी तालमेल का शानदार प्रदर्शन किया। इस अभ्यास की सबसे बड़ी विशेषता दुनिया के सबसे आधुनिक माने जाने वाले F-35 लड़ाकू विमानों का शामिल होना था। राजदूत गोर ने एक और महत्वपूर्ण जानकारी साझा करते हुए बताया कि अगले महीने एक और बड़ा सैन्य अभ्यास प्रस्तावित है, जो दोनों देशों की सेनाओं के बीच इंटरऑपरेबिलिटी यानी एक दूसरे के सिस्टम के साथ काम करने की क्षमता को नई धार देगा।
जी20 मियामी समिट और क्वाड की अहमियत
क्वाड गठबंधन की भूमिका पर बात करते हुए सर्जियो गोर ने इसे अमेरिका की प्राथमिकताओं में सबसे ऊपर बताया। भारत, अमेरिका, जापान और ऑस्ट्रेलिया के बीच नियमित संवाद न केवल जरूरी है, बल्कि यह वैश्विक स्थिरता के लिए भी अनिवार्य है। उन्होंने बताया कि इस वर्ष मंत्रिस्तरीय स्तर पर यह तीसरी बड़ी बैठक है। पहली बैठक दिल्ली में आयोजित हुई थी, जबकि दूसरी बैठक मनीला में संपन्न हुई थी। अब अटलांटा में हुई इस तीसरी बैठक ने रणनीतिक रिश्तों को और मजबूत किया है।
आगामी जी20 मियामी समिट की तैयारियों के बारे में पूछे जाने पर गोर ने कहा कि नेताओं के बीच शीर्ष स्तर पर जुड़ाव बनाए रखना हमारी प्राथमिकता है। सेक्रेटरी रूबियो के हालिया दौरों में कमर्शियल डिप्लोमेसी और ऊर्जा सुरक्षा पर विशेष ध्यान दिया गया था। उन्होंने कहा कि मियामी समिट से पहले दोनों देश पर्दे के पीछे रहकर कई महत्वपूर्ण और बड़े परिणामों को अंतिम रूप देने के लिए तेजी से जुट गए हैं। शनिवार, 31 अक्टूबर को हुई चारों देशों के विदेश मंत्रियों की बैठक इस दिशा में एक बड़ा कदम मानी जा रही है।
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