ईरान युद्ध के बीच ट्रंप को मिली जीवनदान, महज 2 वोटों के अंतर से टला बड़ा राजनीतिक संकट विश्व एक घंटा पहले 2
अमेरिकी संसद में राष्ट्रपति ट्रंप के ईरान विरोधी युद्ध अधिकारों को चुनौती देने वाला प्रस्ताव सीनेट में केवल 2 वोटों के अंतर से गिर गया, जिससे ट्रंप की युद्ध नीति को फिलहाल बड़ी राहत मिली है।

ईरान-अमेरिका के बीच जारी 146 दिनों का संघर्ष

अमेरिका और ईरान के बीच पिछले 146 दिनों से चल रही जंग को रोकने के लिए वॉशिंगटन स्थित अमेरिकी संसद के गलियारों में एक अभूतपूर्व और हाई वोल्टेज ड्रामा देखने को मिला है। निचले सदन यानी हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स में ट्रंप को उस समय करारा झटका लगा जब रिपब्लिकन पार्टी के ही 4 बागी सांसदों ने उनके खिलाफ मतदान किया, जिससे युद्ध अधिकारों पर लगाम लगाने का प्रस्ताव पारित हो गया। हालांकि, इसके बाद ऊपरी सदन यानी सीनेट में स्थिति बिल्कुल अलग रही और ट्रंप महज 2 वोटों के अंतर से अपनी युद्ध शक्तियों को बचा पाने में सफल रहे।

संसद में ट्रंप की शक्तियों पर ग्रहण

अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने ईरान के खिलाफ जिस संघर्ष को शुरुआत में एक छोटा सैन्य अभियान बताया था, वह अब 146 दिनों बाद भी थमता नजर नहीं आ रहा है। दोनों देशों के बीच जारी इस तनाव ने वैश्विक स्तर पर तेल संकट और अनिश्चितता का माहौल पैदा कर दिया है। इसी बीच, अमेरिकी कांग्रेस में वह स्थिति उत्पन्न हो गई थी जहां से युद्ध की पूरी दिशा बदल सकती थी। यदि वोटिंग का गणित थोड़ा और बिगड़ जाता, तो ट्रंप के हाथ से सैन्य संचालन की कमान निकल जाती और ईरान के साथ चल रहा यह युद्ध शायद हमेशा के लिए समाप्त हो जाता।

हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स में बागी सांसदों का खेल

अमेरिकी संविधान के अनुसार, राष्ट्रपति सेना के कमांडर-इन-चीफ तो होते हैं, लेकिन किसी भी देश के साथ पूर्ण युद्ध घोषित करने का कानूनी अधिकार केवल संसद के पास सुरक्षित है। ट्रंप ने बिना किसी संसदीय अनुमति के 28 फरवरी से ईरान पर हमले की शुरुआत की थी, जिससे अमेरिकी सांसद खासे नाराज थे। डेमोक्रेट सांसद प्रमिला जयपाल द्वारा पेश किए गए प्रस्ताव पर जब निचले सदन में मतदान हुआ, तो इसके पक्ष में 214 और विपक्ष में 208 वोट पड़े। 6 वोटों के इस अंतर से प्रस्ताव पास हो गया। सबसे बड़ी बात यह थी कि रिपब्लिकन पार्टी के 4 सांसदों ने अपनी ही पार्टी के खिलाफ जाकर विपक्षी डेमोक्रेट्स का साथ दिया।

  • टॉम बैरेट (मिशिगन): इन्होंने पार्टी लाइन से हटकर राष्ट्रपति की युद्ध नीतियों के खिलाफ मतदान किया।
  • ब्रायन फिट्जपैट्रिक (पेंसिल्वेनिया): सदन में बहुमत होने के बावजूद इन्होंने विपक्षी खेमे के साथ खड़ा होना बेहतर समझा।
  • वॉरेन डेविडसन (ओहियो): इन्होंने ट्रंप की ईरान नीति को चुनौती देते हुए प्रस्ताव के पक्ष में अपना वोट दिया।
  • थॉमस मैसी (केन्टकी): बागी सांसदों की सूची में शामिल होकर इन्होंने ट्रंप की रणनीतियों पर सवाल खड़े किए।

सीनेट में 2 वोटों से टला संकट

निचले सदन में हार मिलने के बाद सभी की निगाहें सीनेट पर टिकी थीं। यदि सीनेट में यह प्रस्ताव पास हो जाता, तो ट्रंप कानूनी रूप से चारों तरफ से घिर जाते और उन्हें ईरान से अपनी सेना वापस बुलानी पड़ती। सीनेट में प्रस्ताव को रोकने के लिए मतदान हुआ, जिसमें 49 वोट प्रस्ताव के खिलाफ यानी ट्रंप के समर्थन में पड़े, जबकि 47 वोट प्रस्ताव के पक्ष में पड़े। मैजिक नंबर केवल 2 का था। यदि 2 और सांसद प्रस्ताव के पक्ष में मतदान कर देते, तो मामला 49-49 से टाई हो जाता, जो ट्रंप के सैन्य अधिकारों पर ताला लगा सकता था। इस बेहद करीबी परिणाम ने ट्रंप की कुर्सी और उनकी युद्ध नीति दोनों को फिलहाल सुरक्षित कर लिया है।

क्रॉस-वोटिंग का दिखावा और राजनीतिक खींचतान

इस वोटिंग प्रक्रिया की सबसे रोचक बात दोनों दलों के बीच हुई क्रॉस-वोटिंग रही। रिपब्लिकन सीनेटर सुसान कॉलिन्स ने अपनी पार्टी के रुख के उलट ट्रंप के खिलाफ वोट दिया। वहीं, डेमोक्रेटिक पार्टी के सीनेटर जॉन फेटरमैन ने पार्टी से बगावत कर ट्रंप का समर्थन किया। इसके अलावा, रिपब्लिकन पार्टी के 4 सांसद सदन में उपस्थित ही नहीं थे, जिससे मुकाबला काफी रोमांचक और कांटे का हो गया था।

आगामी चुनाव और युद्ध का बोझ

वोटिंग के उपरांत सांसद प्रमिला जयपाल ने स्पष्ट कहा कि यह केवल पार्टी राजनीति का मुद्दा नहीं है, बल्कि देश की जनता इसे एक असंवैधानिक युद्ध मान रही है। अमेरिका में नवंबर में मिडटर्म चुनाव होने वाले हैं, जिसमें यह युद्ध एक बड़ा मुद्दा बन सकता है। ट्रंप ने जो वादा किया था कि ईरान कुछ ही समय में घुटने टेक देगा, वह अब एक अंतहीन दलदल में तब्दील हो चुका है। अमेरिकी सैनिकों की शहादत और तेल की बढ़ती कीमतों ने आम जनता में असंतोष की लहर पैदा कर दी है।

लाल सागर और युद्ध का विस्तार

संसद की वोटिंग के साथ ही मध्य पूर्व में बारूद का खेल भी जारी रहा। यमन के हूती विद्रोहियों ने लाल सागर में दो सऊदी तेल टैंकरों को निशाना बनाकर हमले किए हैं, जिससे समुद्री व्यापारिक रास्तों पर खतरा बढ़ गया है। इसके जवाब में ट्रंप ने ईरान और उनके सहयोगियों को कड़ी सैन्य सजा देने की चेतावनी दी है। सीजफायर वार्ता विफल होने के बाद अमेरिकी सेना ने ईरान पर हवाई हमले किए, जिसके प्रतिशोध में ईरान ने पड़ोसी देशों में स्थित अमेरिकी ठिकानों पर मिसाइलें दागी हैं। यह लगातार जारी हमले और जवाबी हमले क्षेत्र में स्थिति को और अधिक विस्फोटक बना रहे हैं।

करण मल्होत्रा पाबना के अंतरराष्ट्रीय संवाददाता हैं, जो अमेरिका, यूरोप और एशिया की खबरें रिपोर्ट करते हैं। वैश्विक राजनीति, अर्थव्यवस्था और बड़े अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रमों पर वे नजर रखते हैं। उनकी रिपोर्ट्स दुनिया की हलचल को पाठकों तक तेजी से पहुंचाती हैं।

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