डोनाल्ड ट्रंप के नए चीफ ऑफ स्टाफ बने स्टीफन मिलर, इमिग्रेशन नीतियों के मुख्य रणनीतिकार पर जताया भरोसा विश्व एक घंटा पहले 6
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपने सबसे करीबी और सख्त सलाहकारों में शुमार स्टीफन मिलर को व्हाइट हाउस का नया चीफ ऑफ स्टाफ नियुक्त किया है। यह नियुक्ति ऐसे समय में हुई है जब मिडटर्म चुनाव में रिपब्लिकन पार्टी को बड़ा झटका लगा है और ट्रंप अपनी कठोर नीतियों को और अधिक आक्रामक तरीके से लागू करने की तैयारी में हैं।

व्हाइट हाउस में बड़ा प्रशासनिक बदलाव

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपने प्रशासन में एक महत्वपूर्ण बदलाव करते हुए स्टीफन मिलर को व्हाइट हाउस का नया चीफ ऑफ स्टाफ नियुक्त करने की घोषणा की है। यह निर्णय तब लिया गया है जब मिडटर्म चुनावों के नतीजों में रिपब्लिकन पार्टी को करारी शिकस्त का सामना करना पड़ा है। 9 नवंबर, सोमवार से स्टीफन मिलर अपनी इस नई भूमिका की जिम्मेदारी संभालेंगे। वह सुसी वाइल्स का स्थान लेंगे, जो इस प्रतिष्ठित पद पर आसीन होने वाली इतिहास की पहली महिला थीं। ट्रंप का यह निर्णय स्पष्ट संदेश देता है कि चुनाव के झटके के बावजूद वे अपनी पुरानी नीतियों से पीछे हटने के बजाय उन्हें और अधिक मजबूती से आगे बढ़ाने की योजना बना रहे हैं।

स्टीफन मिलर: ट्रंप के भरोसेमंद सलाहकार

41 वर्षीय स्टीफन मिलर का जन्म कैलिफोर्निया के सांता मोनिका में हुआ था। उन्हें डोनाल्ड ट्रंप का सबसे वफादार और रणनीतिक सलाहकार माना जाता है। मिलर के राजनीतिक करियर की शुरुआत रिपब्लिकन पार्टी के नेताओं के सहयोगी के रूप में हुई थी, जिसमें पूर्व सीनेटर जेफ सेशंस का नाम प्रमुख है। 2017 में जब ट्रंप ने अपना पहला राष्ट्रपति कार्यकाल शुरू किया, तो उससे ठीक पहले मिलर उनके लिए भाषण लेखक के रूप में काम कर रहे थे। 2016 के चुनावी अभियान के समय से ही वे ट्रंप के आंतरिक घेरे में रहे हैं। मिलर को अक्सर ट्रंप का दिमाग कहा जाता है क्योंकि वे केवल एक सलाहकार नहीं हैं, बल्कि प्रशासन की कई विवादास्पद और प्रमुख नीतियों को आकार देने वाले मुख्य सूत्रधार रहे हैं। ट्रंप ने स्वयं अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल पर मिलर की नियुक्ति की घोषणा करते हुए उन्हें अपना सबसे भरोसेमंद साथी बताया है। ट्रंप का मानना है कि मिलर उनकी विचारधारा को गहराई से समझते हैं और वे लंबे समय से उनके विजन को धरातल पर उतारने में मदद कर रहे हैं।

सख्त इमिग्रेशन और विवादित नीतियां

स्टीफन मिलर की पहचान उनकी कठोर इमिग्रेशन नीतियों के लिए पूरी दुनिया में है। ट्रंप के पिछले कार्यकाल में कई मुस्लिम बहुल देशों के नागरिकों पर यात्रा प्रतिबंध लगाने की नीति को तैयार करने में उनकी भूमिका सबसे महत्वपूर्ण थी। इसके अलावा, अवैध रूप से अमेरिका में रह रहे लोगों को बड़े पैमाने पर देश से बाहर निकालने (डिपोर्टेशन) की योजना के वे प्रमुख रणनीतिकार हैं। मिलर ने अतीत में व्हाइट हाउस में होमलैंड सिक्योरिटी सलाहकार और डिप्टी चीफ ऑफ स्टाफ जैसी भूमिकाएं भी निभाई हैं, जहां उन्होंने घरेलू सुरक्षा से संबंधित नीतियों का खाका तैयार किया था। उनकी इस नियुक्ति से यह साफ संकेत मिलता है कि ट्रंप का दूसरा कार्यकाल और अधिक सख्त इमिग्रेशन नियमों और देश से बाहर निकालने की कार्रवाई पर केंद्रित रहने वाला है।

मिडटर्म चुनाव के बाद बदली सियासी तस्वीर

मिडटर्म चुनाव में रिपब्लिकन पार्टी को कांग्रेस के दोनों सदनों में डेमोक्रेट्स से बड़ी हार का सामना करना पड़ा है। ऐसे कठिन समय में स्टीफन मिलर को सरकार का सबसे शक्तिशाली प्रशासनिक पद सौंपना ट्रंप की मंशा को साफ करता है। चीफ ऑफ स्टाफ का पद राष्ट्रपति के दैनिक कामकाज, महत्वपूर्ण प्रशासनिक फैसलों और बैठकों के समन्वय के लिए जिम्मेदार होता है। मिलर का इस कुर्सी पर बैठना यह दर्शाता है कि ट्रंप अपनी राजनीतिक प्राथमिकताओं को बदलने के मूड में बिल्कुल नहीं हैं। वे अपनी सख्त नीतियों को लागू करने के लिए उसी व्यक्ति को चुनना चाहते हैं जो उनकी विचारधारा का सबसे प्रबल समर्थक रहा हो।

मिलर और सुसी वाइल्स की प्रतिक्रिया

अपनी नई जिम्मेदारी मिलने के बाद स्टीफन मिलर ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स के माध्यम से अपनी प्रतिक्रिया साझा की। उन्होंने कहा कि उनका मिशन अब और अधिक स्पष्ट हो गया है। उन्होंने यह संकल्प लिया कि वे अपनी पूरी क्षमता के साथ राष्ट्रपति का समर्थन करेंगे और अमेरिका की रक्षा के लिए काम करना जारी रखेंगे। वहीं, पद से हट रहीं सुसी वाइल्स ने भी अपने अनुभव को साझा करते हुए इसे जीवन का सबसे बड़ा सम्मान बताया। 69 वर्षीय वाइल्स ने बताया कि शुक्रवार उनका इस पद पर आखिरी दिन होगा। उन्होंने अपने कार्यकाल के दौरान सीमा सुरक्षा को मजबूत करने, अर्थव्यवस्था में सुधार और करों में कटौती जैसे कार्यों का उल्लेख किया। रिपब्लिकन पार्टी के नेता और ट्रंप के समर्थकों ने भी मिलर की नियुक्ति पर उत्साह जताया है। मैट गेट्ज ने सोशल मीडिया पर IT’S MILLER TIME लिखकर अपनी खुशी जाहिर की।

प्रशासन में इस्तीफों का दौर

ट्रंप प्रशासन में हो रहे बदलाव केवल चीफ ऑफ स्टाफ तक सीमित नहीं हैं। मिडटर्म चुनाव में मिली हार के बाद न्याय विभाग से जुड़े कई बड़े अधिकारियों ने इस्तीफा देने का निर्णय लिया है। इनमें असिस्टेंट अटॉर्नी जनरल हरमीत कौर ढिल्लों (नागरिक अधिकार विभाग), असिस्टेंट अटॉर्नी जनरल जॉन आइजनबर्ग (राष्ट्रीय सुरक्षा विभाग) और फ्लोरिडा के दक्षिणी जिले के अमेरिकी अटॉर्नी जेसन रेडिंग क्विनोन्स जैसे नाम शामिल हैं। इन इस्तीफों को ट्रंप के प्रशासन में हो रहे बड़े फेरबदल के एक हिस्से के रूप में देखा जा रहा है।

करण मल्होत्रा पाबना के अंतरराष्ट्रीय संवाददाता हैं, जो अमेरिका, यूरोप और एशिया की खबरें रिपोर्ट करते हैं। वैश्विक राजनीति, अर्थव्यवस्था और बड़े अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रमों पर वे नजर रखते हैं। उनकी रिपोर्ट्स दुनिया की हलचल को पाठकों तक तेजी से पहुंचाती हैं।

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