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4 घंटे पहले
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अमेरिका और ईरान के बीच संभावित परमाणु समझौते को लेकर पर्दे के पीछे की कोशिशें तेज हो गई हैं। मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के विशेष दूत स्टीव विटकॉफ और उनके दामाद जारेड कुशनर इस मामले में सक्रिय हो चुके हैं। दोनों ने टेनेसी स्थित ओक रिज नेशनल लैब के शीर्ष परमाणु विशेषज्ञों के साथ एक महत्वपूर्ण बैठक की है।
रिपोर्ट में क्या दावा किया गया
न्यूज एजेंसी एक्सियोस की रिपोर्ट में कहा गया है कि अमेरिका ने किसी भी परमाणु डील की तैयारी पहले से ही शुरू कर दी है। इसके लिए करीब 100 विशेषज्ञों की एक टीम तैयार रखी गई है, जो समझौता होने की स्थिति में ईरान के परमाणु कार्यक्रम की निगरानी और जांच का जिम्मा संभाल सकती है।
इन विशेषज्ञों का मुख्य काम यह सुनिश्चित करना होगा कि ईरान डील की शर्तों का पालन कर रहा है या नहीं। इसके अलावा वे ईरान के यूरेनियम एनरिचमेंट को रोकने और उसके मौजूदा परमाणु सामान को सुरक्षित तरीके से निपटाने की योजना भी बना सकते हैं।
पहले भी कर चुके हैं ऐसे अभियान
बताया जा रहा है कि इस टीम में शामिल कई विशेषज्ञ इससे पहले भी परमाणु अभियानों का हिस्सा रह चुके हैं। इनमें वे लोग भी शामिल हैं जिन्होंने हाल ही में वेनेजुएला से समृद्ध यूरेनियम को हटाने के मिशन में भाग लिया था।
रिपोर्ट के अनुसार, कुछ जानकार इससे पहले ओमान भी गए थे, जहां अमेरिका और ईरान के बीच परमाणु मुद्दे पर बातचीत की जमीन तैयार की जा रही थी। यह इस ओर इशारा करता है कि दोनों देशों के बीच बातचीत अब काफी गंभीर दौर में पहुंच चुकी है।
क्या डील पक्की हो चुकी है?
हालांकि अमेरिकी अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि इस बैठक का यह अर्थ नहीं है कि समझौता तय हो गया है। फिर भी यह जरूर दिखाता है कि अमेरिका को बातचीत के सफल होने की संभावना नजर आ रही है और इसीलिए वह पहले से तैयारी कर रहा है।
एक अधिकारी ने कहा, “हम डील का इंतजार नहीं करना चाहते। अगर कोई समझौता होता है तो उसे लागू करने के लिए हमें तुरंत तैयार रहना होगा।”
क्या है ओक रिज नेशनल लैब
ओक रिज नेशनल लैब को अमेरिका के सबसे अहम परमाणु अनुसंधान संस्थानों में गिना जाता है। यहां यूरेनियम एनरिचमेंट और सेंट्रीफ्यूज तकनीकों के विशेषज्ञ काम करते हैं। इससे पहले कजाकिस्तान और लीबिया जैसे देशों की परमाणु सामग्री को सुरक्षित तरीके से हटाने में भी इस लैब की महत्वपूर्ण भूमिका रही है।
कुल मिलाकर इस घटनाक्रम को इस बात का संकेत माना जा रहा है कि भले ही अमेरिका और ईरान के बीच परमाणु समझौते की संभावना अभी तय न हुई हो, लेकिन दोनों देशों के बीच बातचीत अब एक अहम मोड़ की ओर बढ़ती दिख रही है।
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