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2 घंटे पहले
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कॉर्नेल यूनिवर्सिटी में गैंगरेप का मामला
भारत में लवली प्रोफेशनल यूनिवर्सिटी और चितकारा यूनिवर्सिटी में उपजे विवादों के बीच, सात समंदर पार अमेरिका से एक बेहद चौंकाने वाली खबर सामने आई है। अमेरिका की प्रसिद्ध कॉर्नेल यूनिवर्सिटी में कथित गैंगरेप की एक पुरानी घटना ने फिर से जोर पकड़ लिया है। इस मामले में यूनिवर्सिटी की एक पूर्व छात्रा ने गंभीर आरोप लगाए हैं, जिसके बाद स्थानीय प्रशासन ने मामले की जांच को एक बार फिर से शुरू करने का निर्णय लिया है।
कानूनी कार्रवाई और नई जांच का आधार
टॉम्पकिंस काउंटी के डिस्ट्रिक्ट अटॉर्नी मैथ्यू वैन हाउटन ने इस मामले में बड़ा खुलासा करते हुए कहा है कि इस पूरे प्रकरण को अब ग्रैंड ज्यूरी के सामने प्रस्तुत किया जाएगा। यह ज्यूरी तय करेगी कि क्या आरोपियों के खिलाफ आपराधिक आरोप तय करने के लिए पर्याप्त कानूनी आधार मौजूद हैं या नहीं। आपको बता दें कि अक्टूबर 2024 में हुई इस घटना की शुरुआती जांच में कोई ठोस आपराधिक आरोप नहीं लगाए गए थे। लेकिन अब स्थिति पूरी तरह बदल चुकी है।
यह नया घटनाक्रम 16 सितंबर को पीड़िता द्वारा दायर की गई 101 पन्नों की एक दीवानी याचिका के बाद शुरू हुआ है। इस याचिका में पीड़िता, जिसे कानूनी दस्तावेजों में जेन डो के नाम से संबोधित किया गया है, ने आरोप लगाया है कि अक्टूबर 2024 में कॉर्नेल के ची फी फ्रेटरनिटी हाउस में उसे नशीला पदार्थ और शराब देकर 7 लोगों ने यौन शोषण किया। इतना ही नहीं, शिकायत में यह भी दावा किया गया है कि आरोपी छात्रों ने एक ग्रुप चैट के जरिए अन्य सदस्यों को कमरे में बुलाने के लिए संदेश भेजे थे। याचिका के साथ इन कथित चैट के स्क्रीनशॉट भी सबूत के तौर पर संलग्न किए गए हैं।
जांच में अंतर और प्रशासन का रुख
डिस्ट्रिक्ट अटॉर्नी मैथ्यू वैन हाउटन ने स्वीकार किया कि 2024 में पुलिस को दिए गए पीड़िता के शुरुआती बयानों और हालिया दीवानी मुकदमे के आरोपों में काफी अंतर है। उन्होंने बताया कि अपनी पहली शिकायत में छात्रा ने नशीले पदार्थों के सेवन और शारीरिक संबंधों को अपनी मर्जी से बताया था, जिसके कारण नवंबर 2024 में पुलिस ने कोई केस दर्ज नहीं किया था। हालांकि, अब वैन हाउटन का कहना है कि यौन हिंसा के शिकार व्यक्तियों को अपनी बात रखने और मामले की गहराई समझने में लंबा समय लग सकता है। उन्होंने यह भी माना कि नई जांच में पीड़िता के नए बयानों और उन चैट्स के स्क्रीनशॉट को प्रमुखता दी जाएगी जो उस समय पुलिस को नहीं मिले थे।
यूनिवर्सिटी प्रशासन और वकीलों की दलीलें
पीड़िता के वकील थॉमस पी. जिउफ्रा ने पुरानी जांच को सिरे से खारिज करते हुए इसे अपर्याप्त बताया है। उन्होंने आरोप लगाया कि उनकी मुवक्किल को घटना के बाद भी उसी कैंपस में रहने के लिए मजबूर होना पड़ा, जहां आरोपी छात्र मौजूद थे, जो एक प्रकार का मानसिक और सुरक्षा संबंधी दबाव था।
दूसरी ओर, कॉर्नेल यूनिवर्सिटी प्रशासन ने इन दावों को गलत करार दिया है। यूनिवर्सिटी का कहना है कि उन्होंने मामले की औपचारिक टाइटल-IX जांच की थी और दोषी पाए गए छात्रों पर निलंबन से लेकर निष्कासन तक की कड़ी कार्रवाई की गई थी। यूनिवर्सिटी ने इन आरोपों को भी सिरे से नकार दिया कि छात्रों को केवल निबंध लिखने जैसी मामूली सजा दी गई थी। साथ ही, संस्थान ने ची फी के कैंपस अध्याय पर प्रतिबंध लगाने और यौन हिंसा को रोकने के लिए एक विशेष टास्क फोर्स गठित करने की जानकारी दी है। आरोपियों के वकीलों ने भी इन सभी आरोपों को सिरे से खारिज किया है।
शैक्षणिक परिसरों में बढ़ती असुरक्षा पर बहस
इस पूरे घटनाक्रम ने अमेरिका सहित वैश्विक स्तर पर शैक्षणिक संस्थानों में छात्राओं की सुरक्षा और यौन हिंसा की शिकायतों के निपटारे की प्रक्रिया पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। इथाका पुलिस ने भी यह माना है कि उन्हें इस घटना की जानकारी आधिकारिक तौर पर दर्ज कराने के बजाय मीडिया रिपोर्ट्स के जरिए मिली थी। आंकड़ों की बात करें तो कॉर्नेल के 2025 के सर्वेक्षण में यह चौंकाने वाला तथ्य सामने आया कि लगभग 35 प्रतिशत स्नातक छात्राओं ने अपने यूनिवर्सिटी के दिनों में गैर-सहमति वाले यौन संपर्क का अनुभव किया है। यही आंकड़ा 2023 के सर्वेक्षण में 23 प्रतिशत था, जो साफ दर्शाता है कि स्थिति चिंताजनक रूप से बिगड़ रही है। अब सबकी नजरें इस बात पर टिकी हैं कि ग्रैंड ज्यूरी इस मामले में क्या फैसला सुनाती है।
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