अमेरिका पर मंडराया महाभूकंप का खतरा! एक साथ टूट सकते हैं दो सबसे खतरनाक फॉल्ट, वैज्ञानिकों की चेतावनी विश्व एक घंटा पहले 2
नई रिसर्च के मुताबिक दक्षिणी कैलिफोर्निया में सैन एंड्रियास और सैन जैसिंटो फॉल्ट पर पिछले 1000 साल का सबसे ज्यादा टेक्टोनिक दबाव जमा हो चुका है। वैज्ञानिकों का कहना है कि ये फॉल्ट अलग-अलग या एक साथ टूटकर लॉस एंजिल्स समेत बड़े इलाके को तबाह कर सकते हैं।

कैलिफोर्निया में रहने वाले लाखों लोगों के सिर पर एक विनाशकारी भूकंप का खतरा मंडरा रहा है। एक नई रिसर्च में दावा किया गया है कि इस इलाके में कभी भी भीषण भूकंप आ सकता है, जो अमेरिका के इतिहास की सबसे बड़ी तबाही साबित हो सकता है। शोध के अनुसार सैन एंड्रियास और सैन जैसिंटो फॉल्ट सिस्टम पर जमा हुआ टेक्टोनिक तनाव पिछले 1000 साल के सबसे ऊंचे स्तर पर पहुंच चुका है, जिसकी वजह से दक्षिणी कैलिफोर्निया में महाविनाश की आशंका तेज हो गई है।

भूवैज्ञानिकों ने आगाह किया है कि यह भूकंप लॉस एंजिल्स और उसके आसपास के इलाकों को पूरी तरह तबाह कर सकता है। यह अध्ययन स्विट्जरलैंड की यूनिवर्सिटी ऑफ बर्न और यूनिवर्सिटी ऑफ हवाई के विशेषज्ञों ने मिलकर तैयार किया है। उनके मुताबिक दोनों फॉल्ट लाइन्स के बीच का सिस्टम अब बेहद नाजुक हालत में पहुंच चुका है।

क्या है कैजोन पास का खतरनाक 'अर्थक्वेक गेट'?

रिसर्च बताती है कि ये दोनों फॉल्ट अलग-अलग टूट सकते हैं और एक साथ मिलकर भी भारी तबाही मचा सकते हैं। इन दोनों के बीच एक खास जगह है जिसे कैजोन पास कहा जाता है। वैज्ञानिक इसे एक तरह का 'अर्थक्वेक गेट' मानते हैं। यहीं से सैन जैसिंटो फॉल्ट मुख्य सैन एंड्रियास फॉल्ट से अलग होता है।

वैज्ञानिकों ने पाया है कि कैजोन पास भूकंप को रोकने या उसे और बढ़ाने का काम करता है। यह इस बात पर निर्भर करता है कि फॉल्ट के टूटने के समय उनका स्ट्रेस लेवल कैसा है। इस समय सैन एंड्रियास और सैन जैसिंटो दोनों फॉल्ट का तनाव स्तर बिल्कुल एक जैसा हो चुका है, जो बेहद खतरनाक स्थिति मानी जा रही है। इसी वजह से लॉस एंजिल्स और सैन बर्नार्डिनो के साथ-साथ रिवरसाइड और कोचेला वैली पर भी गंभीर संकट खड़ा हो गया है।

वैज्ञानिकों के मॉडल ने क्या खुलासा किया?

इस अध्ययन की मुख्य लेखिका लिलियन बर्कहार्ड हैं, जो यूनिवर्सिटी ऑफ बर्न में प्लेनेटरी जियोलॉजिस्ट के पद पर कार्यरत हैं। उन्होंने कहा, ‘हमारे नतीजे बताते हैं कि कई फॉल्ट सेगमेंट्स पर स्ट्रेस लेवल अब तक के सबसे ऊंचे स्तर पर है।’ उनके अनुसार यह दबाव पिछले एक हजार साल में सबसे ज्यादा देखा गया है, जिसके चलते पूरा क्षेत्र एक साथ बड़े भूकंप का सामना कर सकता है।

इस खतरे का अंदाजा लगाने के लिए टीम ने एक खास मॉडल तैयार किया, जिसमें पिछले 1000 साल के भूकंप के इतिहास को शामिल किया गया। वैज्ञानिकों ने पेड़ के छल्लों और पुराने तलछटों के आंकड़ों का गहराई से विश्लेषण किया और दक्षिणी कैलिफोर्निया के भूकंपीय इतिहास को नए सिरे से समझा। इस सारी जानकारी को मॉडल में फीड किया गया ताकि टेक्टोनिक स्ट्रेस के पैटर्न को आसानी से पकड़ा जा सके।

क्यों डरा रहा है 1857 का इतिहास और 170 साल का इंतजार?

सैन एंड्रियास और सैन जैसिंटो फॉल्ट ने इतिहास में बहुत तबाही मचाई है। पिछले 1000 साल में इन फॉल्ट्स की वजह से 36 बड़े भूकंप आ चुके हैं, जिनमें से हर एक की तीव्रता 6.4 या उससे अधिक दर्ज की गई थी। दक्षिणी कैलिफोर्निया में आखिरी बार सबसे बड़ा भूकंप साल 1857 में आया था, जिसकी तीव्रता 7.9 मापी गई थी।

उस समय सैन एंड्रियास फॉल्ट का 205 मील लंबा हिस्सा पार्कफील्ड से कैजोन पास के बीच खिसक गया था, हालांकि वह भूकंप कैजोन पास को पार नहीं कर पाया था। इसके उलट साल 1812 में आया एक ऐसा ही मेगाक्वेक कैजोन पास से होकर गुजरा था। वैज्ञानिकों का मानना है कि अब यह घटना दोबारा होने की पूरी आशंका है। आज यह पूरा इलाका घनी आबादी वाला बन चुका है, जहां बड़ी-बड़ी इमारतें और बुनियादी ढांचा खड़ा है। करीब 170 साल बीत जाने के कारण अगला बड़ा भूकंप कभी भी आ सकता है।

ज्वाइंट और ट्राईपार्टीशन रप्चर से कैसे मचेगी महातबाही?

यह नई रिसर्च जर्नल ऑफ जियोफिजिकल रिसर्च: सॉलिड अर्थ में प्रकाशित हुई है। इसमें बताया गया है कि दोनों फॉल्ट एक बड़े धमाके के लिए पूरी तरह तैयार हैं और इस बार कैजोन पास का अर्थक्वेक गेट खुल सकता है। अगर ऐसा हुआ तो यह किसी एक अकेले फॉल्ट से होने वाले नुकसान से कहीं ज्यादा विनाशकारी होगा।

जब सैन एंड्रियास फॉल्ट की दोनों ब्रांच कैजोन पास पर आपस में मिलती हैं तो इसे ज्वाइंट रप्चर कहते हैं। वहीं अगर सैन एंड्रियास की दोनों ब्रांच के साथ सैन जैसिंटो फॉल्ट भी टूट जाए तो उसे ट्राईपार्टीशन रप्चर कहा जाता है। वैज्ञानिकों को फिलहाल इसके सटीक समय की जानकारी नहीं है, लेकिन सिस्टम के अंदर बन रहे भारी दबाव को समझना बेहद जरूरी है, ताकि सरकारी प्लानर्स और नीति-निर्माता पहले से तैयारी कर सकें।

बर्कहार्ड ने कहा, ‘यह सिस्टम गंभीर रूप से तनाव में है और फिजिक्स आधारित मॉडल हमें आने वाले खतरों की साफ तस्वीर दिखाते हैं।’

इस बड़े खतरे से निपटने के लिए क्या करना होगा?

इतने बड़े पैमाने के भूकंप से बचने के लिए पुख्ता तैयारी बहुत जरूरी है। वैज्ञानिकों का यह नया मॉडल दुनिया के दूसरे फॉल्ट जंक्शंस पर भी लागू किया जा सकता है, जिससे विश्व भर में भूकंप के खतरों का सटीक आकलन किया जा सकेगा। बर्कहार्ड ने कहा, ‘हम लाखों लोगों की जान बचाने के लिए सटीक विज्ञान का इस्तेमाल कर रहे हैं।’

इस खतरे से निपटने के लिए सबसे पहले पुरानी और कमजोर इमारतों को मजबूत बनाना होगा। इसके साथ ही इमरजेंसी रिस्पॉन्स टीमों को हर समय अलर्ट मोड पर रखना होगा और लोगों को भूकंप के दौरान सुरक्षित रहने की ट्रेनिंग लगातार देनी चाहिए। पानी और बिजली जैसी जरूरी सेवाओं के इन्फ्रास्ट्रक्चर को भी इतना मजबूत बनाना होगा कि आपदा के समय वे ठप न पड़ें।

चेतन शुक्ला
Official Verified Account

चेतन शुक्ला (Chetan Shukla) Print & Broadcast News Agency (PABNA) में 'मुख्य संपादक' हैं। वह पत्रकारिता में 15 वर्ष से ज्यादा का अनुभव रखते हैं। ये मूल रूप से उत्तर प्रदेश के रहने वाले हैं। इन्हें राजनीति और आम आदमी से जुड़ी खबरें लिखना पसंद है।

आपकी प्रतिक्रिया?


आपको यह भी पसंद आ सकता हैं

Comments

https://pabna.in/assets/images/user-avatar-s.jpg

0 comment

Write the first comment for this!