हिंद महासागर में डिएगो गार्सिया सैन्य अड्डे पर रहस्यमयी ड्रोन्स ने बढ़ाई टेंशन, ब्रिटेन और अमेरिका की चुप्पी पर उठे सवाल विश्व एक घंटा पहले 4
रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण डिएगो गार्सिया सैन्य ठिकाने के ऊपर अज्ञात ड्रोन्स देखे जाने से हड़कंप मच गया है, जिसके बाद सुरक्षा व्यवस्था को लेकर बड़े सवाल खड़े हो गए हैं।

हिंद महासागर की सुरक्षा पर मंडराया संकट

हिंद महासागर के सुदूर और बेहद संवेदनशील इलाके में स्थित डिएगो गार्सिया सैन्य अड्डे पर कुछ अज्ञात ड्रोन्स देखे जाने की खबर ने वैश्विक रक्षा हलकों में सनसनी फैला दी है। यह सैन्य अड्डा अमेरिका और ब्रिटेन का एक साझा ठिकाना है, जो बीते कई दशकों से अमेरिकी वायुसेना और नौसेना के लिए एक प्रमुख केंद्र रहा है। इस बेस की अहमियत का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि यहां अमेरिकी बॉम्बर विमानों के लिए एक विशाल रनवे बना हुआ है। इसके साथ ही, यह स्थान अमेरिकी नौसेना की परमाणु पनडुब्बियों और जंगी जहाजों के लिए एक सुरक्षित बंदरगाह के रूप में भी कार्य करता है।

रणनीतिक रूप से डिएगो गार्सिया का महत्व

डिएगो गार्सिया केवल एक सैन्य अड्डा नहीं, बल्कि अमेरिका की हिंद महासागर में सैन्य उपस्थिति का सबसे मजबूत स्तंभ है। इस बेस के बारे में कई महत्वपूर्ण बातें हैं जो इसकी संवेदनशीलता को दर्शाती हैं:

  • यहाँ अमेरिकी वायुसेना के बड़े बॉम्बर विमानों के संचालन के लिए अत्याधुनिक एयरफील्ड मौजूद है।
  • अमेरिकी स्पेस फोर्स से जुड़ी महत्वपूर्ण गतिविधियां भी इसी ठिकाने से संचालित होती हैं।
  • बेस का विशाल लैगून क्षेत्र समुद्र में मौजूद अमेरिकी लॉजिस्टिक और सप्लाई जहाजों को सुरक्षा प्रदान करने में सक्षम है।
  • यह अड्डा परमाणु हथियारों से लैस पनडुब्बियों के लिए भी एक सुरक्षित ठिकाना है।

ड्रोन का खतरा और पुरानी चुनौतियां

डिएगो गार्सिया के सामने सुरक्षा खतरे कोई नई बात नहीं हैं। पूर्व में 'इपिक फ्यूरी' अभियान के दौरान ईरान द्वारा इस बेस की ओर बैलिस्टिक मिसाइलें दागे जाने की खबरें भी सामने आई थीं। हालांकि, रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि इस बार का खतरा मिसाइलों से कहीं अलग है। ड्रोन तकनीक का इस्तेमाल एक नई और जटिल चुनौती बनकर उभरा है। वर्तमान में अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के बीच, यह घटना काफी चिंताजनक मानी जा रही है। ड्रोन्स के छोटे आकार, कम ऊंचाई पर उड़ने की क्षमता और लंबी दूरी से लॉन्च होने की सुविधा इन्हें दुश्मन के लिए एक कारगर हथियार बनाती है।

ब्रिटेन ने मानी ड्रोन होने की बात

इस पूरे घटनाक्रम पर ब्रिटेन के रक्षा मंत्रालय ने आधिकारिक रूप से पुष्टि की है कि डिएगो गार्सिया के ऊपर ड्रोन्स देखे गए हैं। हालांकि, ब्रिटिश प्रशासन ने इस मुद्दे पर गोपनीयता बरती है। मंत्रालय ने यह बताने से साफ इनकार कर दिया है कि ये ड्रोन्स कब देखे गए, इनकी संख्या कितनी थी या इन्हें कौन नियंत्रित कर रहा था। ब्रिटिश अधिकारियों का कहना है कि डिएगो गार्सिया में तैनात अमेरिकी और ब्रिटिश कमांडर वहां मौजूद कर्मियों और सैन्य संपत्ति की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए हर संभव कदम उठाने पर विचार कर रहे हैं।

अमेरिका ने क्यों साधी चुप्पी?

ब्रिटेन के बाद जब अमेरिकी अधिकारियों से इस संबंध में सवाल किया गया, तो उन्होंने भी कोई ठोस जानकारी साझा करने से मना कर दिया। अमेरिकी पेसिफिक कमांड के एक प्रवक्ता ने स्पष्ट किया कि सुरक्षा कारणों की वजह से वे सैन्य ठिकानों की सुरक्षा व्यवस्था या किए गए किसी भी खास उपाय का खुलासा नहीं कर सकते। उन्होंने केवल इतना कहा कि अमेरिकी सेना अपने कर्मचारियों और सुविधाओं की सुरक्षा के प्रति पूरी तरह सतर्क और तैयार है।

क्या बेस पर लागू हुआ था कर्फ्यू?

इस रहस्यमयी घटना के बीच 7 अगस्त को एक एयरफोर्स सोशल मीडिया पेज पर एक चौंकाने वाला दावा किया गया था। पोस्ट में यह कहा गया कि डिएगो गार्सिया के फ्यूल फार्म के पास ड्रोन्स देखे गए हैं और एहतियात के तौर पर सुबह 7 बजे से शाम 7 बजे तक बेस पर कर्फ्यू लगा दिया गया है। हालांकि, यह स्पष्ट करना जरूरी है कि यह सोशल मीडिया पेज कोई आधिकारिक सैन्य चैनल नहीं है। न तो अमेरिकी और न ही ब्रिटिश अधिकारियों ने बेस पर कर्फ्यू लगने की इन खबरों की पुष्टि की है।

कौन हो सकता है इन ड्रोन्स के पीछे?

फिलहाल यह सवाल सबसे बड़ा बना हुआ है कि आखिर ये ड्रोन्स किसके थे और उनका मकसद क्या था। अगर ये ड्रोन समुद्र से लॉन्च किए गए थे, तो यह अमेरिका के लिए एक बहुत गंभीर सुरक्षा चूक और चुनौती है। चूंकि डिएगो गार्सिया हिंद महासागर में अमेरिकी सैन्य अभियानों का केंद्र है, इसलिए ऐसी घुसपैठ किसी बड़े खतरे का पूर्वाभास भी हो सकती है। अब तक न तो किसी देश ने इसकी जिम्मेदारी ली है और न ही किसी ने ड्रोन्स की उत्पत्ति के बारे में कोई संकेत दिया है।

करण मल्होत्रा पाबना के अंतरराष्ट्रीय संवाददाता हैं, जो अमेरिका, यूरोप और एशिया की खबरें रिपोर्ट करते हैं। वैश्विक राजनीति, अर्थव्यवस्था और बड़े अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रमों पर वे नजर रखते हैं। उनकी रिपोर्ट्स दुनिया की हलचल को पाठकों तक तेजी से पहुंचाती हैं।

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