अमेरिका का शहर कॉर्पस क्रिस्टी पानी के संकट से जूझ रहा, एक फैक्ट्री डकार रही तीन लाख लोगों का हिस्सा विश्व एक महीने पहले 53
अमेरिका के टेक्सास राज्य में स्थित कॉर्पस क्रिस्टी शहर गंभीर जल संकट का सामना कर रहा है, जहाँ एक विशाल केमिकल फैक्ट्री शहर के कुल पानी की खपत के बराबर पानी इस्तेमाल कर रही है।

कॉर्पस क्रिस्टी में गहराता जल संकट

अमेरिका जैसे विकसित राष्ट्र के टेक्सास राज्य में स्थित तटीय शहर कॉर्पस क्रिस्टी इस समय अस्तित्व के एक बड़े संकट से गुजर रहा है। लगभग 3 लाख से ज्यादा की आबादी वाला यह आधुनिक शहर इन दिनों पानी की भयंकर किल्लत झेल रहा है। हालात इतने नाजुक हो गए हैं कि भविष्य में शहर में पानी के पूरी तरह खत्म होने का डर सताने लगा है। इस संकट के पीछे सबसे चौंकाने वाला कारण यहाँ चल रहा एक बड़ा औद्योगिक संयंत्र है। साल 2022 में स्थापित हुई प्लास्टिक केमिकल बनाने वाली यह फैक्ट्री अकेले इतना पानी रोजाना सोख रही है, जितना पानी इस पूरे शहर के निवासी मिलकर इस्तेमाल नहीं करते।

संकट का मुख्य कारण और उद्योगों का विस्तार

इस पानी की किल्लत के पीछे मुख्य रूप से तेजी से बढ़ता औद्योगिक क्षेत्र जिम्मेदार है। टेक्सास में तेल और गैस उद्योग के विस्तार ने बड़े कारखानों के लिए रास्ता खोल दिया है। समस्या की जड़ में वह प्लास्टिक केमिकल प्लांट है, जो साल 2022 में शुरू हुआ था। यह प्लांट अपनी मशीनों को ठंडा बनाए रखने के लिए रोजाना इतना पानी खर्च कर देता है, जो कॉर्पस क्रिस्टी के सभी नागरिकों की दैनिक खपत के बराबर है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि इस अनियंत्रित औद्योगिक खपत पर कोई स्थायी नियंत्रण नहीं पाया गया, तो शहर के सामने विनाशकारी स्थिति पैदा हो सकती है।

समुद्र के पानी को मीठा बनाने की अधर में लटकी योजना

प्रशासन की ओर से सालों से समुद्र के पानी को मीठा बनाने वाले एक बड़े प्लांट पर चर्चा की जा रही है। साल 2017 से प्रस्तावित इस परियोजना के तहत रोजाना 37.8 करोड़ लीटर पानी उपलब्ध कराने का लक्ष्य रखा गया था। यह प्लांट अमेरिका के वर्तमान सबसे बड़े डिसैलिनेशन प्लांट की तुलना में लगभग दोगुना बड़ा होगा। हालांकि, कानूनी जटिलताओं, आवश्यक मंजूरियों के अभाव और भारी फंड की कमी के कारण यह महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट अब तक धरातल पर नहीं उतर सका है। इस पूरे प्रोजेक्ट की अनुमानित लागत 579 अरब रुपए आंकी गई है।

वॉटर ब्लैकआउट का खतरा और आर्थिक चिंताएं

यदि जल स्तर में सुधार नहीं हुआ, तो स्थानीय प्रशासन के पास वॉटर ब्लैकआउट लागू करने के अलावा कोई विकल्प नहीं बचेगा। इसका सीधा अर्थ यह होगा कि शहर में पानी की आपूर्ति दिन के केवल कुछ निश्चित घंटों के लिए ही सीमित कर दी जाएगी। यह संकट केवल आम लोगों तक सीमित नहीं है, बल्कि उद्योगों पर भी गाज गिर सकती है। यदि रिफाइनरियों और फैक्ट्रियों को बंद करना पड़ा, तो स्थानीय अर्थव्यवस्था बुरी तरह चरमरा जाएगी और हजारों लोगों के रोजगार छिन जाने का खतरा भी बढ़ जाएगा।

जलवायु परिवर्तन और विशेषज्ञों की चेतावनी

विशेषज्ञों ने इस स्थिति को पूरी दुनिया के लिए एक बड़ी चेतावनी माना है। उनका कहना है कि कॉर्पस क्रिस्टी की यह स्थिति केवल एक शहर की समस्या नहीं है, बल्कि यह भविष्य का आईना है। यदि पानी के प्रबंधन में सावधानी नहीं बरती गई और जलवायु परिवर्तन को नियंत्रित नहीं किया गया, तो दुनिया के अन्य शहर भी इसी तरह के भीषण संकट की चपेट में आ सकते हैं। टेक्सास में पिछले कुछ वर्षों में रिकॉर्ड सूखा दर्ज किया गया है। हालांकि साल 2026 में थोड़ी राहत भरी बारिश हुई है, लेकिन जलाशयों में पानी का स्तर अब भी चिंताजनक रूप से काफी नीचे बना हुआ है।

शहर प्रशासन द्वारा किए जा रहे वैकल्पिक उपाय

संकट को टालने के लिए नगर प्रशासन ने कई वैकल्पिक रास्तों पर काम करना शुरू किया है:

  • गहरे भूजल कुओं के जरिए प्रतिदिन करीब 1.2 करोड़ गैलन पानी निकाला जा रहा है।
  • उद्योगों में कूलिंग सिस्टम के लिए रीसाइकल्ड वॉटर का उपयोग करने की योजना पर गंभीरता से विचार किया जा रहा है।
  • अगस्त 2024 से ही आम जनता पर बगीचों में पानी देने और कार धोने जैसी गैर-जरूरी गतिविधियों पर पूर्ण प्रतिबंध लागू कर दिया गया है।
करण मल्होत्रा पाबना के अंतरराष्ट्रीय संवाददाता हैं, जो अमेरिका, यूरोप और एशिया की खबरें रिपोर्ट करते हैं। वैश्विक राजनीति, अर्थव्यवस्था और बड़े अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रमों पर वे नजर रखते हैं। उनकी रिपोर्ट्स दुनिया की हलचल को पाठकों तक तेजी से पहुंचाती हैं।

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