हरियाणा
एक महीने पहले
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अंबाला में कान की स्वास्थ्य समस्याओं का बढ़ता संकट
अंबाला के नागरिक अस्पताल में इन दिनों कान से जुड़ी बीमारियों के मरीजों का तांता लगा हुआ है। अस्पताल की ओपीडी में रोजाना बड़ी संख्या में ऐसे लोग पहुंच रहे हैं जो कान दर्द, संक्रमण, सुनने में कमी और कान में गंदगी जमने जैसी परेशानियों से जूझ रहे हैं। चिकित्सकों का मानना है कि बदलती जीवनशैली के साथ लोग अपनी सेहत को लेकर गंभीर नहीं हैं, खासकर कानों की सफाई करने के तरीकों में बरती गई लापरवाही अब घातक साबित हो रही है।
डॉक्टर की चेतावनी, ईयर बड्स और हाइड्रोजन पेरॉक्साइड का खतरा
अंबाला छावनी नागरिक अस्पताल में अपनी सेवाएं दे रहे आयुर्वेदिक चिकित्सक डॉ. जितेंद्र वर्मा का कहना है कि कान एक अत्यंत नाजुक और संवेदनशील अंग है। लोग अक्सर बिना किसी विशेषज्ञ की सलाह लिए कानों को साफ करने के लिए कॉटन स्टिक यानी ईयर बड्स और हाइड्रोजन पेरॉक्साइड का इस्तेमाल करते हैं। यह आदत फायदे के बजाय उल्टा नुकसान पहुंचाती है। डॉ. वर्मा के अनुसार, ईयर बड्स का लगातार और अधिक उपयोग करने से कान की नली के अंदर छोटे-छोटे घाव बन सकते हैं, जो बाद में गंभीर संक्रमण का रूप ले लेते हैं। इसके अलावा, कई मामलों में ईयर बड्स के उपयोग से कान का मैल बाहर निकलने की जगह और अधिक अंदर धंस जाता है, जिससे सुनने की क्षमता पर बुरा असर पड़ता है और सुनने में दिक्कत महसूस होने लगती है।
पानी का प्रभाव और संक्रमण का जोखिम
डॉ. जितेंद्र वर्मा ने यह भी स्पष्ट किया है कि कानों के स्वास्थ्य के लिए पानी सबसे बड़ा जोखिम कारक है। नहाते समय कानों के भीतर सीधे पानी का जाना या तेज धार के कारण पानी अंदर पहुंच जाना कान के अंदर नमी पैदा करता है। यही नमी बैक्टीरिया और फंगस के पनपने के लिए अनुकूल वातावरण तैयार करती है, जिससे संक्रमण का खतरा बढ़ जाता है। यदि कभी कान में पानी चला भी जाए, तो उसे किसी नुकीली चीज या ईयर बड से साफ करने की कोशिश बिल्कुल नहीं करनी चाहिए। कान को प्राकृतिक तरीके से ही सूखने देना सबसे सुरक्षित उपाय है।
हाइड्रोजन पेरॉक्साइड के इस्तेमाल में सावधानी
हाइड्रोजन पेरॉक्साइड के संबंध में डॉक्टर ने सख्त चेतावनी जारी की है। इसका उपयोग केवल तभी किया जाना चाहिए जब कोई योग्य चिकित्सक इसकी सलाह दे। यदि किसी व्यक्ति के कान के पर्दे में पहले से कोई समस्या है या वहां घाव है, तो हाइड्रोजन पेरॉक्साइड का अनियंत्रित उपयोग स्थिति को अत्यंत गंभीर बना सकता है। इसलिए बिना मेडिकल सलाह के किसी भी प्रकार के घरेलू नुस्खे या रसायनों का कान के अंदर उपयोग करना खतरनाक साबित हो सकता है।
आयुर्वेद में कान की देखभाल और उपचार
डॉ. वर्मा ने आयुर्वेद का जिक्र करते हुए बताया कि प्राचीन चिकित्सा पद्धति में कानों की देखभाल के लिए कर्णपूरण नामक प्रक्रिया का विस्तार से वर्णन मिलता है। इस प्रक्रिया में औषधीय तेलों का उपयोग करके कानों की सफाई की जाती है और उन्हें स्वस्थ रखा जाता है। उन्होंने शार्क तेल और अंबामर तेल जैसे आयुर्वेदिक तेलों को कान के स्वास्थ्य के लिए लाभकारी बताया है, लेकिन यह भी स्पष्ट किया कि इन तेलों का प्रयोग भी केवल चिकित्सकीय सलाह के आधार पर ही करना चाहिए।
कब और क्या करें?
अस्पताल में आने वाले मरीजों को परामर्श देते हुए डॉ. वर्मा ने कहा कि यदि किसी व्यक्ति को कान में लगातार खुजली, तेज दर्द, कम सुनाई देना या मैल जमा होने जैसा अहसास हो, तो उसे बिल्कुल भी देरी नहीं करनी चाहिए। ऐसे मामलों में किसी भी घरेलू टोटके को अपनाने के बजाय तुरंत किसी ईएनटी विशेषज्ञ या अनुभवी चिकित्सक से संपर्क करना चाहिए। समय रहते सही जांच और चिकित्सकीय उपचार अपनाकर कान की गंभीर समस्याओं से बचा जा सकता है। अपनी लापरवाही से कान को स्थायी नुकसान पहुंचाने के बजाय सतर्कता बरतना ही एकमात्र समाधान है।
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