हरियाणा
एक घंटा पहले
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जून की चिलचिलाती गर्मी का असर अब केवल इंसानों तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि इसकी मार पशुओं की सेहत और उनके दूध उत्पादन पर भी सीधे तौर पर पड़ने लगी है। लगातार चढ़ते पारे और हीटवेव के बीच अंबाला जिले के पशुपालक अपने मवेशियों को इस तपिश से बचाने के लिए तरह-तरह के उपाय अपना रहे हैं। कहीं तबेलों में कूलर लगाए जा रहे हैं तो कहीं फॉगर और फव्वारा सिस्टम की व्यवस्था की जा रही है, ताकि गायों और भैंसों को थोड़ी राहत मिल सके।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि समय रहते उचित प्रबंध नहीं किए गए तो पशुओं के बीमार पड़ने और दूध की मात्रा में भारी गिरावट आने का खतरा बढ़ सकता है। जिले के ग्रामीण इलाकों की कई डेयरियों और तबेलों में इन दिनों गर्मी से बचाव के खास इंतजाम नजर आ रहे हैं। पशुपालक दिन में कई बार अपने मवेशियों को नहला रहे हैं और फॉगिंग सिस्टम के जरिए तबेलों का तापमान नियंत्रित रखने की कोशिश कर रहे हैं, जिससे पशुओं को राहत मिलने के साथ उनकी सेहत भी बेहतर बनी हुई है।
गर्मी में बढ़ रहा है हीट स्ट्रेस का खतरा
अंबाला पशुपालन विभाग के एसडीओ सुदेश कुमार के अनुसार, इन दिनों तापमान लगातार बढ़ रहा है, जिसके चलते पशुओं में हीट स्ट्रेस की समस्या तेजी से बढ़ रही है। उन्होंने बताया कि गर्मी का सबसे बड़ा प्रभाव दूध उत्पादन पर पड़ रहा है और कई जगहों पर दूध की मात्रा घटती दर्ज की जा रही है। इसके साथ ही इस मौसम में डायरिया और अन्य मौसमी बीमारियों का जोखिम भी बढ़ जाता है।
उन्होंने बताया कि विभाग की ओर से पशुपालकों के लिए एक विशेष एडवाइजरी जारी की गई है। इसके तहत पशुओं को सुबह 11 बजे से शाम 5 बजे तक धूप में न रखने की सलाह दी गई है। मवेशियों को हमेशा छायादार जगह पर बांधना चाहिए और नियमित अंतराल पर साफ व ताजा पानी पिलाते रहना चाहिए। उनका कहना है कि गर्मी के मौसम में पशुओं को पानी की अधिक आवश्यकता होती है, इसलिए उन्हें समय-समय पर भरपूर मात्रा में पानी उपलब्ध कराना चाहिए।
तबेलों को ठंडा रखने के आसान उपाय
सुदेश कुमार ने बताया कि पशुपालक अपने तबेलों की खिड़कियों पर जूट की बोरियां लटका सकते हैं और उन पर बीच-बीच में पानी डालते रह सकते हैं। इससे अंदर आने वाली हवा ठंडी हो जाती है और पशुओं को राहत मिलती है। इसके अलावा डेयरियों में कूलर और पंखों की व्यवस्था भी जरूरी है। उन्होंने सुझाव दिया कि पशुओं को दिन में एक-दो बार पानी के फव्वारों या पाइप की मदद से नहलाते रहना चाहिए, ताकि उनके शरीर का तापमान संतुलित बना रहे।
बासी रोटी और फंगस लगा भोजन हो सकता है जानलेवा
पशुपालन विभाग ने पशुपालकों को आगाह करते हुए कहा है कि कई लोग घरों में बची हुई पुरानी रोटियां पशुओं को खिला देते हैं। चार-पांच दिन पुरानी रोटियों पर अक्सर सफेद रंग की फंगस जम जाती है, जो मवेशियों के लिए बेहद खतरनाक होती है। इस फंगस से बनने वाले विषैले तत्व पशुओं के लीवर और दूसरे आंतरिक अंगों को नुकसान पहुंचा सकते हैं। कई बार ऐसी लापरवाही पशु की मौत का कारण तक बन जाती है।
शादी-समारोह का बचा मीठा भी पहुंचाता है नुकसान
उन्होंने बताया कि कुछ लोग शादियों और आयोजनों में बचा हुआ भोजन भी पशुओं को खिला देते हैं। खासकर जलेबी, रसगुल्ले और अन्य मिठाइयों की बची हुई चाशनी अधिक मात्रा में खिलाना पशुओं के लिए हानिकारक साबित हो सकता है। जरूरत से ज्यादा मीठा भोजन पशुओं के पाचन तंत्र को प्रभावित करता है और कई बार जहरीला असर भी पैदा कर देता है।
सेहत से जुड़ा है दूध उत्पादन और आमदनी
पशु चिकित्सकों का कहना है कि पशुओं की अच्छी सेहत का सीधा संबंध दूध उत्पादन और पशुपालकों की आमदनी से है। अगर पशु गर्मी और बीमारियों से सुरक्षित रहेंगे तो दूध उत्पादन भी बेहतर बना रहेगा। यही वजह है कि इस भीषण गर्मी में मवेशियों को पर्याप्त पानी, हरा चारा, संतुलित आहार और ठंडा वातावरण उपलब्ध कराना बेहद जरूरी है। यदि किसी पशु में बीमारी के लक्षण दिखाई दें तो बिना देरी किए उसे नजदीकी पशु चिकित्सालय में दिखाना चाहिए, ताकि समय रहते उसका इलाज हो सके।
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