AI-171 हादसा: मासूम बेटी का हाथ थामे विदा हुए परवेज, गर्भवती पत्नी ने बाद में बेटे को दिया जन्म गुजरात 2 घंटे पहले 3
एयर इंडिया की दुर्घटनाग्रस्त फ्लाइट में गुजरात के परवेज वोहरा, उनकी 5 साल की बेटी और मौसी की जान चली गई थी। हादसे के एक साल बाद पीड़ित परिवार आज भी जवाब और इंसाफ का इंतजार कर रहा है।

12 जून 2025 की वह तारीख आज भी पूरे देश को झकझोर देती है। एयर इंडिया की वह अभागी उड़ान, जो आसमान में उठी तो जरूर, मगर चंद सेकेंड में ही मलबे और मौत में बदल गई। इस रोंगटे खड़े कर देने वाले हादसे में 260 से ज्यादा लोगों की जान चली गई थी। आज इस मनहूस घटना को पूरा एक साल बीत चुका है। जांच की फाइलें आगे सरकीं, मुआवजा भी बंट गया, मगर जो चेहरे हमेशा के लिए छिन गए, वे लौटकर नहीं आए। इसी त्रासदी में गुजरात के खेड़ा जिले के ठासरा गांव के परवेज वोहरा, उनकी 5 साल की नन्ही बेटी और मौसी ने दम तोड़ दिया था। एक साल बाद यह परिवार किस हाल में है, यही हमारी इस खास ग्राउंड रिपोर्ट का सार है।

हादसे से सिर्फ 10 दिन पहले लौटे थे वतन

खेड़ा जिले के ठासरा गांव के रहने वाले परवेज वोहरा पिछले चार साल से लंदन में बस चुके थे। हादसे से ठीक 10 दिन पहले ही वह अपनी 5 साल की बेटी को साथ लेकर अपने वतन लौटे थे। इसकी वजह थी दांतों का इलाज और माता-पिता से मिलने की तड़प। किसी को भनक तक नहीं थी कि अपनों से यह मुलाकात आखिरी साबित होगी।

एयरपोर्ट से निकलते ही मोबाइल पर आई मनहूस खबर

12 जून को परवेज के भाई रोमिल वोहरा उन्हें हंसते-मुस्कुराते एयरपोर्ट पर विदा कर आगे बढ़े ही थे कि मोबाइल पर आई एक खबर ने उनके पैरों तले से जमीन खींच ली। रोमिल बताते हैं, "मैं भाई को छोड़कर बस कुछ ही किलोमीटर आगे पहुंचा था, तभी पता चला कि फ्लाइट क्रैश हो गई है। हम सिविल अस्पताल की ओर भागे। दिनभर कुछ साफ नहीं हुआ, लेकिन रात 10 बजे जब हमसे डीएनए सैंपल मांगा गया, तो मैं समझ गया कि अब मेरा परिवार इस दुनिया में नहीं रहा।"

लंदन में 9 महीने की गर्भवती थीं पत्नी

हादसे के समय परवेज की पत्नी लंदन में 9 महीने की गर्भवती थीं। उन्हें यह झूठ बोलकर भारत बुलाया गया कि सभी आईसीयू में भर्ती हैं। यहां पहुंचकर जब उन्हें असलियत मालूम हुई, तो मानो आसमान ही टूट पड़ा। परवेज के अंतिम संस्कार के कुछ ही दिन बाद उनकी पत्नी ने एक बेटे को जन्म दिया। परिवार को लगा जैसे परवेज ही लौट आया हो, मगर हकीकत यही है कि इस नवजात और उसकी 8 साल की बहन के सिर से पिता का साया हमेशा के लिए उठ चुका है।

मुआवजा तो मिला, पर अपने कभी नहीं लौटेंगे

टाटा और एयर इंडिया ने मुआवजा तो दे दिया, लेकिन रोमिल का आरोप है कि एयरलाइन और प्रशासन का रवैया बेहद संवेदनहीन रहा। सच यह है कि एक साल गुजर जाने के बाद भी पीड़ित परिवारों के मन में कई सुलगते सवाल बाकी हैं। आखिर इस हादसे का जिम्मेदार कौन है? ब्लैक बॉक्स की जांच किस मुकाम तक पहुंची? रोमिल वोहरा दो टूक कहते हैं, "हमें सिर्फ इतना जानना है कि गुनहगार कौन है। ब्लैक बॉक्स की जांच पूरी पारदर्शिता के साथ होनी चाहिए। जो भी कसूरवार है, उसे कड़ी से कड़ी सजा मिले।"

इस हादसे में अपनों को खोने वाले इन परिवारों के दिन तो जैसे-तैसे गुजर रहे हैं, मगर त्रासदी की यादें आज भी मन से नहीं मिटतीं। अब उन्हें सिर्फ एक ही चीज का इंतजार है — गुनहगारों को सजा मिले।

चेतन शुक्ला (Chetan Shukla) Print & Broadcast News Agency (PABNA) में 'मुख्य संपादक' हैं। वह पत्रकारिता में 15 वर्ष से ज्यादा का अनुभव रखते हैं। ये मूल रूप से उत्तर प्रदेश के रहने वाले हैं। इन्हें राजनीति और आम आदमी से जुड़ी खबरें लिखना पसंद है।

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