आगरा से क्यों गायब हुआ गन्ना? कभी लहलहाती थी फसल, अब बस इतिहास में दर्ज उत्तर प्रदेश एक घंटा पहले 2
मुगल काल से आजादी तक का गवाह रहा आगरा कभी बड़े पैमाने पर गन्ना उगाने के लिए जाना जाता था, लेकिन गिरते जलस्तर, खारे पानी में बढ़ते फ्लोराइड और आसपास शुगर मिल न होने ने इस फसल को जिले से पूरी तरह खत्म कर दिया।

उत्तर प्रदेश का आगरा एक प्राचीन शहर माना जाता है, जिसने मुगल शासन से लेकर आजादी की लड़ाई तक अनेक ऐतिहासिक घटनाओं को करीब से देखा है। यह शहर सिर्फ अपनी इमारतों के लिए ही नहीं, बल्कि अपनी खेती और देसी फसलों के लिए भी पहचाना जाता रहा है। एक दौर था जब यहां बड़े पैमाने पर गन्ने की फसल तैयार होती थी, लेकिन समय के साथ हालात ऐसे बदले कि आज यह फसल जिले से पूरी तरह गायब हो चुकी है।

इन तीन बड़ी वजहों ने छीनी गन्ने की मिठास

किसान प्रमुख के अनुसार आगरा में लगातार गिरता जलस्तर, खारा पानी और आसपास किसी शुगर मिल का न होना — ये तीन कारण मिलकर गन्ने की खेती को जिले से खत्म कर गए। उन्होंने बताया कि गन्ने की फसल को पर्याप्त मात्रा में पानी की आवश्यकता होती है। आगरा में घटते जलस्तर और खारे पानी के चलते यह फसल धीरे-धीरे नष्ट होने लगी और अंततः जिले से पूरी तरह विलुप्त हो गई।

फतेहपुर सीकरी में कभी झूमती थी फसल

आगरा के किसान मोहन सिंह चाहर बताते हैं कि कई साल पहले तक जिले में अच्छे-खासे पैमाने पर गन्ना उगाया जाता था। उनके मुताबिक उनके पिता और दादा फतेहपुर सीकरी क्षेत्र में इस फसल की खेती किया करते थे। लेकिन लगातार गिरते जलस्तर और खारे पानी ने इस फसल को बर्बाद करना शुरू कर दिया। आज स्थिति यह है कि आगरा में गन्ना बिल्कुल नहीं उगाया जा रहा और यह फसल अब सिर्फ इतिहास के पन्नों में ही पढ़ी जाती है।

पानी की कमी और फ्लोराइड का दोहरा वार

किसान का कहना है कि गन्ने की खेती में अधिक पानी की जरूरत पड़ती है, मगर जिस तेजी से आगरा में जलस्तर गिरा, उससे खेतों में सबसे पहले पानी का संकट खड़ा हुआ। इसके बाद दूसरी मुसीबत यह आई कि पानी में फ्लोराइड की मात्रा बढ़ने लगी, जिसके चलते गन्ने की फसल धीरे-धीरे खराब होती गई और खेत बंजर होते चले गए।

बंद शुगर मिल और किसानों की बेबसी

किसान नेता मोहन सिंह चाहर बताते हैं कि एक दौर में आगरा का गन्ना काफी मशहूर था, जो आज पूरी तरह खत्म हो चुका है। उनके अनुसार घटते जलस्तर और खारे पानी के साथ-साथ आसपास शुगर मिल न होना भी इस फसल की बर्बादी की बड़ी वजह रहा। उन्होंने बताया कि मथुरा जिले में एक शुगर मिल हुआ करती थी, जो लंबे समय तक बंद रही। इसी कारण किसानों को अपना गन्ना दूर-दराज तक ले जाना पड़ता था, जिससे उन्हें नुकसान उठाना पड़ता था।

हालांकि अब इस मिल को दोबारा खोला जा रहा है, लेकिन इसका फायदा आगरा को छोड़कर बाकी जिलों के किसानों को मिलेगा, क्योंकि यहां दूसरे जिलों का गन्ना ही आसानी से रखा जा सकेगा।

चेतन शुक्ला
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चेतन शुक्ला (Chetan Shukla) Print & Broadcast News Agency (PABNA) में 'मुख्य संपादक' हैं। वह पत्रकारिता में 15 वर्ष से ज्यादा का अनुभव रखते हैं। ये मूल रूप से उत्तर प्रदेश के रहने वाले हैं। इन्हें राजनीति और आम आदमी से जुड़ी खबरें लिखना पसंद है।

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