इमरान खान को 'देश छोड़ने' का नोटिस: जानिए क्या है पूरा मामला और 2020 के कलकत्ता हाईकोर्ट के फैसले से इसका कनेक्शन राष्ट्रीय राजनीति 4 घंटे पहले 4
राजनीतिक प्रदर्शन में शामिल होने के कारण बॉलीवुड अभिनेता इमरान खान को 28 अक्टूबर तक भारत छोड़ने का आदेश दिया गया है। यह वाकया 2020 के पोलिश छात्र कामिल के मामले से मेल खाता है, जिसमें कलकत्ता हाईकोर्ट ने अहम फैसला दिया था।

राजनीतिक प्रदर्शन में शामिल होने के बाद गहराया विवाद

बॉलीवुड अभिनेता इमरान खान को प्रशासनिक स्तर पर 'लीव इंडिया' (देश छोड़ने) का नोटिस जारी किया गया है। यह पूरा घटनाक्रम 10 अक्टूबर 2026 को आयोजित एक सार्वजनिक विरोध प्रदर्शन से शुरू हुआ। कॉकरोच जनता पार्टी के बैनर तले आयोजित इस प्रदर्शन में अभिनेता इमरान खान ने भाग लिया था, जिसके बाद मुंबई पुलिस ने उन्हें हिरासत में ले लिया था। पूछताछ और जांच प्रक्रिया के दौरान यह बात सामने आई कि इमरान खान के पास भारतीय नागरिकता नहीं है, बल्कि वे अमेरिका के नागरिक हैं। वे भारत में ओवरसीज सिटीजनशिप ऑफ इंडिया (OCI) कार्ड के जरिए रह रहे हैं और अपना कामकाज संभालते हैं।

अमेरिकी नागरिकता और OCI कार्डधारक होने का खुलासा होने के तुरंत बाद अधिकारियों ने कानूनी कार्रवाई करते हुए उन्हें देश छोड़ने का निर्देश जारी कर दिया। इमरान खान को भारत से प्रस्थान करने के लिए 28 अक्टूबर 2026 तक की मियाद दी गई है। इस आदेश के बाद विदेशी नागरिकों और OCI कार्डधारकों की सार्वजनिक व राजनीतिक गतिविधियों में हिस्सेदारी को लेकर कानूनी सवाल खड़े हो गए हैं।

पांच साल पुराना मामला: पोलिश छात्र कामिल सिएडचिंस्की की कहानी

इमरान खान के खिलाफ हुई इस कार्रवाई ने ठीक 5 साल पुराने यानी वर्ष 2020 के एक बहुचर्चित मामले की याद ताजा कर दी है। उस समय पोलैंड के रहने वाले एक छात्र कामिल सिएडचिंस्की (Kamil Siedczynski) को भी इसी तरह देश छोड़ने का नोटिस थमाया गया था।

उस दौरान छात्र कामिल ने पश्चिम बंगाल के कोलकाता शहर में आयोजित नागरिकता संशोधन कानून (CAA) के विरोध में निकाली गई एक रैली में हिस्सा लिया था। किसी विदेशी नागरिक द्वारा राजनीतिक विरोध प्रदर्शन में शामिल होने को आधार बनाकर तत्कालीन सरकार ने विदेशी नागरिक कानून के प्रावधानों के तहत सख्त रुख अपनाया था और कामिल को 'लीव इंडिया' का नोटिस थमा दिया था।

कलकत्ता हाईकोर्ट का फैसला और कानूनी नजीर

सरकार द्वारा दिए गए 'लीव इंडिया नोटिस' के खिलाफ पोलिश छात्र कामिल सिएडचिंस्की ने कलकत्ता हाईकोर्ट की शरण ली थी। उच्च न्यायालय ने मामले की सुनवाई करते हुए सरकार द्वारा जारी नोटिस में कई विधिक खामियां पाईं और निष्कासन आदेश को पूरी तरह से निरस्त (रद्द) कर दिया।

कलकत्ता हाईकोर्ट ने उस समय लागू कानून और पेश किए गए तथ्यों के आधार पर अपना निर्णय सुनाते हुए कई महत्वपूर्ण बातें कही थीं:

  • किसी भी राजनीतिक रैली या प्रदर्शन में महज भाग लेना अपने आप में किसी विदेशी नागरिक के खिलाफ देश से निकालने जैसी कार्रवाई को न्यायसंगत ठहराने के लिए पर्याप्त नहीं है।
  • जब तक किसी व्यक्ति के खिलाफ कानून का उल्लंघन करने का कोई ठोस और वैध कानूनी आधार मौजूद न हो, तब तक केवल उपस्थिति के आधार पर ऐसी प्रशासनिक कार्रवाई नहीं की जा सकती।
  • अदालत के इस फैसले ने स्पष्ट किया था कि पर्याप्त वैधानिक कारणों के बिना केवल प्रदर्शन में शामिल होने पर विदेशी नागरिक को निष्कासित नहीं किया जा सकता।

मौजूदा मामले में क्या हो सकते हैं कानूनी रास्ते?

वर्ष 2020 में कलकत्ता हाईकोर्ट द्वारा दिया गया फैसला इस बात का एक बड़ा उदाहरण है कि राजनीतिक रैलियों में शामिल होने मात्र से किसी OCI कार्डधारक या विदेशी नागरिक के खिलाफ निष्कासन का आधार स्वतः सिद्ध नहीं होता। इमरान खान को 28 अक्टूबर तक का समय दिया गया है, ऐसे में देखना होगा कि क्या वे भी 2020 के इस कानूनी नजीर का सहारा लेकर अदालत का दरवाजा खटखटाते हैं या नहीं।

देवेंद्र पांडेय पाबना के राजनीतिक संवाददाता हैं और राष्ट्रीय राजनीति, सरकार तथा नीतियों पर रिपोर्टिंग करते हैं। चुनाव, संसद और बड़े सियासी घटनाक्रमों का वे गहराई से विश्लेषण करते हैं। उनकी रिपोर्टिंग निष्पक्ष और तथ्यों पर आधारित होती है।

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