पश्चिम बंगाल: बीजेपी ने अपने 325 कार्यकर्ताओं पर की कार्रवाई, भ्रष्टाचार और वसूली के आरोपों से घिरी पार्टी राष्ट्रीय राजनीति एक घंटा पहले 3
पश्चिम बंगाल में सत्ता में आने के तीन महीने बाद ही बीजेपी ने अपनी ही पार्टी के 25 कार्यकर्ताओं को निलंबित कर दिया है और 300 नेताओं को कारण बताओ नोटिस जारी किया है। इन पर जबरन वसूली और भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप लगे हैं।

संगठन के भीतर अनुशासन का संदेश

पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव में मिली ऐतिहासिक जीत के बाद सत्ता संभाले हुए अभी केवल तीन महीने ही बीते हैं, लेकिन भारतीय जनता पार्टी अब अपने ही घर में बड़ी चुनौती का सामना कर रही है। पार्टी नेतृत्व ने अपने संगठन के भीतर अनुशासन को सख्त करने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। बीजेपी के सामने अब सिर्फ प्रदेश की सत्ता चलाना ही नहीं, बल्कि खुद को उन आरोपों से बचाए रखना भी एक बड़ी जिम्मेदारी है, जिनके दम पर उसने तृणमूल कांग्रेस के खिलाफ अपना पूरा राजनीतिक अभियान चलाया था।

भ्रष्टाचार और वसूली के गंभीर आरोप

हालिया घटनाक्रम में पश्चिम बंगाल बीजेपी ने प्रदेश के विभिन्न जिलों में अपने 25 कार्यकर्ताओं को पार्टी से निलंबित कर दिया है। इसके अतिरिक्त 300 से अधिक नेताओं और कार्यकर्ताओं को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है। इन सभी पर कथित तौर पर भ्रष्टाचार, जबरन वसूली और पार्टी विरोधी गतिविधियों में संलिप्त होने का गंभीर आरोप है। पार्टी के इस कदम को संगठन में सुधार और शुद्धिकरण के प्रयास के रूप में देखा जा रहा है।

टीएमसी कार्यकर्ताओं की घुसपैठ का अंदेशा

इस पूरे मामले पर बीजेपी के एक वरिष्ठ नेता ने अपनी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि जबरन वसूली एक गंभीर समस्या बनकर उभरी है। उन्होंने इसके दो मुख्य कारण बताए हैं। पहला, बीजेपी के अपने नेताओं और कार्यकर्ताओं का एक समूह इसमें शामिल है। दूसरा, सत्ता परिवर्तन के बाद कई तृणमूल कांग्रेस के कार्यकर्ता अनौपचारिक रूप से पार्टी में शामिल हो गए हैं और वे पुरानी कार्यशैली के अनुसार वैसी ही गतिविधियों में लगे हुए हैं। नेता ने स्पष्ट किया कि पार्टी के पास एक निश्चित सांगठनिक कोड और विचारधारा है, और जो भी इसे तोड़ेगा, उसके खिलाफ सख्त अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी।

नेताओं को सख्त चेतावनी

बीजेपी ने चुनाव में 293 में से 207 सीटें जीतकर एक बड़ी विजय प्राप्त की थी। जीत के तुरंत बाद प्रदेश अध्यक्ष समिक भट्टाचार्य ने दावा किया था कि टीएमसी नेताओं के लिए पार्टी में जगह नहीं होगी। हालांकि, अब भट्टाचार्य ने भी स्वीकार किया है कि पार्टी अपने भीतर से वसूली की संस्कृति को पूरी तरह खत्म नहीं कर पाई है। उन्होंने साफ तौर पर चेतावनी दी है कि भ्रष्टाचार में लिप्त किसी भी विधायक या सांसद को बख्शा नहीं जाएगा, चाहे वह पार्टी का ही सदस्य क्यों न हो।

सरकार की जीरो टॉलरेंस नीति

समिक भट्टाचार्य ने आगे कहा कि कुछ लोग पार्टी के नाम का दुरुपयोग करके अवैध वसूली कर रहे हैं। इस पर मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने कड़ी प्रशासनिक कार्रवाई शुरू की है। पार्टी सांगठनिक स्तर पर भी इस पर लगाम कसने के लिए कमर कस चुकी है। उन्होंने जोर देकर कहा कि कुछ इलाकों में हो रही ये गड़बड़ियां किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं की जाएंगी और सरकार ने इसके लिए जीरो टॉलरेंस की नीति अपनाई है। भट्टाचार्य ने कहा कि वे अगले 15 दिनों तक स्थिति पर नजर रखेंगे और इसके बाद ठोस परिणाम देखने को मिलेंगे। यह कार्रवाई पार्टी की छवि को बनाए रखने और जनता के बीच किए गए वादों पर खरा उतरने की दिशा में एक बड़ा संकेत है।

देवेंद्र पांडेय पाबना के राजनीतिक संवाददाता हैं और राष्ट्रीय राजनीति, सरकार तथा नीतियों पर रिपोर्टिंग करते हैं। चुनाव, संसद और बड़े सियासी घटनाक्रमों का वे गहराई से विश्लेषण करते हैं। उनकी रिपोर्टिंग निष्पक्ष और तथ्यों पर आधारित होती है।

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