दिल्ली
11 घंटे पहले
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नई दिल्ली: दिल्ली सरकार की केंद्रीय खरीद एजेंसी (सेंट्रल प्रोक्योरमेंट एजेंसी) में 650 करोड़ रुपये से अधिक के कथित घोटाले को लेकर भ्रष्टाचार निरोधक शाखा (ACB) ने औपचारिक रूप से FIR दर्ज कर जांच की शुरुआत कर दी है। यह कदम उपराज्यपाल और मुख्यमंत्री के निर्देश पर उठाया गया है। एजेंसी ने भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की कई धाराओं के तहत यह मामला दर्ज किया है। पूरी पड़ताल का केंद्र सरकारी अस्पतालों के लिए दवाओं, चिकित्सा उपकरणों, चादरों, एक्स-रे मशीनों और एनेस्थीसिया उपकरणों की खरीद में सामने आई कथित गड़बड़ियां हैं।
खरीद प्रक्रिया में अनियमितता के आरोप
शुरुआती जांच में यह बात उभरकर आई है कि कई सामग्रियों को बाजार भाव से कहीं ऊंची कीमत पर खरीदा गया, जिससे सरकारी खजाने को करोड़ों रुपये की चपत लगने की आशंका जताई जा रही है। जांच एजेंसियों के अनुसार केंद्रीकृत खरीद प्रणाली का दुरुपयोग कर संदिग्ध टेंडर निकाले गए। कुछ अधिकारियों पर यह भी आरोप है कि उन्होंने अपने मनपसंद लोगों की तैनाती कर समूची खरीद प्रक्रिया को प्रभावित किया। इसके साथ ही, जिन टेंडरों को पहले रोक दिया गया था, उन्हें बाद में आनन-फानन में मंजूरी देने को लेकर भी कई सवाल खड़े हुए हैं।
जांच में लापता मिलीं कई महत्वपूर्ण फाइलें
सतर्कता विभाग की पड़ताल के दौरान कई अहम टेंडरों से संबंधित फाइलें गायब मिलीं। मामला तब और गंभीर हो गया जब जांच के दौरान लॉकर खुलवाने पर भी कई जरूरी दस्तावेज नहीं मिल पाए। अब जांच एजेंसियां गायब फाइलों, टेंडर प्रक्रिया और भुगतान रिकॉर्ड के बीच के तार जोड़ने में जुटी हैं। अधिकारियों को आशंका है कि कुछ दस्तावेजों को सोच-समझकर हटाया या छिपाया गया हो सकता है।
बड़ी संख्या में तबादले और नोटिस
मामले की गंभीरता को देखते हुए स्वास्थ्य विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों समेत करीब 40 डॉक्टरों और कर्मचारियों के तबादले किए गए हैं। दूसरी ओर, ACB की टीम लगातार अधिकारियों, डॉक्टरों और कर्मचारियों से पूछताछ कर रही है। जांच में शामिल होने के लिए करीब 10 डॉक्टरों, 35 कर्मचारियों और आउटसोर्स स्टाफ को नोटिस भेजे जा चुके हैं। अधिकारियों ने साफ कर दिया है कि जो लोग जांच में सहयोग नहीं करेंगे, जानकारी छिपाएंगे या दस्तावेज मुहैया नहीं कराएंगे, उनके विरुद्ध कड़ी विभागीय कार्रवाई होगी।
खरीद व्यवस्था की होगी विस्तृत पड़ताल
ACB अब समूचे प्रकरण में खरीद प्रक्रिया, टेंडर जारी करने की व्यवस्था, भुगतान की मंजूरी और इससे जुड़े अधिकारियों की भूमिका की गहराई से जांच करेगी। जांच एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश में हैं कि कथित अनियमितताओं में कौन-कौन अधिकारी और कर्मचारी संलिप्त रहे और सरकारी धन के दुरुपयोग का दायरा कितना बड़ा है। फिलहाल मामले की जांच जारी है और आने वाले दिनों में कई अधिकारियों से पूछताछ के साथ-साथ दस्तावेजों की बारीकी से जांच की संभावना है।
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