थाईलैंड में नौकरी का झांसा और गोल्डन ट्रायंगल की काली दुनिया: कैसे 800 भारतीय बने बंधक राष्ट्रीय राजनीति 2 महीने पहले 82
सोशल मीडिया पर मिली आकर्षक नौकरी के बदले थाईलैंड गए करीब 800 भारतीय नागरिक म्यांमार सीमा के पास गोल्डन ट्रायंगल में फंस गए हैं, जहां उनसे जबरन साइबर ठगी कराई जा रही है। बीड पुलिस और विदेश मंत्रालय अब इन युवाओं को सुरक्षित निकालने के प्रयास में जुटे हैं।

सोशल मीडिया के जाल में फंसी युवाओं की जिंदगी

विदेश जाकर सुनहरे भविष्य की तलाश करने वाले सैकड़ों भारतीय युवाओं के सपने उस वक्त बिखर गए जब उन्हें अपनी मेहनत की कमाई के बजाय बंधक बनाकर रखा गया। थाईलैंड में नौकरी का लालच देकर करीब 800 भारतीय नागरिकों को म्यांमार और थाईलैंड की सीमा पर बसे कुख्यात इलाके गोल्डन ट्रायंगल में फंसा लिया गया है। इन युवाओं को वहां ले जाकर साइबर धोखाधड़ी करने वाले गिरोहों द्वारा बंधक बना लिया गया है। अब इन्हें वापस वतन लाने के लिए बीड पुलिस और भारत का विदेश मंत्रालय युद्ध स्तर पर काम कर रहे हैं। यदि आपको भी सोशल मीडिया के माध्यम से विदेश में नौकरी का कोई आकर्षक ऑफर मिल रहा है, तो पहले उसकी पूरी सच्चाई और पुष्टि करना बेहद जरूरी है, क्योंकि यह मामला साइबर अपराध के एक बड़े नेटवर्क की ओर इशारा करता है।

मामले की शुरुआत और एक पीड़ित की आपबीती

इस पूरे मामले का खुलासा तब हुआ जब महाराष्ट्र के बीड जिले के एक 24 वर्षीय युवक ने अपने घर वालों से संपर्क किया। इस युवक को सोशल मीडिया पर एक विज्ञापन के जरिए बैंकॉक में नौकरी का लालच दिया गया था। विज्ञापन में यह दावा किया गया था कि उसे डेटा एंट्री जैसे सरल काम के लिए प्रतिमाह लगभग 70 हजार रुपये का वेतन दिया जाएगा। मोटी कमाई के सपने देखकर युवक ने आवेदन किया और 4 जून को पुणे से बैंकॉक के लिए रवाना हो गया। बैंकॉक पहुंचने के बाद सब कुछ बदल गया। उसे वहां से सीधे म्यांमार सीमा के नजदीक स्थित एक सुनसान इलाके में ले जाया गया। वहां उसके पहुंचते ही पासपोर्ट और सभी महत्वपूर्ण दस्तावेज छीन लिए गए। तब उसे एहसास हुआ कि वह नौकरी नहीं बल्कि एक बेहद खतरनाक साइबर अपराधी गिरोह के जाल में फंस चुका है।

क्या है यह खतरनाक गोल्डन ट्रायंगल?

गोल्डन ट्रायंगल का नाम दक्षिण-पूर्व एशिया के उस भौगोलिक क्षेत्र के लिए उपयोग किया जाता है जहां म्यांमार, लाओस और थाईलैंड की सीमाएं आपस में मिलती हैं। यह इलाका दशकों से अवैध गतिविधियों और संगठित अपराधों के लिए बदनाम रहा है। हाल के वर्षों में यह क्षेत्र अंतरराष्ट्रीय ऑनलाइन ठगी करने वाले गिरोहों का प्रमुख केंद्र बनकर उभरा है। यहां सक्रिय अपराधी गिरोह अन्य देशों के युवाओं को नौकरी का झांसा देकर अपने ठिकानों तक बुलाते हैं और फिर उन्हें अपनी मर्जी से साइबर फ्रॉड करने के लिए मजबूर करते हैं।

युवाओं को किस तरह बनाया जा रहा है मोहरा?

पीड़ितों ने जो आपबीती बताई है, वह बेहद भयावह है। उन्हें जंगलों के बीच बने कैंपों में रखा गया है। इन युवाओं को रोजाना 18-18 घंटे तक कंप्यूटर के सामने बैठाकर काम करने के लिए मजबूर किया जाता है। उनसे लोगों को फर्जी निवेश के जरिए लूटना, ऑनलाइन दोस्ती के नाम पर धोखाधड़ी करना और विभिन्न डिजिटल माध्यमों से ठगी के काम करवाए जाते हैं। यदि कोई युवा काम को करने से इनकार करता है या लक्ष्य पूरा नहीं कर पाता है, तो उसे मारपीट और मानसिक प्रताड़ना का सामना करना पड़ता है। इन कैंपों से निकलकर भागना लगभग नामुमकिन है क्योंकि ये बहुत दूरदराज और दुर्गम इलाकों में स्थित हैं। वहां पहुंचते ही युवाओं का मोबाइल और पासपोर्ट छीन लिया जाता है ताकि वे दुनिया से संपर्क न कर सकें।

बीड पुलिस और अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क का खुलासा

बीड के उस युवक ने अपनी जान जोखिम में डालकर जैसे-तैसे अपनी पत्नी को संदेश भेजा और पूरी स्थिति से अवगत कराया। इसके बाद परिजनों ने स्थानीय पुलिस को सूचित किया। बीड पुलिस ने मामले की गंभीरता को समझते हुए गहन जांच शुरू की, जिसमें चौंकाने वाली बातें सामने आईं। पता चला कि यह कोई अकेला मामला नहीं है, बल्कि सैकड़ों भारतीय इसी प्रकार इस अंतरराष्ट्रीय मानव तस्करी और साइबर क्राइम सिंडिकेट का शिकार बने हैं। केवल महाराष्ट्र से ही करीब 25 युवाओं के इस जाल में फंसा होने की जानकारी सामने आई है। बीड पुलिस अब केंद्र सरकार और विदेश मंत्रालय के साथ मिलकर इन युवाओं की पहचान करने और उन्हें सुरक्षित भारत वापस लाने के लिए समन्वय स्थापित कर रही है।

कैसे काम करते हैं ऐसे गिरोह: युवाओं के लिए चेतावनी

जांच एजेंसियों ने इन गिरोहों के काम करने के तरीके को लेकर एक चेतावनी जारी की है। आमतौर पर ये अपराधी निम्नलिखित चरणों में अपना जाल बिछाते हैं:

  • आकर्षक विज्ञापन: सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर भारी वेतन और आसान काम का लालच दिया जाता है।
  • यात्रा का पूरा इंतजाम: शिकार का भरोसा जीतने के लिए वीजा, फ्लाइट टिकट और वहां रहने-खाने की पूरी व्यवस्था करने का दिखावा किया जाता है।
  • नियंत्रण और कैद: संबंधित देश पहुंचने के बाद उन्हें सुनसान इलाकों में ले जाया जाता है और उनके पासपोर्ट व अन्य दस्तावेज जबरन छीन लिए जाते हैं।
  • साइबर अपराध: युवाओं को धमकी देकर फर्जी कॉल, निवेश फ्रॉड और अन्य प्रकार की डिजिटल धोखाधड़ी करने के लिए इस्तेमाल किया जाता है।

अधिकारियों ने सभी से अपील की है कि विदेश में किसी भी नौकरी के प्रस्ताव को स्वीकार करने से पहले कंपनी की साख और पूरी जानकारी की पुष्टि अवश्य करें। किसी भी अनजान व्यक्ति के कहने पर विदेश की यात्रा करने से बचें और अपने परिजनों को हमेशा अपनी लाइव लोकेशन और जानकारी साझा करते रहें।

सान्वी राणा पाबना के क्राइम एवं राज्य रिपोर्टर हैं, जो अपराध और विभिन्न राज्यों की क्षेत्रीय खबरें कवर करते हैं। कानून-व्यवस्था, जांच और बड़ी आपराधिक घटनाओं की वे जिम्मेदार रिपोर्टिंग करते हैं। तथ्यों की पुष्टि और संवेदनशीलता उनके काम की पहचान हैं।

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