भारत
एक दिन पहले
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विचारों
ड्रोन युद्ध में भारत का नया गेमचेंजर
आधुनिक दौर की सैन्य रणनीतियों में युद्ध का स्वरूप पूरी तरह बदल चुका है। आज के समय में महंगी बैलिस्टिक मिसाइलों से ज्यादा खतरा सस्ते और घातक ड्रोन झुंडों से है। रूस और यूक्रेन के बीच चल रहे युद्ध और पश्चिम एशिया के ताजा संघर्षों ने यह साबित कर दिया है कि कैसे छोटे ड्रोन भी बड़े सैन्य ठिकानों को भारी नुकसान पहुंचाने में सक्षम हैं। ऐसी चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में भारत ने अपना स्वदेशी एंटी-ड्रोन सिस्टम भार्गवास्त्र तैयार किया है, जो भविष्य के हवाई खतरों से निपटने में एक सबसे बड़ा गेमचेंजर साबित होने वाला है।
दुनिया का अनूठा एंटी-ड्रोन सिस्टम
सोलर डिफेंस एंड एयरोस्पेस लिमिटेड यानी SDAL द्वारा विकसित भार्गवास्त्र की क्षमताएं दुनिया भर के रक्षा विशेषज्ञों को हैरान कर रही हैं। यह दुनिया का पहला ऐसा स्वदेशी एंटी-ड्रोन सिस्टम है, जो महज 10 सेकेंड के भीतर 64 माइक्रो-मिसाइलें दागने में सक्षम है। इसकी खासियत यह है कि यह एक साथ आने वाले ड्रोन स्वार्म को हवा में ही पूरी तरह तबाह कर सकता है। मौजूदा समय में दुनिया के ज्यादातर डिफेंस सिस्टम सीमित संख्या में ही इंटरसेप्टर दाग पाते हैं, लेकिन भार्गवास्त्र की एक साथ दर्जनों ड्रोन को निशाना बनाने की तकनीक इसे सबसे अलग और घातक बनाती है।
2030 तक तीन-स्तरीय सुरक्षा कवच
कंपनी के चेयरमैन सत्यनारायण नुवाल ने जानकारी दी है कि भार्गवास्त्र को महज एक ड्रोन नाशक हथियार तक सीमित नहीं रखा जाएगा। इसे चरणबद्ध तरीके से विकसित करते हुए वर्ष 2030 तक एक तीन-स्तरीय एयर डिफेंस शील्ड में तब्दील करने की योजना है। इस प्रणाली को तीन अलग-अलग दूरी के घेरों में विभाजित किया गया है, जो भारत की हवाई सुरक्षा के लिए एक मजबूत कवच का काम करेंगे:
- 2.5 किलोमीटर का सुरक्षा घेरा: यह भारतीय सेना की वर्तमान जरूरतों को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है, जो नजदीक आने वाले किसी भी ड्रोन को तुरंत मार गिराने में सक्षम है।
- 6 किलोमीटर का सुरक्षा घेरा: सिस्टम का इलेक्ट्रो-ऑप्टिकल ट्रैकिंग सिस्टम यानी EOTS पहले ही 6 किलोमीटर तक के लक्ष्यों को सटीक रूप से पहचानने में सक्षम है। अब इस दूरी तक मार करने वाली इंटरसेप्टर मिसाइलें विकसित की जा रही हैं। इसका रडार बहुत छोटी हवाई वस्तुओं को भी ट्रैक करने की क्षमता रखता है।
- 25 किलोमीटर का सुरक्षा घेरा: यह इस सिस्टम का सबसे बड़ा और शक्तिशाली अपग्रेड होगा। जब यह चरण पूरा हो जाएगा, तो भार्गवास्त्र न केवल ड्रोन, बल्कि बड़े UAV, लंबी दूरी के हवाई प्लेटफॉर्म और अन्य उभरते खतरों को भी हवा में ही नष्ट कर सकेगा।
सुदर्शन चक्र विजन को मिलेगी मजबूती
भार्गवास्त्र को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सुदर्शन चक्र विजन का एक महत्वपूर्ण हिस्सा माना जा रहा है। जिस तरह इजरायल का आयरन डोम उसकी हवाई सुरक्षा का आधार है, ठीक उसी तरह भारत अपने इस स्वदेशी नेटवर्क के जरिए देश के आसमान को सुरक्षित बनाने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है। रक्षा जानकारों का कहना है कि यह सिस्टम न केवल सैन्य ठिकानों के लिए एक ढाल का काम करेगा, बल्कि रणनीतिक शहरों और संवेदनशील परिसंपत्तियों की रक्षा में भी अहम भूमिका निभाएगा।
लागत प्रभावी और उच्च मारक क्षमता
युद्ध के दौरान हर छोटे ड्रोन पर करोड़ों रुपये की मिसाइल खर्च करना न तो व्यावहारिक है और न ही आर्थिक रूप से टिकाऊ। भार्गवास्त्र यहीं सबसे बड़ी भूमिका निभाता है। यह कम लागत में अत्यधिक मारक क्षमता प्रदान करता है, जिससे भारत की महंगी एयर डिफेंस मिसाइलों पर निर्भरता काफी हद तक कम हो जाएगी। 23-24 जुलाई, 2026 को नागपुर स्थित सुविधा केंद्र में भारतीय थल सेना, नौसेना और वायुसेना के सामने जब इस वाहन पर लगे मल्टी-लेयर्ड काउंटर-स्वार्म ड्रोन सिस्टम का प्रदर्शन किया गया, तो इसकी क्षमताओं ने तीनों सेनाओं को काफी प्रभावित किया। आने वाले चार वर्षों में यह सिस्टम भारत की रक्षात्मक शक्ति को नई ऊंचाइयों पर ले जाने के लिए पूरी तरह तैयार है।
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