उत्तर प्रदेश
3 घंटे पहले
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उत्तर प्रदेश में स्वास्थ्य विभाग की बड़ी कार्रवाई
उत्तर प्रदेश के चिकित्सा जगत में उस समय हड़कंप मच गया जब 41 फर्जी डॉक्टरों के एक बड़े गिरोह का खुलासा हुआ। ये सभी आरोपी आयुर्वेदिक चिकित्सा पद्धति के नाम पर मरीजों का इलाज कर रहे थे। आयुर्वेदिक और यूनानी तिब्बी चिकित्सा पद्धति बोर्ड ने गहन जांच के बाद इन सभी को फर्जी पाया है। बोर्ड ने इस मामले को गंभीरता से लेते हुए लखनऊ पुलिस को तहरीर दी है और इन सभी के खिलाफ कानूनी मुकदमा दर्ज करने की मांग की है।
जाली दस्तावेजों का इस्तेमाल कर रहे थे आरोपी
जांच के दौरान यह पता चला है कि इन 41 डॉक्टरों ने बड़ी चालाकी से फर्जी कागजातों का सहारा लिया था। इन्होंने अलग-अलग संस्थानों से जाली BAMS डिग्री, फर्जी मार्कशीट और इंटर्नशिप प्रमाण पत्र तैयार करवाए थे। इसके अलावा, हरियाणा की भारतीय चिकित्सा परिषद के नाम पर फर्जी अनापत्ति प्रमाण पत्र यानी NOC का इस्तेमाल करके बोर्ड में अपना रजिस्ट्रेशन भी करवा लिया था। आयुष विभाग के तहत आने वाले इस बोर्ड में जब इन दस्तावेजों की शिकायत हुई और बोर्ड ने संबंधित विश्वविद्यालयों से इनका सत्यापन कराया, तो वे सभी डिग्रियां फर्जी पाई गईं।
पिछले 15 साल के रिकॉर्ड की होगी जांच
बोर्ड ने केवल इन 41 डॉक्टरों तक ही सीमित न रहकर मामले की गंभीरता को देखते हुए एक बड़ा फैसला लिया है। अब बीते 15 सालों में बोर्ड के साथ रजिस्टर्ड हुए सभी डॉक्टरों की डिग्रियों की दोबारा जांच की जाएगी। सरकार का मकसद यह सुनिश्चित करना है कि कोई भी अयोग्य व्यक्ति मरीजों की जान से खिलवाड़ न कर सके।
राजनीतिक गलियारों में भी गूंजी गूंज
इस पूरे मामले पर प्रदेश की योगी सरकार के मंत्री ओम प्रकाश राजभर का बयान भी सामने आया है। उन्होंने इस पूरे प्रकरण पर कटाक्ष करते हुए कहा कि पिछली अखिलेश सरकार के कार्यकाल के दौरान बड़े स्तर पर फर्जी डिग्रियां बांटी गई थीं। उन्होंने कहा कि वर्तमान सरकार इन सभी फर्जीवाड़ों की निष्पक्ष जांच करवा रही है ताकि स्वास्थ्य व्यवस्था को पूरी तरह से दुरुस्त किया जा सके।
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