सोनम वांगचुक के 26 दिनों के उपवास पर अभिजीत दीपके का संदेश, कहा- यह एक सर्वोच्च बलिदान है भारत एक महीने पहले 47
कॉकरोच जनता पार्टी के प्रदर्शन के बाद अभिजीत दीपके ने सोनम वांगचुक के संघर्ष को नमन किया है, वहीं सरकार ने छात्रों की सभी मांगें मान ली हैं।

सोनम वांगचुक के संघर्ष को अभिजीत दीपके का नमन

कॉकरोच जनता पार्टी द्वारा किए जा रहे विरोध प्रदर्शन के समापन के बाद अभिजीत दीपके ने एक्टिविस्ट सोनम वांगचुक के प्रति गहरा आभार व्यक्त किया है। अभिजीत दीपके ने सोशल मीडिया पर सोनम वांगचुक की भूख हड़ताल के दौरान की चार तस्वीरें साझा कीं। उन्होंने अपनी पोस्ट के माध्यम से कहा कि सोनम वांगचुक ने जो योगदान दिया है, उसे शब्दों में समेट पाना किसी के लिए भी संभव नहीं है। उनका बलिदान देश के लिए एक प्रेरणा बन गया है।

अभिजीत दीपके ने अपने पोस्ट में लिखा कि सोनम वांगचुक द्वारा अपनाया गया गांधीवादी सत्याग्रह पूरे देश को नई ऊर्जा के साथ जगाने का काम कर रहा है। उन्होंने आगे कहा, 26 दिनों का उपवास इस देश के युवाओं के लिए कोई साधारण घटना नहीं, बल्कि एक पवित्र और सर्वोच्च बलिदान के समान है। यह संघर्ष इतिहास के पन्नों में उस नैतिक शक्ति के रूप में दर्ज रहेगा जिसने कठिन से कठिन परिस्थितियों में भी हम सभी को एकजुट करने का काम किया। हम आपके इस सत्याग्रह के लिए हमेशा आभारी रहेंगे और आपसे सदैव प्रेम करते रहेंगे।

सोनम वांगचुक ने जताई प्रसन्नता

इस पूरे घटनाक्रम पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए सोनम वांगचुक ने कहा कि वे सरकार और धर्मेंद्र प्रधान द्वारा उठाए गए सकारात्मक कदमों का पूरी तरह से स्वागत और सम्मान करते हैं। उन्होंने देशवासियों को इस उपलब्धि पर बधाई दी और इसे लोकतंत्र की जीत करार दिया। सोनम वांगचुक ने अपनी टीम, कॉकरोच जनता पार्टी के सदस्यों, देशभर के छात्रों, युवाओं और बुजुर्गों का विशेष आभार जताया, जो लोकतंत्र की रक्षा के लिए मजबूती से खड़े रहे। उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया कि पूरे आंदोलन के दौरान प्रदर्शनकारियों ने जिस तरह से शांति बनाए रखी, वह बेहद सराहनीय है।

सोनम वांगचुक ने भविष्य के लिए उम्मीद जताई है कि देश में सुधार की प्रक्रिया जारी रहेगी। उन्होंने कहा कि देश केवल हार या जीत से नहीं बनता, बल्कि शिक्षा और गवर्नेंस में सुधार से आगे बढ़ता है। उन्होंने आशा व्यक्त की कि सरकार की उदारता केवल मांगों को मानने तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि शिक्षा व्यवस्था में बड़े बदलाव लाएगी। उनके अनुसार, देश को अब डर के बजाय प्रेम और स्नेह से चलाया जाना चाहिए और सच्चाई के मार्ग पर आगे बढ़ना चाहिए।

सरकार ने स्वीकार की प्रदर्शनकारियों की शर्तें

यह पूरा विवाद तब थमा जब शनिवार को धर्मेंद्र प्रधान ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री के पद से इस्तीफा दे दिया। इसके बाद कॉकरोच जनता पार्टी के प्रवक्ताओं की मुलाकात केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा और जितेंद्र सिंह से हुई। इस उच्च स्तरीय बैठक के दौरान सरकार ने आंदोलनरत छात्रों की सभी मांगें मानने का निर्णय लिया। इन मांगों में प्रमुख रूप से प्रदर्शनकारी छात्रों के खिलाफ दर्ज किसी भी एफआईआर को रद्द करना और नीट पेपर लीक के कारण जान गंवाने वाले छात्रों के पीड़ित परिवारों को एक करोड़ रुपये का मुआवजा प्रदान करना शामिल है। इन निर्णयों के बाद कॉकरोच जनता पार्टी ने अपना विरोध प्रदर्शन समाप्त करने की आधिकारिक घोषणा कर दी।

देवेंद्र पांडेय पाबना के राजनीतिक संवाददाता हैं और राष्ट्रीय राजनीति, सरकार तथा नीतियों पर रिपोर्टिंग करते हैं। चुनाव, संसद और बड़े सियासी घटनाक्रमों का वे गहराई से विश्लेषण करते हैं। उनकी रिपोर्टिंग निष्पक्ष और तथ्यों पर आधारित होती है।

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