अहमदाबाद सीरियल ब्लास्ट मामला: 38 दोषियों की फांसी पर आज गुजरात हाई कोर्ट सुनाएगा फैसला गुजरात एक महीने पहले 53
साल 2008 के अहमदाबाद बम धमाकों के मामले में आज गुजरात हाई कोर्ट अपना अहम फैसला सुनाने जा रहा है। सेशन कोर्ट द्वारा सुनाई गई 38 दोषियों की फांसी की सजा पर सभी की नजरें टिकी हैं।

अहमदाबाद में हुए भीषण धमाकों का न्याय आज

साल 2008 में अहमदाबाद शहर को दहला देने वाले सीरियल बम धमाकों के मामले में आज का दिन बेहद महत्वपूर्ण है। गुजरात हाई कोर्ट आज इस मुकदमे में अपना बहुप्रतीक्षित फैसला सुनाने वाला है। पूरे देश की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि क्या निचली अदालत द्वारा 38 दोषियों को दी गई फांसी की सजा पर मुहर लगेगी या इसमें कोई बदलाव होगा।

20 धमाकों से दहल उठा था शहर

यह खौफनाक घटना 26 जुलाई 2008 की है, जब मात्र 49 मिनट के भीतर अहमदाबाद के विभिन्न हिस्सों में एक के बाद एक 20 बम धमाके हुए थे। इन सिलसिलेवार हमलों में 59 लोगों ने अपनी जान गंवा दी थी। आतंकियों ने शहर के नरोदा, बापू नगर, सरखेज और हटकेश्वर जैसे अत्यधिक भीड़भाड़ वाले इलाकों को अपना निशाना बनाया था। बमों को अस्पतालों, सार्वजनिक परिवहन की बसों, बाजारों और अन्य भीड़भाड़ वाले सार्वजनिक स्थलों पर प्लांट किया गया था।

सेशन कोर्ट का ऐतिहासिक फैसला

इस केस के करीब 14 साल बाद, वर्ष 2022 में सेशन कोर्ट ने अपना फैसला सुनाया था। अदालत ने इस मामले को दुर्लभतम श्रेणी में रखते हुए 38 आरोपियों को फांसी और 11 अन्य को उम्रकैद की सजा सुनाई थी। यह देश का एक अभूतपूर्व मामला था, जिसमें किसी एक मुकदमे में इतनी बड़ी संख्या में दोषियों को एक साथ फांसी की सजा दी गई थी। कोर्ट ने उस समय मृतकों और घायलों के परिवारों के लिए मुआवजे का भी निर्देश दिया था।

कानूनी प्रक्रिया और हाई कोर्ट का रुख

निचली अदालत के फैसले के बाद, दोषी ठहराए गए लोगों ने सजा को चुनौती देते हुए गुजरात हाई कोर्ट में अपील दायर की थी। दूसरी तरफ, राज्य सरकार ने भी दोषियों की मौत की सजा की पुष्टि के लिए हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। कानूनी नियमों के अनुसार, मौत की सजा के कार्यान्वयन के लिए हाई कोर्ट की मंजूरी अनिवार्य होती है। सुनवाई के दौरान दोषियों के अधिवक्ताओं ने पुलिस की जांच प्रक्रिया, साक्ष्यों की विश्वसनीयता और अभियुक्तों के बयानों पर सवाल खड़े किए थे।

आज क्या उम्मीद है

हाई कोर्ट की बेंच द्वारा दोनों पक्षों की लंबी दलीलों और सबूतों के विश्लेषण के बाद आज अंतिम निर्णय सुनाया जाएगा। अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि क्या हाई कोर्ट निचली अदालत के फांसी के निर्णय को बरकरार रखेगा, सजा को बदलकर उम्रकैद में तब्दील करेगा, या फिर सबूतों के अभाव में कुछ दोषियों को राहत प्रदान करेगा।

अंजलि सिंह पाबना की राज्य संवाददाता हैं, जो विभिन्न राज्यों की क्षेत्रीय खबरें और खानपान कवर करती हैं। स्थानीय घटनाओं, संस्कृति और जायके की कहानियों को वे करीब से रिपोर्ट करती हैं। अलग-अलग राज्यों की विविधता उनकी रिपोर्टिंग में नजर आती है।

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